रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर का निदान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 13, 2013

रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर होने के बाद लक्षणों के आधार पर इसकी जांच कराई जाती है। लेकिन इस भागदौड़ भरी जिंदगी में बैक पेन होना सामान्‍य है। लेकिन अगर पीठ दर्द इलाज के बाद भी ठीक नही हो रहा तो स्‍पानल ट्यूमर हो सकता है। इसका पता लगाने के लिए इसका निदान करान जरूरी है।  

इसके निदान के लिए मरीज की मेडिकल हिस्‍ट्री देखी जाती है। शारीरिक तथा तंत्रिका-तंत्र से संबंधित टेस्‍ट भी किये जाते हैं।  इसके अलावा, प्रयोगशाला में जांच और इमेजिंग तकनीक से मरीज़ का परीक्षण किया जाता है। आइए हम आपको बताते हैं कि कैसे स्‍पाइनल ट्यूमर का निदान होता है।

 

 

स्‍पाइनल ट्यूमर का निदान -

लेबोरेटरी में टेस्‍ट -

कम्पलीट ब्लड काउंट (सीबीसी) - रक्त के नमूने के जरिए लाल कोशिकाओं, सफेद कोशिकाओं और प्लेटलेट्स की संख्या की जांच की जाती है। हीमोग्लोबिन (ऑक्सीजन वाहक प्रोटीन) और हेमाटोक्रिट (लाल कोशिकाओं का प्रतिशत) का भी आकलन किया जाता है।

कॉम्प्रिहेंसिव मेटाबॉलिक पैनल -
यह मरीज़ के गुर्दे और दिल के कामकाज, इलेक्ट्रोलाइट और एसिड/बेस संतुलन तथा रक्त में शुगर के स्तर के बारे में जानकारी देता है।

एरिथोसाइट सेडिमेंटेशन रेट - इस टेक्‍नोलॉजी के जरिए शरीर में सूजन के स्‍तर की जांच की जाती है। तकनीक सूजन का स्तर नापने के लिए प्रयोग में लाई जाती है।

सीरम प्रोटीन इलेक्ट्रोफ़ोरेसिस - खून के नमूने में प्रोटीन के विभिन्न भागों की गिनती करता है।

बेन्स जोन्स प्रोटीन के साथ यूरिनैलिसिस - बेन्स जोन्स प्रोटीन, मूत्र में पाये जाने वाले छोटे प्रोटीन हैं। इन प्रोटीन्स के लिए किये जाने वाले टेस्‍ट से मल्टिपल मायलोमा या प्लाज़्मासाइटोमा का पता लगाने में मदद मिलती है।


इमेजिंग टेक्निक के जरिए -

एक्स-रे - रीढ़ की हड्डी की बनावट के, विभिन्न कोणों जैसे कि एंटीरो-पोस्टीरियर, लेटरल और ऑब्लीक कोणों से का एक्‍सरे जरिए इमेज निकाला जाता है। यह कई बीमारियों जैसे - कि फ्रैक्चर और ट्यूमर हड्डी को कैसे प्रभावित कर रहा है आदि के बारे में पता चलता है।

टेक्नीशियम (टी99) बोन स्कैन - टेक्नीशियम विकिरण का स्त्रोत है जिसका प्रयोग बोन का स्‍कैन करके फ्रैक्चर, संक्रमण या कैंसर का पता लगाने के लिए किया जाता है।

मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) - एमआरआई बेहद संवेदनशील इमेजिंग पद्धति है जो हड्डियों और कोमल ऊतकों के थ्री-डी इमेज निकालती है, इसके जरिए स्‍पाइनल कार्ट की स्थिति का सही पता चल जाता है।

सीटी स्कैन -
मायलोग्राफ़ी में रेडियोग्राफ़्ट कंट्रास्ट माध्यम (डाई) को कशेरुका दण्ड के नाल (स्पाइनल कैनाल) के द्रव में इंजेक्ट किया जाता है ताकि स्पाइनल कैनाल, रीढ़ की हड्डी और नर्व की सही स्थिति का पता चल सके। सीटी स्‍कैन और इन चित्रों से पता चलता है कि रीढ़ की हड्डियां तंत्रिकाओं पर कहां-कहां दबाव डाल रही हैं।


स्पाइनल ट्यूमर बायोप्सी

इमेजिंग जांच पूरी हो जाने के बाद, ट्यूमर के प्रकार का पता लगाने का सबसे अच्छा तरीका बायोप्सी है। बायोप्सी के जरिए ट्यूमर के ऊतकों और कोशिकाओं की माइक्रोस्कोप जांच की जाती है। बायोप्‍सी के जरिए यह निश्चित हो जाता है कि कैंसर है या नही।


अगर स्‍पाइल ट्यूमर का निदान समय पर हो जाए तो इसका उपचार हो सकता है और आदमी की जान बच सकती है।

 

 

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