हड्डियों में दर्द हो सकता है बोन कैंसर

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jun 05, 2013

haddiyo me dard ho sakta hai bone cancerयूं तो हड्डियों में दर्द होना आम बात है। लेकिन अगर यह दर्द अक्सर होने लगे तो इसे गंभीरता से लें और डॉक्टर को दिखाएं यह बोन कैंसर भी हो सकता है।

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जेनेटिक लेवल में गड़बड़ी हड्डियों में होने वाले कैंसर का सबसे बड़ा कारण है। हड्डियों में तीन से चार तरह की सेल्स होती हैं, जिनमें से किसी भी सेल में कैंसर बन सकता है। यह बीमारी ज्यादातर पांच से पच्चीस साल की उम्र में हो सकती है। बोन कैंसर का सबसे बड़ा लक्षण है लगातार हड्डियों में दर्द होना।

हड्डियों का कैंसर मुख्य रूप से दो तरह का होता है। इविंग सारकोमा और ओस्टियो सारकोमा।

इविंग सारकोमा

इविंग सारकोमा में कैंसर बड़ी हड्डियों के बीच में होता है। इसमें कैंसर सेल पहले बोन मैरो (अस्थि मज्जा) के अपरिपक्व नर्व टिशू में होता है। यह बीमारी सामान्यत: दस से बीस साल की उम्र में होती है। शरीर के कुछ भागों में इनके होने की ज्यादा संभवाना होती है। जैसे पेडू, पसलियां, ऊपरी टांगों में।

ओस्टियो सारकोमा

ओस्टियो सारकोमा में कैंसर हड्डियों के आखिरी भाग में होता है। यह कैंसर पांच से 15 साल के बच्चों में होता है। ओस्टियो सारकोमा की शिकायत घुटने, ऊपरी टांगो व ऊपरी भुजाओं में होती है।

[इसे भी पढ़े- बोन कैंसर की शुरूआत कैसे होती है]

 

लक्षण

बोन कैंसर में दर्द होना आम लक्षण है। जैसे जैसे कैंसर के सेल शरीर में विकसित होते जाते हैं उसी के अनुसार लक्षण भी सामने आते जाते हैं। नीचे दिए लक्षणों के दिखने पर डॉक्टर को जरुर दिखाएं।

  • दर्द के साथ सूजन होना।
  • हड्डियों का टूटना।
  • चक्कर आना।
  • बुखार होना।
  • वजन कम होना।
  • भूख कम लगना।

ईलाज

इविंग सरकोमा व ओस्टियो सारकोमा कैंसर के इलाज के लिए सर्जरी,रेडिएशन व कीमो थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। ट्यूमर के स्टेज व आकार पर निर्भर करता है कि किस प्रकार के इलाज का प्रयोग किया जाए।

सर्जरी

नौ हफ्ते से होने वाली किमो थेरेपी के बाद अगर ट्यूमर ठीक नहीं होता है तो उस सर्जरी के जरिए निकाल दिया जाता है। किसी अन्य भाग के टिशू को बिना नुकसान पहुचाएं सर्जरी से शरीर में होने वाले ट्यूमर को पूरी तरह से निकाला जा सकता है ।

 

[इसे भी पढ़े- हड्डियों के कैंसर से कैसे बचें]

रेडिएशन

रेडिएशन थेरेपी एक्स रे की तरह दर्द रहित होती है। थेरेपी के दौरान मशीन से निकलने वाली किरणें कैंसर वाली जगह पर पहुंचकर ट्यूमर सेल्स को खत्म करती हैं। इस थेरेपी में कुछ अन्य स्वस्थर  सेल भी क्षतिग्रस्त हो जाती है लेकिन समय के साथ वह फिर से स्वस्थु हो जाती हैं।   

 

किमोथेरेपी

किमोथेरेपी में दवाईयों के जरिए कैंसर सेल्स को खत्म किया जाता है। यह दवाएं गोली के रुप में भी हो सकती है या इंजेक्शन के द्वारा भी इसे रोगी को दिया जा सकता है। किमोथेरेपी में दवा रक्त में मिल जाता है और रक्त प्रवाह के दौरान शरीर के सभी हिस्सों में जाकर कैंसर सेल्स को मारता है। 

 

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