ल्यूकीमिया की चिकित्सा के बाद क्या होता है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 03, 2012
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कुछ लोगों को ल्यूकीमिया के ईलाज से कैंसर से छुटकारा मिल जाता है। यह पूरा इलाज रोगी के लिए बहुत थकान भरा होता है। इलाज के खत्म होने के बाद रोगी काफी आराम महसूस करता है। लेकिन दोबारा कैंसर के सेल्स उसके शरीर पर हमला ना करे इसके लिए उसे बहुत सावधानियां बरतनी होती है। जो लोग कैंसर के शिकार हो चुके होते हैं उनका कैंसर की वापसी नहीं होने के बारे में सचेत रहना जरूरी होता है।

ईलाज के बाद

ईलाज के बाद बहुत जरुरी है कि रोगी समय-समय पर डॉक्टर के पास जांच के लिए जाए और सारी जांच को सही तरीके से कराएं। ईलाज के बाद चिकित्सक रोगी की बहुत ही गहनता से जांच करेगा। इस समय डॉक्टर रोगी से कई सवाल पूछता है कि उसे कोई भी समस्या है या नहीं ऐसे में अपने डॉक्टर को खुल कर उसके बार में बताएं। ज्यादातर कैंसर के ईलाज के साइड ईफेक्ट हो सकते हैं। जो कि कुछ हफ्तों या महीनों में पता लगते हैं।  

विशेष देखभाल


कैंसर रोगी को ईलाज के समय व ईलाज के बाद विशेष देखभाल की जरूरत होती है साथ ही उसे परिवार वालों व आस पास के लोगों के विशेष सहयोग की जरूरत होती है।विशेष देखभाल से रोगी को कैंसर से लड़ने में मदद मिलती है साथ ही कैंसर के लक्षण,पीड़ा व कैंसर रोधी थेरेपी के दुष्प्रभावों को बचने में भी सहायता होती है।


ल्यूकीमिया के ईलाज के बाद रोगी को कई प्रकार की समस्याएं हो सकती है आईए जानें उन समस्याओं के बारे में

संक्रमण


ल्यूकीमिया से ग्रस्त लोगों को संक्रमण बहुत आसानी से हो सकता है इसलिए उन्हें् एंटीबायोटिक्स व अन्य दवाएं दी जाती हैं। कुछ लोगों को फ्लू व निमोनिया से बचने के लिए वैक्सीन दी जाती है। कैंसर के ईलाज के बाद रोगी को भीड़ व जिनको सर्दी या अन्य कोई संक्रामक रोग हो उनसे दूर रहने की सलाह दी जाती है। अगर कैंसर रोगी को किसी तरह का कोई संक्रमण हो गया तो इसके बहुत गंभीर परिणाम हो सकते हैं और इसका ईलाज भी मुश्किल हो सकता है।

एनिमीया व रक्तस्राव


एनिमीया व रक्तस्राव या अन्य समस्या में रोगी को अक्सर विशेष देखभाल की जरूरत होती है। रोगी को लाल रक्त कोशिकाएं व प्लेटलेट्स के ट्रांसफ्यूजन की जरूरत भी हो सकती है। एनिमीया व रक्तस्राव का गंभीर खतरा ट्रांसफ्यूजन के जरिए कम हो सकता है।

दांतो की समस्या


ल्यूकीमिया व कीमोथेरेपी के बाद मुंह बहुत संवेदनशील हो जाता है और रक्तस्राव जैसा कोई संक्रमण आसानी से हो जाता है। ऐसे में डॉक्टर अक्सर सलाह देते हैं कि रोगी को दांतो का परीक्षण पूरा करवाना चाहिए और अगर संभव हो तो कीमोथेरेपी के पहले दांतो का परीक्षण जरूर कराएं। डॉक्टर रोगी को दिखाते हैं कि वे कैसे अपने दांतो व मुंह की सफाई करें।

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