मैक्रोबॉयटिक डाइट में केवल आहार नहीं सम्‍पूर्ण जीवनशैली का रखा जाता है खयाल

By  , विशेषज्ञ लेख
Jan 01, 2013
Quick Bites

  • साबुत अनाजों के सेवन पर दिया जाता है अधिक जोर।
  • अंडे, डेयरी उत्‍पादों आदि से दूर रहने की दी जाती है सलाह।
  • जीवनशैली की गति को भी धीमा करने को कहा जाता है।
  • बौद्ध धर्म की छाप नजर आती है इस आहार योजना पर।

सेहत का रास्‍ता आपके पेट से होकर जाता है। इसलिए जरूरी है कि आप अपने आहार को सही और संतुलित रखें। मेक्रोबॉयोटिक आहार योजना एक ऐसी ही योजना है जो आपको स्‍वस्‍थ जीवन जीने की ओर प्रेरित करती है। वास्‍तव में यह केवल डायट प्‍लान नहीं है, बल्कि एक सम्‍पूर्ण जीवनशैली है। 

 

macrobiotic dietमेक्रोबॉयोटिक डायट में साबुत अनाज, अनाज और सब्जियों जैसे खाद्य पदार्थों को शामिल किया जाता है। यह आहार योजना आपको प्रसंस्‍कृत खाद्य पदार्थों से दूर रहने की हिदायत देती है। यह तो हम जानते ही हैं कि साबुत अनाज हमारी सेहत के लिए कितने फायदेमंद होते हैं।

मेक्रोबॉयोटिक डायट

मेक्रोबॉयोटिक डायट न केवल आपके खानपान, बल्कि आपके जीने के अंदाज में भी सकारात्‍मक परिवर्तन लाने की बात करता है। यह आहार योजना आपको साबुत अनाज का सेवन करे, ध्‍यान करने और अपनी संयमित जीवनशैली जीने पर चलने की सलाह देती है।



मेक्रोबॉयोटिक डायट में बौद्ध धर्म के कई सिद्धांतों का पालन किया जाता है। इसमें साधारण आहार योजना अपनाने की सलाह दी जाती है। इसमें डेयरी उत्‍पादों, मीट, वसायुक्‍त भोजन आदि से दूर रहने को कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इन खाद्य पदार्थों में शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले तत्‍व होते हैं। जब आप इस आहार योजना को अपनाते हैं, तो इसका अर्थ यह है कि आपकी जरूरत की लगभग आधी कैलोरी साबुत अनाज से आएगी। और बाकी आधी के लिए आप फल, सब्जियों और सूप पर निर्भर रहेंगे।

 

आप कभी-कभार सफेद मछली, नट्स, बीज,  अचार, भारतीय मसाले और कुछ प्रकार की चाय का सेवन कर सकते हैं। हालांकि, आलू, टमाटर, शतावरी, अवाकाडो आदि चीजों से आपको दूर रहने को कहा जाता है। मेक्रोबॉयोटिक आहार योजना में भोजन को पवित्र माना जाता है। ऐसे में आपके लिए जरूरी होता है कि आप भोजन शांत वातावरण में ही पकाएं। इसके साथ ही आपके खाना पकाने वाले बर्तन भी लकड़ी, कोंच और स्‍टेनलेस स्‍टील के ही बने होते हैं। यह आहार योजना खाना पकाने के लिए माइक्रावेव या अन्‍य बिजली उपकरणों का इस्‍तेमाल करने की इजाजत नहीं देती।



हालांकि, यह आहार योजना वजन कम करने के लिए जादुई उपाय नहीं है। किसी भी अन्‍य आहार योजना की ही तरह इसके भी कुछ लाभ और नुकसान हैं। अगर आप सही प्रकार से इस आहार योजना का पालन करें, तो यह आपको काफी लाभ पहुंचा सकती है, वहीं अगर इसे सही तरीके से ना आजमाया जाए, तो यह आपकी सेहत के लिए नुकसानदेह भी साबित हो सकती है।

 

मेक्रोबॉयोटिक डायट : फायदे

मेक्रोबॉयोटिक डायट में आपको साबुत अनाज, फल, सब्जियों आदि को अपना आहार बनाने की सलाह दी जाती है। ये सब खाद्य पदार्थ काफी सेहतमंद होते हैं। यह बात तो आप जानते ही हैं कि इन खा़द्य पदार्थों को अपने आहार में शामिल कर आप अपनी सेहत को फायदा पहुंचाते हैं। कार्डियोवस्‍कुलर डिजीज और कुछ प्रकार के कैंसर आदि से बचाने में भी इस प्रकार का कम वसा और अधिक फाइबर युक्‍त भोजन काफी मददगार होता है।


मेक्रोबॉयोटिक आहार के नुकसान

अगा इस आहार योजना को सही प्रकार से नहीं अपनाया जाए तो, कुछ लोगों को प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम, विटामिन बी12और विटामिन डी की कमी हो सकती है।

इस आहार योजना का सबसे बड़ा नुकसान यह होता है कि स्‍वास्‍थ्‍यवर्द्धक आहारों को सीमित कर देती है। आप अवाकाडो, डेयरी उत्‍पाद और अंडे आदि का सेवन नहीं कर सकते। संभव है कि बहुत सख्‍त आहार योजना आपसे खाने का असली मजा छीन सकता है।

मेक्रोबॉयोटिक आहार में किसी प्रकार के सप्‍लीमेंट का सेवन मना है। इससे आपके पोषण की सभी जरूरतों जैसे विटामिन और मिनरल आदि को पूरा करने में थोड़ी मुश्किल आ सकती है।

मेक्रोबॉयोटिक आहार योजना केवल आहार तक ही सीमित नहीं है। यह एक सम्‍पूर्ण जीवनपद्धति है। इसमें साबुत अनाज को शामिल किया जाता है। लेकिन, यह कई अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍यवर्धक आहारों को सीमित भी कर देता है। आप अवाकाडो, डेयरी उत्‍पादों और अंडे जैसे कई खाद्य पदार्थों का सेवन इस आहार योजना के अंतर्गत नहीं कर सकते। तो, इसलिए आपको इस आहार योजना में खाद्य पदार्थों का चयन करते समय अतिरिक्‍त सावधानी बरतनी चाहिए। आप चाहें तो इसके लिए किसी आहार-विशेषज्ञ की भी सहायता ले सकते हैं।

 

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