बच्‍चों के स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी आपातकालीन स्थिति

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 25, 2013

bacche ke swasthya me apatkalin sthiti

अध्ययनों के अनुसार, अनैच्छिक चोटें बच्चों की मृत्यु की एक महत्वपूर्ण संख्या के लिए जिम्मेदार हैं।

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किसी भी घर में बच्‍चे का जन्‍म एक बहुत बड़ी खुशी होता है और हर किसी की चाहत होती है कि वह बच्‍चा स्‍वस्‍थ और सुरक्षित रहे। लेकिन, अक्‍सर जानकारी के अभाव में बच्‍चों की सेहत के प्रति पूरा ध्‍यान दे पाना संभव नहीं होता। यह हर माता-पिता की जिम्‍मेदारी है कि वे अपने बच्‍चे को स्‍वस्‍थ जीवन देने के लिए हर संभव प्रयास करें।

कहते है कि अगर छोटी उम्र में कोई रोग लग जाए तो वो ताउम्र साथ रहता है, ऐसे में अभिभावकों का दायित्‍व और भी बढ़ जाता है। तो, अपने बच्‍चे की सेहतमंद जिंदगी के लिए बीमारियों से उसकी रक्षा की जानी बहुत जरूरी है। बच्‍चे को निरोग रखने के लिए यह महत्‍वपूर्ण है कि आप खुद को तैयार रखें। आमतौर पर बच्‍चों को जुकाम और बुखार जैसी बीमारियां परेशान करती रहती हैं। मौसम भी ऐसा चल रहा है और इन दिनों यह बहुत जरूरी हो जाता है कि आप अपने बच्‍चे को इससे बचाकर रखें।

 

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बच्‍चों को बीमारियों से बचाने के लिए उनका नियमित टीकाकरण भी अनिवार्य है। टीकाकरण से बच्‍चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और वे कई घातक बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं। सरकारी अस्‍पतालों और चिकित्‍सा केंद्रों में बच्‍चों को ये टीके निशुल्‍क लगाए जाते हैं।

साथ ही अपने बच्‍चों के साथ होने वाली किसी अनहोनी घटना के लिए भी खुद को तैयार रखें। आपातकालीन स्थिति बच्‍चे के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है। तो, किसी भी ऐसी स्थिति से निपटने का सबसे सुरक्षित उपाय है, खुद को इसके लिए तैयार करना और उससे बचे रहने का प्रयास करना।

कई अध्‍ययन बताते हैं कि अचानक लगने वाली चोटों से बड़ी संख्‍या में बच्‍चे अपनी जान गंवाते हैं। यह जरूरी है कि आप उसके लिए तैयार रहें। एक अभिभावक अथवा उसके देखभाल करने वाले रूप में आपके द्वारा दी जानी वाली प्राथमिक चिकित्‍सा बड़ा अंतर पैदा कर सकती है। हर माता पिता को सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिसुसीटेशन) के बारे में सही जानकारी होनी चाहिए।

 

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आइए जानें कि बच्‍चे के साथ किसी चिकित्‍सीय अनहोनी घटना होने पर आपको सबसे पहले क्‍या करना चाहिए-


अगर समस्‍या का समाधान घर पर हो सके

कई छोटी चोटें और बीमारियां, जैसे थोड़ा सा कट जाना, रैश, खांसी, ठण्‍ड लगना और आम घावों को घर पर ही ठीक किया जा सकता है।

अपने डॉक्‍टर को बुलाएं

अगर आप स्‍पष्‍ट रूप से अपने बच्‍चे की सेहत की गंभीरता से परिचित नहीं हैं, तो आपको डॉक्‍टर को फोन करने में देरी नहीं करनी चाहिए। चाहें तो उनसे फोन पर ही राय लें। डॉक्‍टर आपको बच्‍चे की सेहत के बारे में सही राय देगा।

इमरजेंसी में जाएं


अगर किसी वजह से डॉक्‍टर से बात न हो पाए तो नजदीकी अस्‍पताल या नर्सिंग होम में जाएं। यहां सभी जरूरी चिकित्‍सीय मदद उपलब्‍ध होती है। यहां आपके बच्‍चे का सही उपचार किया जा सकेगा। अगर जरूरी हो तो एक्‍स-रे और अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य मदद भी यहां उपलब्‍ध होती है।

 

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