हार्ट फेल्योर की चिकित्‍सा

हार्ट फेल्योर में सर्जरी की सहायता से भी उपचार किया जाता है। चिकित्सा के और भी होते हैं माधयम व चरण। 

Rahul Sharma
हृदय स्‍वास्‍थ्‍यWritten by: Rahul SharmaPublished at: May 06, 2013
हार्ट फेल्योर की चिकित्‍सा

हार्ट फेल होना एक गंभीर स्थिति है। इसके चलते कई बार मरीज की जान भी जा सकती है। हार्ट फेल्योर का कोई भी संकेत मिलते ही डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए और बिना देरी किए हुए आवश्यक उपचार भी कराना चाहिए।

heart failure ki chikitsaहार्ट फेल्योर की स्थिति में डॉक्टर रोगी के चिकित्सकीय इतिहास की समीक्षा करता है। और उसके लक्षणों के विषय में विस्तार से जानने का प्रयास कर इलाज की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। वह रोगी से पूछ सकता है कि आप कितनी दूर तक बिना सांस फूले चल सकते हैं। डॉक्टर रोगी से यह भी पूछ सकता है कि सोते समय सिर के नीचे कितने तकिए लगाते हैं। और क्या रात में सोने के बाद सांस मिलने में अधिक कठिनाई के कारण आप रात में एकाएक जाग भी जाते हैं या नही।

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आपके शारीरिक परीक्षण के दौरान, डॉक्टर आपके प्रमुख शारीरिक संकेतों (जैसे-रक्तचाप और तापमान), हृदय गति और रिदम आदि की जांच कर और स्टेथोस्कोप से हृदय के असामान्य ध्वनि को सुनने की कोशिश करता है। वह रोगी के सांस लेने के दौरान फेफड़े के असामान्य ध्वनि को सुनने की कोशिश भी करेगा। वह जानने का प्रयास करेगा कि कहीं रोगी के हृदय में पानी तो नहीं भरा हुआ है। वह मरीज के पैरों और टखनों की त्वचा को दबाकर सूजन का पता लगाकर रोगी के पेट को छूकर लीवर के आकार का पता लगाने का प्रयास भी कर सकता हैं, क्योंकि हृदय के फ्लूइड बैकअप के कारण लिवर में सूजन आ सकता है।

आज पहले की अपोक्षा हार्ट फेल्योर की चिकित्सा की अधिक उत्तम तकनीक व साधन मौजूद हैं। हार्ट फेल्योर में सर्जरी की सहायता से भी अपचार किया जाता है, इन सर्जरियों मे से कुछ चरण इस प्रकार से हैं।

बाईपास सर्जरीः
 हार्ट फेल्योर मे सबसे आम सर्जरी बाईपास सर्जरी है होती है, जो रक्त को बंद हो चुकी ह्रदय धमनी के चारों ओर प्रवाह करने के लिए की जाती है।

लेफ्ट वेन्ट्रीक्युलर असिस्ट डिवाइस(एल वी ए डी)-
 लैफ्ट वेन्ट्रीक्युलर असिस्ट डिवाइस (एल वी ए डी) एक जबरदस्त उपाय है, जो आपके ह्रदय को पूरे शरीर में रक्त का संचरण करने में मदद करता है। यदि रोगी को हृदय प्रत्यारोपण (हार्ट ट्रासप्लान्ट) होना होता है तो उस स्थिति में यह प्रक्रिया रोगी को प्रत्यारोपण तक चलने-फिरने योग्य बना देती है।

हार्ट वॉल्व सर्जरीः  
 इस सर्जरी मे आवश्यक्ता होने पर हार्ट वॉल्व को ठीक किया या बदला जा सकता है।


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इनफ्रेक्ट एक्सक्लूजन सर्जरीः    
 जब बाएं निलय पर (हृदय के अदर स्थित गुहा) ह्रदय आघात होता है, तो एक निशान जैसा बन जाता है। और यह उभार प्रत्येक धड़कन के साथ बाहर आ सकते हैं। इस सर्जरी में सर्जन हृदय के ऊतकों या धमनी विस्फार के निर्जीव भाग को निकाल सकता है।

हार्ट ट्रासप्लान्ट (ह्रदय प्रत्यारोपण)-
 हार्ट ट्रासप्लान्ट तब किया जाता है जब हार्ट फेल्योर की स्थिति बहुत गंभीर होती है, और अन्‍य कोई विकल्प नहीं बचता।


रोग की जांच के लिए डायग्नोस्टिक टेस्ट की आवश्यकता भी पड़ सकती है। इसमें इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम और छाती का एक्स-रे शामिल है, जिससे हृदय के आकार में वृद्धि एवं फेफड़ों में तरल के जमाव का पता चलता है। हार्ट फेल्यर के कारण का पता लगाने के लिए दूसरी डायग्नोस्टिक जांचों की भी जरूरत हो सकती है। उदाहरण के लिए, हृदय के वॉल्व की असामान्यता, हृदय के दीवार के असामान्य गति(हृदयाघात का एक लक्षण) या दूसरी कार्डियक असामान्यता का पता लगाने के लिए इकोकार्डियोग्राम कराया जा सकता है। यह एक महत्वपूर्ण जांच है, क्योंकि इससे हृदय की मांसपेशियों के कमजोर या कड़ी होने का पता लगाया जा सकता है। इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि हार्ट फेलयर किस प्रकार का है।

 

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