बच्चों में न्यूमोनिया का बढ़ता खतरा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 27, 2012

Baccho me pneumonia ka badhta khatra

बच्चों में न्यूमोनिया कितना घातक है, यह हाल ही में हुए शोध में सामने आया है। विश्व में हर 20 सेकेंड में एक बच्चे की मौत न्यूमोनिया से होती है। यह तथ्य काफी चौकाने वाला है हमारे लिए। भारत में न्यूमोनिया से मरने वाले बच्चों की संख्या विश्व में सबसे ज्यादा है। न्यूमोनिया से हर साल देश में पांच साल की आयुसीमा से कम के 3,70,000 से अधिक बच्चों की मौत होती है। विश्व भर में बचपन में न्यूमोनिया होने के सालाना मामले 15.5 करोड़ के करीब हैं।

जॉन होपकिंस विश्वविद्यालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में हर साल 60 लाख से अधिक बच्चे न्यूमोनिया का शिकार होते हैं। उन्हें न्यूमोनिया से स्वास्थ्य संबंधी कई तरह की परेशानियां हो जाती हैं, जिससे उबरने में उन्हें काफी समय लग जाता है। डॉक्टरों के मुताबिक विश्व स्तर पर न्यूमोनिया से हर 20 सेकेंड में एक बच्चे की मौत होती है। इसका अर्थ यह है कि 14 लाख बच्चों की मौत इस बीमारी के कारण होती है। आईए जानें क्या है न्यूमोनिया

 

क्या है न्यूमोनिया

 

न्यूमोनिया, फेफड़ों में एक प्रकार का संक्रमण है जिसमें रोगी को सांस लेने में परेशानी होती है। इससे फेफड़ों में दर्द व सूजन आ जाती है।  न्यूमोनिया के दो प्रकार है - पहला 'कम्यूनिटी एक्वायर्ड न्यूमोनिया' ऐसा प्रकार है, जो घर में रहने पर भी रोगी को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। वहीं'एक्वायर्ड न्यूमोनिया' अस्पताल में भर्ती लोगों को ज्यादा होता है।

 

कारण

 

आमतौर पर नाक और गले में पाए जाने वाले वायरस और बैक्टीरिया सांस लेने पर फेफड़ों को संक्रमित कर सकते हैं।न्यूमोनिया बैक्टीरिया, वाइरस और फंगस के सक्रंमण से होता है। बच्चों में न्यूमोनिया का मुख्य कारण वाइरस का सक्रंमण है।हवा में मौजूद किसी की खांसी या छींक के कण के कारण भी बच्चों  में न्यूमोनिया के होने की संभावना होती है।

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