ब्लीचिंग

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 02, 2013
Comment

Subscribe for daily wellness inspiration

Like onlymyhealth on Facebook!

ब्लीचिंग वह ब्यूटी ट्रीटमेंट है जो हेयर कलर को हल्का कर देता है, जिससे उनका दिखना कम हो जाता है। ब्लीचिंग को बॉडी हेयर और फेशियल दोनों के साथ किया जा सकता है। लेकिन सिर के बालों के साथ नहीं क्योंकि दोनों मामलों में सामर्थ्य और संघटक भिन्न होते हैं।

 

ब्लीचिंग का असर दो से तीन हफ्तों तक रहता है इसके बाद  हेयर का कलर अपने असली शेड में वापस लौटने लगता है । यह वैक्सिंग की तरह रिमूवल तकनीक न होकर छुपाने की तकनीक है। ब्लीचिंग किट्स बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं जिसे हम घर पर भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

 

अपनी त्वचा की सूटेबिलिटी जानने के लिये प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना ज़रूरी होता है। अपनी बांह पर एक छोटा पैच टेस्ट करें और अपने चेहरे या और किसी हिस्से पर इसे ट्राई करने से पहले 24 घंटे तक इंतजार करें। फेशियल त्वचा शरीर के अन्य हिस्सों की त्वचा के मुकाबले काफी नाजुक होती है जिसकी देखभाल सावधानी से करनी चाहिये।

 

ब्लीचिंग आपके बालों के पिगमेंट्स को कलर करके इसे हल्के ब्लौंड रंग का बनाते हुए त्वचा टोन को मिमिक करती है लेकिन इसे विशेष त्वचा टोन पर और धूप में निकलने पर देखा जा सकता है। लगाने के बाद इंतजार करने के समय के बारे में ब्लीचिंग किट के लेबल पर दिये इंस्ट्रक्शन्स को पढें, मनचाहा असर देखने के लिये आमतौर पर लगाने के बाद दस मिनट इंतजार करना होता है।

 

ब्लीचिंग क्रीम को धो डालें और हल्के से सुखायें। यह दर्द रहित, जल्दी निबटने वाली आसान प्रक्रिया है लेकिन इससे आपको वैसी हेयरलेस त्वचा नहीं मिलती जैसी वैक्सिंग से मिलती है। डार्क त्वचा टोन पर ब्लीच्ड हेयर अलग साबित होते हैं जिससे यह चुनिंदा लोगों के लिये ही कारगर मानी जा सकती है। इसका असर ज़्यादा दिनों तक नहीं रहता और फिर से करना ज़रूरी हो जाता है।

 

समस्याएं

 

ब्लीचिंग सभी प्रकार की त्वचा पर सूट नहीं करती क्योंकि किसी को ब्लीचिंग संघटक के प्रति एलर्जिक होना आम तौर पर पाया जाता है। बड़े हिस्से पर इसे लगाने से पहले पैच टेस्ट करें। शरीर के सभी हिस्सों में ब्लीचिंग की राय नहीं दी जाती है संवेदनशील हिस्से जैसे कि आंखों, मुंह, नाक और जेनाइटल हिस्सों के नजदीक ब्लीचिंग नहीं की जाती।

 

इन्फ्लेम्ड, एक्सफॉलियेटेड या टैन्ड त्वचा पर ब्लीचिंग नहीं की जानी चाहिये। वार्ट्स और मोल्स की ब्लीचिंग करने से बचें। ब्लीचिंग के बाद धूप में बाहर निकलने से बचें। ब्लीच को मिक्स करते समय मेटल कन्टेनर्स इस्तेमाल न करें और कैमिकल रिएक्शन से बचने के लिये ग्लॉस या सिरॉमिक का इस्तेमाल करें।

 

 

Loading...
Write Comment Read ReviewDisclaimer
Is it Helpful Article?YES12 Votes 15051 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर