खाने-पीने की गलत आदतों से होने वाली बीमारियां बन सकती हैं कम उम्र में मृत्यु का कारण: शोध

हाल में हुए एक शोध के मुताबिक, भारत में खानपान की वजह से लोगों में मोटापे, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी कई समस्‍याओं के कारण अकाल मृत्‍यु हो जाती है। 

Sheetal Bisht
Written by: Sheetal BishtPublished at: Jan 27, 2020Updated at: Jan 27, 2020
खाने-पीने की गलत आदतों से होने वाली बीमारियां बन सकती हैं कम उम्र में मृत्यु का कारण: शोध

हाल में हुए अध्‍ययन के अनुसार भारत मे बड़ी संख्या में समय से पहले होने वाली मौतों का कारण डाइट से संबंधित बीमारियां हैं। क्वीन यूनिवर्सिटी बेलफास्ट, ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने कहा, हमारे स्वास्थ्य पर हमारे खानपान का बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, समय से पहले होने वाली 60 प्रतिशत से अधिक मौत हृदय रोग, मोटापा और टाइप 2 डायबिटीज से होती हैं, जो कि इस मुद्दे पर अधिक शोध के लिए एक दबाव की आवश्यकता को दर्शाते हैं। 

डॉ. मैकएवॉय, क्वींस यूनिवर्सिटी बेलफास्ट, स्कूल ऑफ मेडिसिन और बायोमेडिकल साइंसेज, ने शोध के बारे में कहा, "भारत में प्रमुख शोधकर्ताओं, आहार विशेषज्ञों और चिकित्सकों के साथ काम करने के माध्यम से, हमने आदतन आहार का एक उपयुक्त उपाय विकसित किया है, जो पोषक तत्वों की कमी और गैर-संचारी रोग दोनों के लिए उच्च संवेदनशीलता वाले विभिन्न डाइट के पैटर्न और सामाजिक आर्थिक वर्गीकरण को ध्यान में रखता है।"

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Diet related diseases can lead premature death

शोधकर्ताओं ने "कुपोषण के दोहरे बोझ" को देश में एक प्रमुख चुनौती के रूप में भी बताया। डॉ. मैकएवॉय ने कहा, “यह महत्वपूर्ण है कि हम इस डेटा को अब राष्ट्रीय स्तर पर समेटना शुरू कर दें, ताकि हमारे पास इस महामारी के आसपास की स्वास्थ्य संबंधी नीतियों और स्वास्थ्य देखभाल योजनाओं को सूचित करने के लिए ज्ञान हो। हमारे शोध का अगला चरण व्यापक पैमाने पर आहार की व्यवहार्यता का परीक्षण करना होगा”।

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 अगले 30 वर्षों में, भारत में प्रिवेंटेबल डिजीज को खतरा 8 प्रतिशत से बढ़कर 19 प्रतिशत हो गया है और इसके साथ ही खाने की माँग में भी वृद्धि हुई है। 

 एम्स के जेरियाट्रिक मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष डॉ. एबी डे ने बताया, “न्‍यूट्रीशन रिसर्च की व्याख्या भारत में खाना पकाने के समान जटिल है, जहां हर 100 मील पर बोली और आहार बदलते हैं। संज्ञानात्मक उम्र बढ़ने पर आहार के प्रभाव को समझना दिलचस्प हो सकता है। क्या मनोभ्रंश या डिमेंशिया की उत्पत्ति में मसाले सुरक्षात्मक हैं? मस्तिष्क की उम्र बढ़ने पर प्रोटीन की कमी वाले आहार का क्या प्रभाव होगा? क्या एक उपकरण विकसित करना संभव है, जो देश भर में डाइट पैटर्न पर कब्जा कर सकता है? ये कुछ ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें क्वीन यूनिवर्सिटी बेलफास्ट और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली के बीच बहुत ही उत्पादक सहयोग से संबोधित किया जा रहा है।”

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