बुढ़ापे में नजर दुरुस्त चाहते हैं तो मछली खाइए

By  ,  दैनिक जागरण
Sep 12, 2013
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Quick Bites

  • हफ्ते में एक दिन तैलीय मछली खाना बुढ़ापे में आंखों की सुरक्षा के लिहाज से फायदेमंद है।
  • मछली के सेवन से एज-रिलेटेड मस्कुलर डिजेनेरेशन-एएमडी को कम किया जा सकता है।
  • मछली का सेवन नहीं करने वालों की अपेक्षा वेट एएमडी 50 फीसदी से कम पाया गया।

benefits of fishउम्रदराज होने पर आंखों की रोशनी कम होना सामान्य परेशानी है। एक शोध के मुताबिक हफ्ते में एक दिन तैलीय मछली खाना बुढ़ापे में आंखों की सुरक्षा के लिहाज से फायदेमंद हो सकता है।

 

यूरोपीय शोधकर्ताओं के मुताबिक हफ्ते में एक बार तैलीय यानी वसा वाली मछली खाने से खास उम्र में होने वाले पेशियों की ताकत में ह्रास (एज-रिलेटेड मस्कुलर डिजेनेरेशन-एएमडी) को कम किया जा सकता है। गौरतलब है कि एएमडी अंधेपन और दृष्टिदोष का एक प्रमुख कारण माना जाता है।

 

एएमडी के दो प्रकार होते हैं-ड्राई (सूखा) और वेट (गीला)। वेट एएमडी अंधेपन का प्रमुख कारण होता है। यह पहला शोध है जिसमें तैलीय मछली के सेवन को एएमडी की रोकथाम में कारगर बताया गया है।

 

प्रमुख शोधकर्ता एस्टि्रड फ्लेचर के मुताबिक हफ्ते में एक बार साल्मोन, टूना या मैकेरल मछली खाने से प्रतिदिन 500 मिलीग्राम डोकोसाहेक्साइनोइक एसिड (डीएचए) और ईकोसापेंटाइनोइक एसिड (ईपीए) का निर्माण होता है।

 

शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में मछली के सेवन तथा ओमेगा 3 वसीय अम्लों के वेट एएमडी से संबंध की जांच की। शोध के मुताबिक हफ्ते में एक बार तैलीय मछली का सेवन करने वालों में मछली का सेवन नहीं करने वालों की अपेक्षा वेट एएमडी 50 फीसदी से कम पाया गया।

 

डीएचए और ईपीए से भी एएमडी का पर्याप्त संबंध देखा गया। डीएचए और ईपीए की 25 फीसदी (प्रतिदिन 300 मिलीग्राम या उससे ज्यादा) की मौजूदगी की स्थिति में 70 फीसदी वेट एएमडी कम पाया गया।

 

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