रूट कैनाल उपचार

By  , विशेषज्ञ लेख
Jan 01, 2013

दांत के तीन भाग होते हैं: उसका बाहरी भाग जो इनेमल कहलाता है, डेंटीन (जो दांत का मुख्य भाग होता है ) और दांतों का गूदा जो नर्म होता है।  नस एवं रक्त वाहिकाएं दांतों के जड़ (एपेक्स) के पास से अंदर समाती हैं और फिर जड़ के केनाल से होते हुए पल्प चेम्बर तक पहुँचती हैं। दांतों का जो मुकुट दिखलाई देता है, पल्प चेम्बर उसके भीतर मौजूद  होता है।

 

रूट कैनाल उपचार में, दंत पल्प जो सूज जाता है या  संक्रमित हो जाता है, उसे हटा दिया जाता है। रोगग्रस्त पल्प के उत्तकों को हटाने के बाद वह खाली जगह पहले साफ किया जाता है फिर उसे सही आकार देकर उसे  भरा जाता है। इस उपचार से रूट केनाल सुरक्षित हो जाता है। रूट कैनाल उपचार के पहले इस तरह से रोगग्रस्त हो चुके दांत को निकाल दिया जाता था लेकिन रूट केनाल उपचार से, ऐसे मामलों में,  अब दांत निकालने की नौबत नहीं आती।

 

पल्प का क्षतिग्रस्त होना या पूरी तरह नष्ट होना निम्न कारणों से हो सकता है:

  • दाँत में दरार
  • दाँत में घर छेद (गड्ढा)
  • किसी एक दाँत में चोट या जख्म

अगर गूदा (पल्प)  संक्रमित हो जाता है या मर जाता है, तो बिना इलाज के जबड़े की हड्डी में जड़ में मवाद का संचय हो सकता है जो फोड़ा को जन्म दे सकता है। अगर फोड़े का सही समय पर उचित इलाज नहीं किया गया तो यह दांत के जड़ के आस-पास की हड्डियों को नष्ट कर  सकता है जिससे बहुत पीड़ा भी हो सकती है।

 

रूट कैनाल कैसे किया जाता है?

रूट कैनाल उपचार में निम्न चरण शामिल होते हैं:

  • शुरू में, दांत में एक रास्ता बनाया जाता है --- सामने वाले दांत के पीछे में या अंदर के (पीछे वाले दांतों में जिनसे खाना चबाया जाता है) के ताज के पीछे।
  • पल्पेक्टोमी क्रिया के जरिये दांत के नष्ट हुए गूदे या सूजे हुए गूदे को हटाया जाता है। रोगग्रस्त पल्प के उत्तकों को हटाने के बाद  वह खाली जगह पहले साफ किया जाता है फिर उसे सही आकार देकर  भरा जाता है।
  • यदि इस प्रक्रिया में एक से अधिक बार डेंटिस्ट के पास जाने की जरूरत हो तो डेंटिस्ट दांत के उस भाग को अस्थाई रूप से भर देते हैं जिसे रास्ते के तौर पर खोला गया होता है ताकि अगली बार जब आप डेंटिस्ट के पास जाएँ तब तक दांतों को कोई नुकसान नहीं पहुंचे। जब आप अगली बार डेंटिस्ट के पास जाते हैं तब आपके दांतों में भरे हुए अस्थाई फिलिंग को निकालकर पल्प चेम्बर एवं रूट केनाल को स्थाई तौर पर भर दिया जाता है।
  • इस  उपचार के बाद आमतौर पर दांत के ऊपर मुकुट लगा दिया जाता है। यह दांत को  प्राकृतिक आकार बहाल करने में काफी मदगार साबित होता है। 

 
रूट केनाल उपचार के बाद दांत कितने समय तक टिकेगा?

 

अगर आप अपने दांतों का उचित ख्याल रखेंगे तो रूट कैनाल उपचार के बाद आपका दांत आपका जीवन भर साथ दे सकता है। रूट केनाल उपचार के बाद भी आपके दांत में सडन हो सकती है या छेद हो सकता है। अगर आप अपने दांत की उम्र बढ़ाना चाहते हैं तो आपको उचित देखभाल के साथ मौखिक स्वच्छता बनाए रखनी होगी। अपने दांतों और मसूड़ों को हमेशा स्वस्थ रखने के लिए आप फ्लोराइड युक्त टूथ पेस्ट से रोजाना दो बार अवश्य ब्रश एवं फ्लोस किया करें। साथ  हीं साथ नियमित रूप से अपने दांतों का डेंटिस्ट से चेक अप एवं उसकी सफाई करवाते रहे।

 

एंडोडोनटिस्ट दांतों के वैसे विशेषज्ञ होते हैं जो रूट केनाल चिकित्सा करने में एवं दांतों के पल्प के संक्रमण एवं विकारों के इलाज में माहिर होते हैं।

 

दांत के तीन भाग होते हैं: उसका बाहरी भाग जो इनेमल कहलाता है, डेंटीन (जो दांत का मुख्य भाग होता है ) और दांतों का गूदा जो नर्म होता है।  नस एवं रक्त वाहिकाएं दांतों के जड़ (एपेक्स) के पास से अंदर समाती हैं और फिर जड़ के केनाल से होते हुए पल्प चेम्बर तक पहुँचती हैं। दांतों का जो मुकुट दिखलाई देता है, पल्प चेम्बर उसके भीतर मौजूद  होता है।

 

पल्प दांतों का पोषण करता है, जबकि यह मसूड़ों के जरिये निकल जाता है। लेकिन एक परिपक्व दाँत में से पल्प एवं रूट केनाल्स को निकाला जा सकता है। अगर एक परिपक्व दाँत के पल्प चेम्बर में से पल्प एवं रूट केनाल्स को निकाला जाता है तो इससे दांत को कोई नुकसान नहीं पहुँचता है।  दांत के पल्प चेम्बर से पल्प एवं रूट केनाल्स निकालने की प्रक्रिया को रूट कैनाल उपचार या रूट कैनाल थेरापी कहा जाता है।

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