वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में विकसित किया मानव लीवर

वैज्ञानिकों ने मानव अंग प्रत्यारोपण की दिशा में सफलता की ओर एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। उन्होंने प्रयोगशाला में लीवर (यकृत) विकसित किया है।

 

 अन्‍य
दंत स्वास्‍थ्‍य Written by: अन्‍य Published at: Jul 31, 2012
वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला में विकसित किया मानव लीवर

वैज्ञानिकों ने मानव अंग प्रत्यारोपण की दिशा में सफलता की ओर एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। उन्होंने प्रयोगशाला में लीवर (यकृत) विकसित किया है। यद्यपि प्रायोगिक रूप में विकसित इस लीवर का आकार अखरोट के बराबर है। इस प्रयोग को आगे बढ़ा कर प्रत्यारोपण के लिए लीवर तैयार किए जा सकते हैं।


अमेरिका के नॉर्थ कैरोलिना स्थित वेक फॉरेस्ट इंस्टीट्यूट फॉर रीजेनेरेटिव मेडिसिन में वैज्ञानिकों के एक अंतरराष्ट्रीय दल ने यह सफलता पाई। इन वैज्ञानिकों ने मानव कोशिकाओं को पशुओं के लीवर की खोल में प्रत्यारोपित कर नन्हें मानव लीवर तैयार किए।


प्रयोग में वैज्ञानिकों ने अविकसित मानव लीवर कोशिका को एक 'बायो रिएक्टर' में रखा। करीब एक हफ्ते बाद लीवर सामान्य मानव अंग की तरह विकसित होकर काम करने लगा।


ब्रिटिश अखबार 'द डेली टेलीग्राफ' के अनुसार कृत्रिम रूप से विकसित लीवर को दवाओं के परीक्षण या फिर मरीजों में प्रत्यारोपण के लिए उपयोग किया जा सकेगा।


दल के सदस्य डॉक्टर पेड्रो बैपटिस्टा ने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि एक बार इस अंग को प्रत्यारोपित करने के बाद यह शरीर में ही विकसित होकर काम करने लगेगा।'


इस शोध को बोस्टन स्थित 'अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ लीवर डिजीजेज' की सलाना बैठक में शनिवार को प्रस्तुत किया गया। हालांकि इस लीवर को प्रयोगशाला से अस्पतालों तक पहुंचने में पांच साल से ज्यादा समय लग सकता है।


परियोजना के निदेशक प्रोफेसर शॉय सोकेर ने कहा, 'आने वाले समय में हम ऑर्डर करने पर एक साथ लाखों लीवर तैयार कर सकते हैं, लेकिन उससे पहले हमें सुनिश्चित करना होगा कि यह अंग मरीजों के लिए सुरक्षित साबित हों।'


गौरतलब है कि इस साल के आरंभ में अमेरिकी वैज्ञानिकों ने चूहे का लीवर विकसित करने में सफलता पाई थी। इसे प्रत्यारोपित करने के बाद चूहा कई घंटे तक जिंदा रहा।


भविष्य में मरीज की स्टेम कोशिका से भी लीवर को विकसित किया जा सकेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इस अंग को शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र अस्वीकार नहीं कर पाएगा, जो अब तक बड़ी समस्या थी। यही नहीं हेपेटाइटिस सी से क्षतिग्रस्त लीवर का प्रत्यारोपण आसानी से किया जा सकेगा।

 

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