हार्ट मर्मर का निदान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
May 10, 2013

heart murmur ka nidaan

कई प्रकार के मर्मर की पहचान अप्रत्याशित रूप से तब होती है, जब डॉक्टर किसी अन्य कारण से शारीरिक परीक्षण के दौरान स्टेथोस्कोप लगाकर हृदय की धड़कन सुनता है। दूसरे मामलों में, जब किसी में हृदय रोग के लक्षण हैं, डॉक्टर किसी खास हृदय रोग की विशिष्टताओं से संबंधित प्रश्न पूछता है। उदाहरण के लिए, वह आपसे पूछ सकता है कि आपको या परिवार में किसी को कभी रयूमेटिक फीवर तो नहीं हुआ था। क्योंकि बचपन में रयूमेटिक फीवर होने पर बाद में हृदय के वॉल्व में असामान्यता आ सकती है।

एंडोकार्डिटिस उन लोगों को होने की संभावना अधिक रहती है, जो इंट्रावेनस ड्रग का उपयोग करते हैं या जिनकी कोई चिकित्सकीय या दंतचिकित्सकीय शल्यक्रिया संपन्न हुई हो। आपके डॉक्टर इन जोखिम कारकों से संबंधित प्रश्न पूछ सकते हैं। जोखिम कारक वे संभावित कारण होते हैं जिनके कारण रोग होने की प्रबल संभावना होती है। अगर रोगी शिशु है तो डॉक्टर पूछ सकते हैं कि क्या परिवार में जन्मजात हृदयरोगों का कोई इतिहास तो नहीं है।

चूंकि हृदय की कोई खास समस्या विशेष प्रकार के मर्मर का कारण बनती है, डॉक्टर आपके स्वास्थ्य संबंधी इतिहास, लक्षणों और मर्मर की विशिष्ट ध्वनि, समय (हृदय पंप करते समय मर्मर करता है या रेस्ट करते समय) को देखते हुए अनिश्चित डायग्नोसिस करता है। चिकित्सकीय परीक्षण का एक अंग होने के नाते आपका डायग्नोस्टिक जांच की जाती है। जिसमें निम्न चरण शामिल हैं-


इलेक्ट्रोकार्डियोग्राफी(ईकेजी)-

ईकेजी एक दर्द रहित प्रक्रिया जिसमें हृदय की इलेक्ट्रिकल गतिविधियों (विद्युत गतिविधि) का मापन किया जाता है। जैसे-जैसे ईकेजी दिल के प्रत्येक भाग से गुजरती हैं यह ताकत और बिजली के संकेतों के समय को भी रिकॉर्ड करता है।

छाती का एक्स-रे-

छाती का एक्स-रे में भी किसी प्रकार का दर्द नहीं होता। यह एक्स-रे छाती को भीतर के मौजूद अंगों जैसे अपने दिल, फेफड़े और रक्त वाहिकाओं का चित्र लेता है। यह हृदय के आकार के बढने की संभावना और कुछ जन्मजात असामान्यताओं की जांच के लिए किया जाता है।


इकोकार्डियोग्राफी-
इस जांच में ध्वनि तरंगों का उपयोग कर हृदय की और इसके वॉल्व की संरचना का चित्र लिया जाता है।


डॉप्लर इकोकार्डियोग्राफी- 
यह जांच इकोकार्डियोग्राफी के समान ही है, लेकिन इसमें हृदय से रक्त प्रवाह के पैटर्न का चित्र लिया जाता है, ना कि हृदय की संरचनाओं का।


कार्डियक कैथेटेराइजेशन- 
इस जांच में, एक छोटी, स्टेराइल नली, जिसे कैथेटर कहते हैं, को रक्त नली के द्वारा हृदय की ओर भेजा जाता है, जिससे यह हृदय के प्रकोष्ठों के भीतर दबाव, ऑक्सीजन लेवल आदि की माप कर सके। कैथेटर के द्वारा एक प्रकार का रंजक भी प्रविष्ट कराया जाता है, जिससे हृदय की आंतरिक संरचना और रक्तप्रवाह के पैटर्न का एक्स-रे चित्र लेने में मदद मिलती है।


रक्त की जांच-
जिन लोगों में एंडोकार्डिटिस या पेरिकार्डिटिस का संदेह होता है, उनकी जांच के लिए खून की जांच आवश्यक होती है।

Loading...
Is it Helpful Article?YES1 Vote 12615 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
I have read the Privacy Policy and the Terms and Conditions. I provide my consent for my data to be processed for the purposes as described and receive communications for service related information.
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK