स्वाइन फ्लू का पर्यटन पर प्रभाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 17, 2008
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कोई भी बीमारी हो उसके दुष्परिणाम लंबे समय तक भुगतने पड़ते है। यदि बीमारी हो स्वाइन फ्लू तो ऐसी संक्रमित बीमारियां न सिर्फ स्‍वास्‍थ्‍य पर बुरा असर डालती हैं बल्कि आर्थिक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करती है। स्वाइन फ्लू का पर्यटन पर भी असर पड़ता है। पर्यटन उद्योग भारत का एक बड़ा उद्योग है, जिससे सरकार को एक अच्छी आय होती है। हमारे देश की अर्थव्यवस्था में करीब 19 प्रतिशत की हिस्सेदारी पर्यटन उद्योग की है। ऐसे में पर्यटन पर स्वाइन फ्लू का प्रभाव पड़ते ही भारत की अर्थव्यवस्था को खासा नुकसान पहुंचेगा। आइए जानते हैं कि स्वाइन फ्लू के पर्यटन पर क्या–क्या‍ प्रभाव पड़ सकते हैं।

स्वाइन फ्लू और पर्यटन

-    हर साल भारत में लगभग तीन लाख सैलानियों की आवाजाही होती है ऐसे में यदि स्वाइन फ्लू का खतरा भारत में लंबे समय तक बना रहता है तो विदेशी पर्यटकों का आना-जाना बंद हो जाएगा। जिससे भारत की अर्थव्यवस्था डांवाडोल होने का खतरा हो जाएगा।
-    विश्व में लगभग 9 प्रतिशत नौकरियाँ पर्यटन क्षेत्र से संबंधित हैं और भारत का पर्यटन उद्योग विश्व में अपना खासा स्थान बनाए हुए है। ऐसे में पर्यटन क्षेञ की नौ‍करियों पर खतरा मंडरा सकता है।
-    स्वाइन फ्लू के असर से देश में ट्रैवल एजेंट और टूर ऑप्रेटर्स का कारोबार संकट में आ सकता है। दरअसल स्वाइन फ्लू एक संक्रामक बीमारी है जो कि व्यक्ति से व्यक्ति में फैलती है। भारत में भी स्वाइन फ्लू विदेशों की देन है।
-    स्वाइन फ्लू के कारण विदेशी पर्यटकों का आना कम हो जाएगा जिससे जिन लोगों की कमाई का जरिया ही विदेशी पर्यटक है उनके लिए मुसीबतें आनी शुरू हो जाएंगी।
-    भारत में स्वाइन फ्लू के असर को देखते हुए कई विदेशी पर्यटक न सिर्फ भारत आने से कतराने लगते है बल्कि जिन्होंने आने की योजना बनाई है वे भी उस पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर हो जाते है।
-    पर्यटन पर स्वाइन फ्लू का इतना प्रभाव पड़ेगा कि भारत आने वाले सैलानियों की संख्या में न सिर्फ कमी आ सकती है बल्कि एशियाई बाजारों की ओर रूख करने वाले लोग भी इस ओर सोचेंगे।
-    स्वाइन फ्लू प्रभावित जगह से न सिर्फ विदेशी पर्यटन बल्कि घरेलू पर्यटन पर भी खासा असर दिखता है। अपने बचाव के लिए कोई भी स्वाइन फ्लू प्रभावित जगह पर जाने से बचने का हर संभव प्रयास करता है और यह सही भी है विशेषज्ञ और डॉक्टर्स भी इसी की सलाह देते है।


देश में तेजी से फैल रहे पर्यटन पर स्वाइन फ्लू के प्रभाव को कुछ सावधानियां बरतकर रोका जा सकता है।

-    छींकने और खांसने वाले व्यक्ति से कम से कम दो मीटर तक दूर रहें।
-    छींकते-खांसते वक्त मुंह पर रूमाल रखें। यह वायरस करीब दो घंटे तक वातावरण में जीवित रह सकता है, इसलिए बार-बार हाथ धोते रहें ताकि संक्रमित व्यक्ति द्वारा छोड़े गए वायरस से बचाव हो सके।
-    एच1एन1 से संक्रमित लोग कम से कम एक हफ्ते तक घर में ही रहें।
-    संक्रमण होने पर 48 घंटों के अंदर डॉक्टर की सलाह से स्वाइन फ्लू रोधी दवा का सेवन करें।
-    स्वाइन फ्लू आमतौर पर जानलेवा नहीं है ऐसे में इंफ्लूएंजा एच1एन1 वायरस के खिलाफ शरीर में प्रतिरोधिता क्षमता बढ़ाने वाली चीजों का सेवन करना चाहिए।
-    पर्यटन विभाग के अधिकारी विदेशी सैलानियों को योजनाबद्व तरीके से गाइड करें व उन्हें स्वाइन फ्लू के प्रति जागरूक करें।
-    समय-समय पर स्वाइन फ्लू की कमी और उसके प्रभावों इत्यादि के बारे में लोगों को बताते रहे। साथ ही स्वाइन फ्लू प्रभावित क्षेञों की लिस्ट अलग से बना लें।
-    पर्यटन से जुड़े लोग सिर्फ अपना नफा-नुकसान ही न देखें बल्कि सैलानियों को ठीक-ठीक जानकारी दें।
-    जिन्हें सांस की बीमारी है या दमा इत्यादि है वे लोग याञा न करें।
-    ह्वदय की, यकृत की, न्यूरोलोजिकल बीमारी या फिर डायबिटीज रोगी भी स्वाइन फ्लू प्रभावित क्षेञों में याञा न करें। इसके अलावा गर्भवती महिलाओ और 5 साल से कम आयु के बच्चों को भी स्वाइन फ्लू का काफी खतरा है। वे भी किसी भी तरह की याञा पर जानें से बचे जहां स्वाइन फ्लू फैला हो।

 

 

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