याद हो कि न याद हो

By  ,  दैनिक जागरण
Nov 22, 2011

जिंदगी की बढ़ती रफ्तार में जो समस्याएं पैदा हुई हैं, उनमें भूलना भी शामिल है। भूलना कभी बुढ़ापे का लक्षण माना जाता था। लेकिन मनोचिकित्सकों के अनुसार, आज के नौजवानों में यह बड़ी समस्या है। छात्र परेशान रहते हैं कि पाठ याद नहीं रहता। नौकरीपेशा पति-पत्नी एक-दूसरे की भूलने की आदत से हैरान होते हैं। भूलने की समस्या जीवनशैली से जुड़ी है।


क्यों नहीं रहता याद : यदि परिवार में बीमारी के रूप में इसका इतिहास नहीं है, तो इसका सीधा संबंध जीवन शैली से है। तनाव, अवसाद, दुख, भय और पर्याप्त नींद न लेने का असर हमारी याद रखने की क्षमता पर पड़ता है।


क्या करें : जीवन शैली में सुधार लाएं। तनाव से बचें। एक ही काम को घंटों न करें। काम को टुकड़ों में बांट लें। थोड़ी-थोड़ी देर में कोई अलग काम हाथ में लें। ऐसे काम करें, जिन्हें करने को मन प्रेरित हो। यदि समस्या तब भी न सुलझे, तो मनोचिकित्सक से मिलने में संकोच न करें।


यह भी आजमाएं : नियमित कसरत करें। इससे तनाव कम होता है और याददाश्त बढ़ती है।


यदि नशे की किसी लत के शिकार हों, तो उसे तुरंत त्याग दें।


ऐसा भोजन, जिसमें ओमेगा 3 (मछली, अंडे, दूध और पनीर) तथा ओमेरा 6 (हरी सब्जी, सलाद, अंकुरित दालें, नट्स, चाकलेट) फैटी एसिड्स हों।

 

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