मानसिक अस्‍वस्‍थता

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 01, 2013
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मानसिक बीमारी के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है और खोज की गयी है। हमें अच्छी तरह पता है कि मानसिक बीमारी में क्या होता है लेकिन मानसिक स्वास्थ्य क्या है इस पर हमारी जानकारी कम है। परंपरागत रूप से, क्लीनिकल सायकोलाजिस्ट और मनोचिकित्सक मानसिक स्वास्थ्य को सरल रुप से मानसिक बीमारी के अभाव के रूप में परिभाषित करते हैं। इस परिभाषा के अनुसार कोई भी व्यक्ति जिसमें क्लीनिकल सायकोलाजिकल लक्षण जैसे फोबीया, ओबसेशन, चिंता, अवसाद, उन्माद आदि नहीं दिखाई देते उन्हें मानसिक रूप से स्वस्थ समझा जाएगा।

 

समकालीन मनोविज्ञान ने मानसिक स्वास्थ्य की उपरोक्त परिभाषा को त्याग दिया है। अब यह माना जाता है कि मानसिक रुप से स्वस्थ होने पर एक व्यक्ति जीवन के सभी क्षेत्रों- व्यक्तिगत, संबंधपरक, व्यावसायिक, शारीरिक और सामाजिक- में अच्छे से कार्य करेगा। इसलिए मानसिक स्वास्थ्य जीवित रहने और जीवन की कठिनाइयों को झेलना ही नहीं है बल्कि एक व्यक्ति का फलना-फूलना, अपनी क्षमताओं का पूरा आभास और शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक तंदुरुस्ती है।

एक मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति वह है जो स्वायत्त है, अपने बारे में अच्छा महसूस करता है, अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य का एक यथार्थवादी मूल्यांकन करता है, उसमें चंचल और रचनात्मक होने की क्षमता है, प्यार और अन्य लोगों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण और समझदार रवैया है, अपनी भावनाओं पर नियंत्रण है, और अपने आप को संकट के समय में शांत कर सकता है और पर्याप्त प्रफुल्लता है और तनावपूर्ण स्थितियों में से निकलने की क्षमता है। 

 

इस संदर्भ में, एक मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर की भूमिका को एक नया अर्थ मिला है। मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सकों को मनोवैज्ञानिक रुप से असामान्य व्यवहार और लक्षणों के उपचार करने के अलावा व्यक्ति के  मानसिक स्वास्थ्य को अच्छा रखने में भी मदद करनी चाहिए। समकालीन मनोचिकित्सा और परामर्श भी एक व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ाने में मदद करते हैं।

 

 

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