गर्भावस्‍था समस्‍यायें

प्रेग्नेंसी से पहले, इस दौरान और प्रेग्नेंसी के बाद भी महिलाओं के लिए कई सारी समस्याएं आती हैं।  ये समस्याएं सिर्फ फिजिकल ही नहीं होतीं, बल्कि मानसिक भी होती हैं। ऐसे में जरूरी ये है कि आप अपने प्रेग्नेंसी के दौरान स्वास्थ्य से जुड़ी तमाम स्थितियों का ख्याल रखें और इससे जुड़े कोई भी संकेत को नजरअंदाज न करें। इसके अलावा भी प्रेग्नेंसी की ऐसी कई आम समस्याएं हैं, जो हर महिला अनुभव करती हैं। तो आइए जानते हैं प्रेग्नेंसी से जुड़ी सभी समस्याएं। 

गर्भावस्था से पहले की समस्याएं-  Before Pregnancy

गर्भावस्था के दौरान ही नहीं इसके पहले भी महिलाओं को बहुत सारी परेशानियां होती हैं। ऐसे में जरूरी ये है कि आप अपने स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें और सुनिश्चित करें जो समस्याएं आपको हो रही हैं, वो प्रेग्नेंसी को कितना प्रभावित कर सकती हैं।  उदाहरण के लिए, जैसे

  • -आपको कोई गंभीर बीमारी हो।
  • -थायराइड और डायबिटीज हो।
  • -हाई बीपी यो लो बीपी की परेशानी
  • -अस्थमा और एलर्जी
  • - स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कुछ दवाएं, जो गर्भावस्था के दौरान हानिकारक हो सकती हैं।
  • - पिछली गर्भावस्था की किसी भी समस्या के बारे में डॉक्टर से बताएं। 
    • गर्भावस्था के दौरान की समस्याएं -During Pregnancy

      गर्भावस्था के लक्षण और जटिलताएं हल्की और कष्टप्रद हो सकती हैं। गर्भावस्था के दौरान होने वाली समस्याओं में शारीरिक और मानसिक स्थितिया शामिल हो सकती हैं जो मां या बच्चे किसी के भी स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। ये समस्याएं गर्भवती होने के कारण हो सकती हैं या बदतर हो सकती हैं। हालांकि,  गर्भावस्था की शुरुआती समस्याएं (Early pregnancy problems) की बात करें, तो उनमें शामिल हैं

      • -प्रारंभिक गर्भावस्था में ब्लीडिंग
      • -गर्भपात
      • -अन्य गंभीर समस्याएं।

      गर्भावस्था की आम समस्याएं -Common pregnancy problems 

      1.एनीमिया  (Anemia)

      एनीमिया स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं की सामान्य संख्या से कम होने पर होती है। महिलाओं में खून की कमी के पीछे सबसे बड़ा कारण एनीमिया है। गर्भावस्था से संबंधित एनीमिया से पीड़ित महिलाएं थका हुआ और कमजोर महसूस कर सकती हैं। ऐसे में आयरन और फोलिक एसिड सप्लीमेंट लेने से यह मदद मिल सकती है। इसके अलावा डॉक्टर इस दौरान लगातार महिलाओं का ब्लड टेस्ट करवाते हैं। 

      2. यूटीआई इंफेक्शन (UTI Infection)

      मूत्र पथ का इंफेक्शन प्रेग्नेंसी में बहुत आम हो जाती है। ये यूटीआई इंफेक्शन के कारण होता है । इसके इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जैसे कि

      • -बाथरूम का उपयोग करते समय दर्द या जलन।
      • -बुखार, थकान या अकड़न।
      • -निचले पेट में दबाव।
      • -बदबूदार या लाल पेशाब
      • -मतली या पीठ दर्द।
        • 3. हाई बीपी  (high bp) और  Preeclampsia

          गर्भावस्था से पहले और उसके दौरान हाई ब्लड प्रेशर की समस्या गर्भवती महिला और उसके बच्चे को खतरे में डालता है। यह प्रसूति संबंधी जटिलताओं जैसे कि प्रीक्लेम्पसिया एक्सैटरनल आइकन, प्लेसेंटल एबॉर्शन  और जेस्टेशनल डायबिटीज के लिए बढ़े हुए जोखिम के साथ जुड़ा हुआ है। इन महिलाओं को डिलीवरी में कई परेशानियां हो सकती हैं, जैसे कि प्रसवपूर्व प्रसव,उम्र के हिसाब से शिशु छोटा होना और शिशु मृत्यु। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गर्भवती होने से पहले रक्तचाप की समस्याओं पर चर्चा करें ताकि गर्भावस्था से पहले आपके रक्तचाप का उचित उपचार और नियंत्रण हो सके।

          4. मोटापा और वजन बढ़ना (Obesity and Weight Gain)

          गर्भवती होने से पहले एक महिला का वजन जितना ज्यादा होता है, गर्भावस्था की जटिलताओं का उतना ही अधिक जोखिम होता है, जिसमें प्रीक्लेम्पसिया, जीडीएम, स्टिलबर्थ और सिजेरियन डिलीवरी शामिल हैं। साथ ही, सीडीसी शोध से पता चला है कि गर्भावस्था के दौरान मोटापा कई सारी परेशानियों को और बढ़ा देता है। इसके अलावा वजन का कम होना भी प्रेग्नेंसी की परेशानियों को और बढ़ा सकता है।

          5. गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज  (gestational diabetes)

          गर्भावस्था के दौरान मधुमेह के प्रकारों के बारे में जानना बेहद जरूरी होता है। जेस्टेशनल डायबिटीज, वो परेशानी है जो गर्भावस्था में कई जटिलताएं पैदा करता है। मधुमेह का प्रबंधन महिलाओं को स्वस्थ गर्भधारण और स्वस्थ शिशुओं की मदद कर सकता है।

          6. मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति (Mental Health Issues)

          महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान या बाद में अवसाद का अनुभव होता है। जिनमें कुछ लक्षण शामिल हैं, जैसे कि 

          • -कम या खराब मूड
          • -भूख, नींद और ऊर्जा में परिवर्तन।
          • -ज्यादा सोचना
            • डिलीवरी से जुड़ी जटिलताएं -labor complications

              प्रसव की जटिलताएं महिला के स्वास्थ्य को बहुत ज्यादा प्रभावित करती हैं। जैसे कि 

              गर्भस्थ भ्रूण की उल्टी स्थिति (Breech position)

              एक बच्चे को एक ब्रीच स्थिति में माना जाता है जब उनके पैरों को उनके सिर की स्थिति उल्टी हो जाती है। इस स्थिति में पैदा होने वाले अधिकांश बच्चे स्वस्थ होते हैं। अगर आप अपने बच्चे में संकट के लक्षण दिखाई देते हैं तो अपने डॉक्टर से बात करें। प्रसव शुरू होने के समय बच्चा अभी भी ब्रीच स्थिति में होता है, तो अधिकांश डॉक्टर सिजेरियन डिलीवरी की सलाह देते हैं।

              प्लेसेंटा प्रेविया (Placenta previa)

              प्लेसेंटा प्रेविया का मतलब है कि प्लेसेंटा गर्भाशय ग्रीवा को कवर कर रहा है।अगर यह मामला है तो डॉक्टर आमतौर पर सिजेरियन डिलीवरी करेंगे।

              जन्म के वक्त, शिशु के वजन मे कमी होना (Low birth weight)

              कम जन्म वजन आमतौर पर गर्भावस्था के दौरान खराब पोषण या सिगरेट, शराब या ड्रग्स के उपयोग के कारण होता है। ऐसे शिशुओं को कुछ बीमारियों का ज्यादा खतरा रहता है। 

              • -श्वासप्रणाली में संक्रमण
              • - विकलांगता
              • -दिल का संक्रमण
              • -अंधापन
              • -जन्म के बाद बच्चे को कुछ महीनों तक अस्पताल में रहने की आवश्यकता हो सकती है।
                • प्रेग्नेंसी के दौरान खतरे से संकेत-Danger Signs during Pregnancy

                  प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में अगर इनमें से कुछ संकेत मिले, तो  उन्हें सचेत हो जाना चाहिए।

                  • -वजाइनल ब्लीडिंग
                  • -ऐंठन 
                  • -धुंधली दृष्टि के साथ गंभीर सिरदर्द
                  • -बुखार और बिस्तर से बाहर आते ही कमजोरी
                  • -गंभीर पेट दर्द
                  • -तेज या मुश्किल से सांस लेना।
                  • -पेट में दर्द
                  • -उंगलियों, चेहरे और पैरों में सूजन
                    • प्रेग्नेंसी की समस्याओं से बचाव का उपाय-  Preventing tips for pregnancy complications

                      हर महिला चाहती है कि उसे एक स्वस्थ और आसान प्रेग्नेंसी के साथ मां बनें। दुर्भाग्य से, कुछ महिलाओं को गर्भावस्था की कुछ जटिलताओं को विकसित करने का अधिक जोखिम होता है। ऐसे में ये जानना बेहद जरूरी है कि गर्भावस्था की समस्याओं तो विकसित करने से कैसे रोका जा सकता है। जैसे कि 

                      • -आप गर्भवती होने से पहले स्वस्थ वजन प्राप्त करके गर्भकालीन मधुमेह से संबंधित गर्भावस्था की जटिलताओं को रोक सकती हैं। जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान मोटापे से ग्रस्त हैं, उनमें गर्भावधि मधुमेह होने की संभावना अधिक होती है।
                      • -गर्भवती होने से पहले हेल्दी वेट गेन करें।
                      • -गर्भवती होने पर अपने वजन को कंट्रोल करें
                      • -स्वस्थ आहार का सेवन करें
                      • -पर्याप्त व्यायाम करें
                      • -अपने चिकित्सक द्वारा बताए गए सुझावों को मानें
                      • -फोलिक एसिड से भरपूर चीजों का सेवन
                      • -खाने में आयरन की मात्रा को बढ़ाएं।
                      • -कैल्शियम और विटामिन-सी का सेवन करें। 
                      • -बार-बार हाथ धोएं
                      • -कुछ खाद्य पदार्थों को खाने से बचें, जैसे कि फैटी फूड्स
                      • -एसटीडी और अन्य पुराने संक्रमणों के लिए परीक्षण करवाएं।
                      • -गर्भवती होने से पहले टीका लगवा लें।
                        • इन तमाम प्रकार की समस्याओं से प्रेग्नेंसी में सबसे पहले बचने की कोशिश करें। इसके लिए अपने स्वास्थ्य का शुरू से ही ख्याल रखें। प्रेग्नेंसी के पहले से ही खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रखें और प्रेग्नेंसी के दौरान लगातार डॉक्टर के संपर्क में रहें और एक हेल्दी लाइफस्टाइल का चुनाव करें। तो, इस तरह अगर आप गर्भावस्था से जुड़ी तमाम समस्याओं के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, उनके उपाय और ट्रीटमेंट के लिए एक्सपर्ट टिप्स चाहते हैं, तो ऑनली माय हेल्थ पर  पढ़ते रहें 'गर्भावस्‍था समस्‍यायें - PREGNANCY PROBLEMS IN HINDI'

                          Source: CDC

                          American College of Obstetricians and Gynecologists

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