
पूरी दुनिया में लगभग 9 मिलियन ऐसे लोग हैं, जो किसी न किसी मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं। इन लोगों के सभी प्रकार के मानसिक बीमारी के पीछे एक बड़ा कारण है अकेलापन। एक वक्त था कि लोगों के लिए अकेला रहना एक मुश्किल काम होता था। भरे पूरे परिवार के बीच वे अपने लिए अकेले होने का वक्त ढ़ूढ़ते थे पर अब लोग इतने अकेले हो गए हैं कि उनकी बड़ी बीमारियों का कारण अकेलापन है। अकेलापन आज इस तरह से बीमार कर रहा है कि हमारी उत्पादक क्षमता कर रही है। साथ ही इससे होने वाले तनाव के कारण गंभीर बीमारियों जैसे हाई-ब्लड प्रेशर, इंफेक्शन और ब्रेन स्ट्रोक दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है। दरअसल हाल ही में आए एक शोध से पता चलता है कि अकेलापन किस तरह लोगों को दीमक की तरह धीरे-धीरे खा रहा है।
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क्या कहता है शोध-
दरअसल यूनाइटेड किंगडम द्वारा किए गए एक शोध में पता चला है कि पिछले 40 वर्षों के दौरान, लोनलीनेस स्केल का इस्तेमाल बढ़ा है। लोनलीनेस स्केल वो स्केल, जिसके द्वारा आज लगभग हर व्यक्ति को बीमार होने पर नापा जाता है। यहां तक कि कुछ पश्चिमी देशों में तो इसे एक महामारी कहा जा रहा है। यहां तक कि यूनाइटेड किंगडम ने पिछले हफ्ते अपनी सरकार के भीतर अकेलापन से जुड़े मामलों को देखने के लिए एक लोनलीनेस मंत्री बनाने की घोषणा की है। स्पोर्टी एंड सिविल सोसाइटी की मानें तो लगभग 15 से 20 प्रतिशत वयस्क आबादी में 9 मिलियन से अधिक वयस्कों ने अक्सर या हमेशा अकेले होने की सूचना दी है। वहीं 2012 के एक अध्ययन में पाया गया कि 60 से अधिक उम्र के 20 से 43 प्रतिशत अमेरिकी वयस्कों तीव्र अकेलेपन का अनुभव किया है।
बता दें कि जब शोधकर्ता अकेलेपन का अध्ययन करते हैं, तो वे इसे सामाजिक कनेक्शन और पारिवारिक कनेक्शन के बीच आई एक व्यक्तिगत विसंगति के रूप में परिभाषित करते हैं। इसका मतलब यह है कि आज के युवा अपने पारिवारिक और सोशल लाइफ दोनों से बचते रहते हैं। ब्रिघम यंग यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान और न्यूरोसाइंस प्रोफेसर जूलियन इस स्टेट ऑफ माइंड को 'होल्ट-लूनस्टैड' कहते हैं। यानी कि कुछ लोग, जो सामाजिक रूप से अलग-थलग हैं, पर वे अकेलापन महसूस नहीं करते हैं, जबकि कुछ लोग जो अकेले नहीं हैं और लोगों से घिरे हुए हैं पर अधिक अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। शोधकर्तोओं के अनुसार यह स्थिति और डरावनी है क्योंकि ऐसे लोगों को समझना मुश्किल हो जाता है और धीरे-धीरे वे किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो जाते हैं।
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अकेलेपन के कारण होने वाली गंभीर बीमारियां-
उच्च रक्तचाप और हृदय रोग
अकेलेपन के कारण लोगों के दिल और बल्ड सर्कुलेशन पर बहुत दवाब पड़ने लगता है। हृदय संबंधी प्रभावों को अक्सर कोर्टिसोल के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है। स्ट्रेस होर्मोन और अकेलेपन के अध्ययन से पता चला है कि लोगों को लगातार कोर्टिसोल के स्तर में वृद्धि हुई है। जो अन्य प्रकार की समस्याओं में योगदान कर सकता है। यह क्रोनिक हार्ट अटैक और हाई बल्ड प्रैसर का कारण बन सकता है। 2002 के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ अध्ययन ने दिखाया कि अकेले रहने वाले लोगों की कार्डियोवस्कुलर सिस्टम अधिक संकुचित और दबाव वाले होते हैं। अकेलेपन के शारीरिक प्रभावों की एक एनआईएच समीक्षा के अनुसार, जीवन में लगातार अस्वीकार या अकेलापन महसूस करना युवाओं में मौत का कारण बन सकता है।
शरीर की इम्यूनिटी को कम करता है
ये बड़ी ही संवेदनशील बात है कि अकेलापन आपके शरीर की इम्यूनिटी को भी कम कर सकता है। इस तरह अकेले किसी भी बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं। इसे जुड़ी 2005 के एक अध्ययन में पाया गया है कि जिन लोगों में ज्यादा अकेलापन होता है उनके शरीर में एंटीबॉडी का उत्पादन सही से नहीं होता है और वह बहुत जल्द ही किसी फ्लू या इंफेक्शन के संपर्क में आ जाते हैं।शोधकर्ताओं की मानें तो ऐसे लोगों के शरीर में स्ट्रेस होर्मोन अन्य हार्मोन और मस्तिष्क के साथ संयोजन बिठाने में असफल हो जाता है।
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खराब नींद
जब 2002 में एनआईएच ने अपने अकेलेपन का अध्ययन किया, तो शोधकर्ताओं ने उनकी प्रयोगशालाओं में पाया कि तनावग्रस्त, अकेला-महसूस करने वाले लोगों ने सदियों से अपने बेडरूम में क्या पाया है। अकेला लोग गैर-अकेले लोगों की तुलना में अधिक समय तक सोते थे पर भी उन्हें इससे आराम नहीं दिखता था। इससे पता चलता है कि निश्चित रूप से अकेलेपन के कारण नींद न आना एक बड़ी परेशानी हो सकती है। नींद न आने की वजह से ऐसे लोगों की इटिंग हैब्टिस भी खराब हो जाती है, जिससे डायबीटिज टाइए-2 का जोखिम बढ़ जाता है।
सूजन
लोनली लोग विशेष रूप से पुरानी सूजन के लिए अतिसंवेदनशील होते हैं, जिसके कारण उन्हें अल्जाइमर, धमनियों से जुड़ूी बीमारी और पीरियडोंटइटिस हो सकता है। शोध की मानें तो एकाकी लोग में स्ट्रेस हार्मोन के बढ़ने के कारण कोर्टिसोल के सूजन-रोकने वाले गुणों के लिए एक आनुवंशिक प्रतिरक्षा विकसित करते हैं, इसलिए रक्षात्मक सूजन प्रतिक्रिया बढ़ जाती है। मतलब कि अकेले होने के कारण आपके शरीर में अलग- अलग तरह के सूजन हो सकते हैं। साथ ही ऐसे लोगों में लिम्फ से जुड़े डिसॉअडर भी पाए जाते हैं।
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