ऑटिज्‍म में मददगार हो सकती है स्‍पीच थेरेपी

जिन लोगों को ऑटिज्म होता है उनकी संप्रेषण क्षमता अत्यधिक प्रभावित होती है। लगभग 50 प्रतिशत बच्चों में भाषा का विकास नहीं हो पाता है। इस वजह से उन्हें बातचीत करने में दिक्कत होती है। ऐसी स्थिति में ऑटिज्म रोगियों के लिए स्पीच थेरेपी बहुत जरूरी ह

Shabnam Khan
घरेलू नुस्‍खWritten by: Shabnam Khan Published at: Feb 24, 2015Updated at: Feb 24, 2015
ऑटिज्‍म में मददगार हो सकती है स्‍पीच थेरेपी

ऑटिज्म एक विकास संबंधी गंभीर रोग है, जो जीवन के प्रथम तीन वर्षों में होता है। यह रोग व्यक्ति की सामाजिक कुशलता और संप्रेषण क्षमता पर विपरीत प्रभाव डालता है। इससे प्रभावित व्यक्ति कुछ खास व्यवहार-क्रियाओं को दोहराता रहता है। यह जीवनपर्यंत बना रहने वाला विकार है। ऑटिज्मग्रस्त व्यक्ति संवेदनों के प्रति असामान्य व्यवहार दर्शाते हैं, क्योंकि उनके एक या अधिक संवेदन प्रभावित होते हैं। इन सब समस्याओं का प्रभाव व्यक्ति के व्यवहार में दिखाई देता है, जैसे व्यक्तियों, वस्तुओं और घटनाओं से असामान्य तरीके से जुड़ना।

जिन लोगों को ऑटिज्म होता है उनकी संप्रेषण क्षमता अत्यधिक प्रभावित होती है। लगभग 50 प्रतिशत बच्चों में भाषा का विकास नहीं हो पाता है। इस वजह से उन्हें बातचीत करने में दिक्कत होती है। ऐसी स्थिति में ऑटिज्म रोगियों के लिए स्पीच थेरेपी बहुत जरूरी हो जाती है। स्पीच थेरेपी ऑटिज्म से ग्रस्त लोगों की संचार संबंधी समस्याओं में काफी मदद करती है।

 

Autism in Hindi

 

ऑटिज्म रोगियों की संचार संबंधी समस्याएं

 

  • बिल्कुल बात न कर पाना।
  • गुनगुन करके बात करना या बात करते हुए संगीत निकलना।
  • बड़बड़ाना।
  • रोबोटिक स्पीच।
  • दूसरों की बातों को बेमतलब दोहराना।
  • बिना एक्सप्रैशन वाली टोन के बात करना।
  • आंखें मिलाकर बात न कर पाना।
  • बात समझने में मुश्किल।
  • शब्दों की बहुत कम समझ होना।
  • रचनात्मक भाषा की कमी।

 

Speech Tharopy in Hindi

 

ऑटिज्म में स्पीच थेरेपी का फायदा


स्पीच थेरेपी संचार को बेहतर करने में काफी मदद कर सकती है। ये ऑटिज्म से ग्रस्त लोगों के लिए संबंध बनाना और रोजमर्रा का जीवन आसान बना देती है। ऑटिज्म रोगियों के लिए स्पीच थेरेपी के निम्न फायदे हैं-

  • शब्दों को सही ढंग से कहना
  • मौखिक और अमौखिक दोनों तरीके से बातचीत
  • मौखिक और अमौखिक दोनों तरह की बातचीत को समझना
  • अपने आप बातचीत शुरू करना
  • बातचीत करने या कुछ कहने के सही वक्त और जगह की पहचान होना  
  • बातचीत संबंधी कौशल का विकास
  • संबंधों को बेहतर बनाने के लिए संचार
  • लोगों से बात करने और उनके साथ खेलने का आनंद लेना

   
ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चे को जितनी जल्दी हो सके, स्पीच थेरेपी दी जानी चाहिए। जितनी जल्दी बच्चा स्पीच थेरेपी अपनाएगा, उतनी आसानी से वो बोलना सीथ पाएगा। इस थेरेपी का प्रभाव कम उम्र में अधिक पड़ता है।

Read More Articles on Alternative Therapy in Hindi

Image Source - Getty Images

Disclaimer