ल्‍यूकीमिया क्‍या है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 11, 2013
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कैंसर का एक प्रकार जो कि रक्‍त के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है, उसे ल्‍युकीमिया कैंसर कहते है। दूसरे शब्‍दों में, ल्‍यूकीमिया ब्‍लड कैंसर का ही एक प्रकार है, इसके होने के बाद कैंसररोधी सेल्‍स ब्‍लड के बनने में रूकावट पैदा करने लगते हैं।

leukemia kya haiल्‍यूकीमिया का प्रभाव खून के साथ-साथ शरीर के लिम्फेटिक सिस्टम और बोन मैरो पर भी होने लगता है। ल्‍यूकीमिया की वजह से मरीज को खून की कमी हो जाती है। ल्यूकीमिया एक्यूट या क्रोनिक हो सकता है। इसका तात्‍पर्य यह है कि यह या तो अचानक से या फिर धीरे-धीरे क्रोनिक होता है। ल्यूकीमिया ज्‍यादातर बच्चों को ही प्रभावित करता है, पर एक्यूट ल्यूकीमिया युवाओं और बच्चों को प्रभावित करता है।

 

[इसे भी पढ़ें : ल्यूकीमिया के लक्षण]

 

ल्यूकीमिया सामान्यत व्हाइट ब्लड सेल्स जो बोन मैरो में बनते हैं, उनको प्रभावित करता है। यह पूरे शरीर में संचालित होते हैं और वायरस और दूसरे संक्रमण से लड़ने में प्रतिरक्षा प्रणाली की मदद करते हैं। दो मुख्य प्रकार के व्हाइट ब्लड सेल्स हैं लिम्फोसाइट्स और ग्रैन्यूलोसाइट्स। ल्यूकीमिया जो कि लिम्फोसाइट्स से होते हैं उन्हें लिम्फोसाइटिक या लिम्फेटिक ल्यूकीमिया कहते हैं। कुछ दुर्लभ प्रकार के ल्यूकीमिया को मोनोसाइटिक ल्यूकीमिया कहते हैं।

 

[इसे भी पढ़ें : ल्यूकीमिया के प्रकार]



एक्यूट लिम्फोसाइटिक ल्यूकीमिया के होने की सम्भावना बचपन में अधिक रहती है। एक्यूट माइलोसाइटिक ल्यूकीमिया अक्सर बच्चों और युवाओं को प्रभावित करता है। क्रोनिक माइलोजीन्स और क्रोनिक लिम्फोमसाइटिक ल्यूकीमिया मुख्यत: युवाओं को प्रभावित करता है।

कैंसर के लगभग 2 प्रतिशत केस ल्यूकीमिया के होते हैं। यह यू एस में प्रतिवर्ष 10,000 में से 9 लोगों को प्रभावित करता है। महिलाओं की तुलना में पुरूषों में और सफेद लोगों में भी ल्यूकीमिया के होने की सम्भावना अधिक रहती है। बच्चों की तुलना में युवाओं में ल्यूकीमिया की सम्भावना 10 गुना तक अधिक रहती है।

 

[इसे भी पढ़ें : ल्यूकीमिया के जोखिम कारक क्या हैं]



ल्यूकीमिया के होने के कारक हैं जैसे रेडियेशन के सम्पर्क में आना या बेन्ज़ीन और हाइड्रोकार्बन जैसे रासायनों के सम्पर्क में आना। लेकिन अधिकतर स्थितियों में इस बीमारी का कोई खास कारण नहीं होता।

हालांकि, ल्यूकीमिया के इन प्रमुख जोखिम कारकों की वजह से भी कई ऐसे मरीज होते हैं जिनको ल्यूकीमिया नहीं होता है। इसके अलावा कुछ ऐसे मरीजों को भी ल्यूकीमिया हो जाता है जिनके लिए ये सब कारण उत्तरदायी नहीं होते हैं। ऐसे लोग जिनको ल्यूकीमिया होने का शक हो वे इसके उपचार के लिए किसी कुशल चिकित्सक से परामर्श अवश्यक ले लें।

 

 

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