सी सेक्शन, इसकी जरूरत और इसमें होने वाली जटिलाओं को समझें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 01, 2013
Quick Bites

  • सिजेरियन यानी सी-सेक्‍शन करवाना कई बार हो जाता है जरूरी।
  • सिजेरियन में सामान्‍य प्रसव के मुकाबले अधिक जटिलताएं होती हैं।
  • सिजेरियन करवाने से महिला को प्रसव के बाद उबरने में लगता है अधिक समय।
  • कई संभावित कारण होते हैं, जिनकी वजह से करवाना पड़ता है सिजेरियन।

सिजेरियन का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है। कई महिलायें केवल प्रसव के दर्द से बचने के लिए ही इसका सहारा लेती हैं। लेकिन, क्‍या ऐसा करना सही है। क्‍या केवल दर्द से राहत पाना ही इसका मकसद है। आखिर किन विशेष परिस्थितियों में सिजेरियन करवाना चाहिए। आखिर, सिजेरियन के क्‍या खतरे हैं। सिजेरियन करवाने से पहले किन बातों का खयाल रखना चाहिए। इन सब जरूरी सवालों का जवाब जानने के लिए पढ़ें यह लेख-

सिजेरियन की परेशानियांसिजेरियन अथवा सी-सेक्‍शन, प्रसव का वह तरीका है, जिसमें शिशु के जन्‍म के लिए सर्जरी का सहारा लिया जाता है। कुछ परिस्थितियों में, सी-सेक्‍शन पहले से ही तय कर दिया जाता है। जबकि अधिकतर मामलों में, यह परिस्थितिजन्‍य होता है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, वर्ष 2009 में अमेरिका में पैदा होने वाले हर तीसरे बच्‍चे का जन्‍म सिजेरियन के जरिये हुआ था। यह वर्ष 2008 के मुकाबले दो फीसदी अधिक थी।

क्‍या मुझे सी-सेक्‍शन की जरूरत है

कई बार प्रसव में जाने से पहले ही यह तय होता है कि महिला को सिजेरियन करवाने की आवश्‍यकता पड़ेगी। इसके लिए कुछ विशेष परिस्थितियां और कारण उत्तरदायी होते हैं-

  • अगर आपका पिछला सिजेरियन 'क्‍लासिकल' वर्टिकल यूटेरिन इनसिजन हो। हालांकि यह बहुत दुर्लभ होता है। इसके अतिरिक्‍त आप इससे पहले भी सी-सेक्‍शन करवा चुकी हों।
  • अगर आपका केवल एक बार सिजेरियन हो चुका हो और वो भी हारिजोंटल यूटेरिन इनसिजन हो।
  • अगर आपको पहले भी यूटेरिन संबंधी किसी सर्जरी से गुजरना पड़ा हो ।
  • अगर आपके गर्भ में जुड़वां बच्‍चे हों। आमतौर पर इसके लिए सिजेरियन करवाने की आवश्‍यकता पड़ती है।
  • अगर आपके बच्‍चे का आकार सामान्‍य से काफी बड़ा हो। अगर आपको मधुमेह है अथवा आपका पिछला बच्‍चा सामान्‍य से बड़े आकार का हो।
  • अगर आपका बच्‍चा गर्भ में असामान्‍य पोजीशन में हो।
  • अगर आपको प्‍लेसेंटा प्रेविया हो।
  • अगर आपके गर्भद्वार पर किसी प्रकार की रुकावट हो, जिससे सामान्‍य डिलिवरी लगभग नामुमकिन हो जाए।
  • अगर आप एचआईवी-पॉजीटिव हों, और गर्भावस्‍था के करीब की गई रक्‍त जांच में यह बात सामने आए कि आपको वायरल लोड है।

सी-सेक्‍शन के खतरे

सी-सेक्‍शन एक बड़ी सर्जरी है। तो इसके अपने खतरे हैं। सी-सेक्‍शन करवाने वाली महिलाओं को सामान्‍य डिलिवरी करवाने वाली महिलाओं के मुकाबले इंफेक्‍शन होने का खतरा अधिक होता है। उन्‍हें अधिक रक्‍त बहने, रक्‍त के थक्‍के जमने, पोस्‍टपार्टम दर्द, अधिक समय तक अस्‍पताल में रहना और डिलिवरी के बाद उबरने में अधिक समय लगना, जैसी परेशानियां हो सकती है। इसके अलावा ब्‍लैडर में चोट आदि जैसी दुर्लभ दिक्‍कत भी हो सकती है।

शोध इस बात को प्रमाणित कर चुके हैं कि सी-सेक्‍शन के जरिये 39 हफ्तों से पैदा हुए बच्‍चों को श्वसन संबंधी तकलीफ होने की आशंका सामान्‍य रूप से जन्‍म लेने वाले बच्‍चों की अपेक्षा अधिक होती है।

इसके साथ ही अगर आप अधिक बच्‍चों की योजना बना रही हैं, तो हर बार सिजेरियन के बाद आपकी जटिलताएं बढ़ती जाएंगीं।

हालांकि, यह बात भी सही है कि सभी सेक्‍शन को न तो रोका जा सकता है, और न ही रोका जाना चाहिए। कुछ परिस्थितियों में सी-सेक्‍शन जरूरी हो जाता है। इसके बिना मां अथवा शिशु अथवा दोनों के प्राणों को खतरा भी पैदा हो सकता है। अपने डॉक्‍टर से इस बात की जानकारी जरूर ले लें कि आखिर आपको सी-सेक्‍शन करवाने की जरूरत क्‍यों है। इसके साथ ही उससे सी-सेक्‍शन के संभावित लाभ एवं खतरों के बारे में भी पूरी जानकारी ले लें।

 

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