बच्चों में तपेदिक कैसे होता है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 19, 2012

Baccho me tapedik kaise hota hai

तपेदिक (टीबी, क्षय रोग, ट्यूबरकुलोसिस) एक संक्रामक बीमारी है। टीबी का अटैक सबसे ज्यादा फेफडों पर रहता है। इस बीमारी से हर रोज हजारों लोगों की मौत हो जाती है। बच्चों में माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस टीबी मरीज के संपर्क में आने से फैलता है। बच्चों के अंग बहुत ही नाजुक होते हैं इसलिए किसी भी बीमारी का उनपर सबसे ज्यादा असर होता है। तपेदिक सांस संबंधित बीमारी है, और अगर यह बीमारी बच्चे को हो जाए तो उसकी मौत हो सकती है। बच्चों को धुंए में सांस लेने से (अप्रत्यक्ष रूप से धूम्रपान) तपेदिक होने का खतरा 2-3 गुना बढ जाता है। जन्‍म के बाद बच्‍चे को अगर स्‍तनपान न कराया जाए तो बच्‍चे की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है जिसके कारण संक्रमण होने का खतरा बढ जाता है। 

 

बच्चों में तपेदिक के प्रकार –बच्चों में तपेदिक कई प्रकार से हो सकता है। प्रायमरी कॉम्प्लेक्स, बाल टीबी, प्रोग्रेसिव प्राइमरी टीबी, मिलियरी टीबी (गंभीर किस्म), दिमाग की टीबी, हड्डी की टीबी अथवा टीबी की गठानें।

 

बच्चों में तपेदिक के लक्षण –इसमें बच्चे को बार-बार बुखार आना, लंबे समय तक खांसी होना, बच्चे का वजन न बढना, वजन कम होना,  हमेशा सुस्त रहना, गर्दन में गांठे जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। प्रोग्रेसिव प्राइमरी टीबी में बच्चा ज्यादा बीमार रहता है। इस स्थिति में बच्चे को तेज बुखार आना, भूख न लगना, खांसी में कफ आना और छाती में निमोनिया के लक्षण  शुरू हो जाते हैं। तपेदिक से ग्रसित बच्चे में प्राय: कुपोषण व एनीमिया हो जाता है। बड़े बच्चों में कभी-कभी कफ में खून भी आता है।

 

बच्चों  में तपेदिक फैलने के कारण -

  • माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक कीटाणु से ग्रस्त व्यक्ति जब खांसता या छींकता है तो यह कीटाणु वातावरण में फैलता है। जब बच्चा इनके संपर्क में आता है तो उसके संक्रमित होने की संभावना भी बढ़ जाती  है।
  • शिशु के जन्म के बाद मां का पहला दूध यानि कोलेस्‍ट्रम न पिलाने से तपेदिक (एचआईवी, डायबिटीज और अन्य बीमारियां) होने की संभावना बढ जाती है।
  • बच्चों का परोक्ष रूप से धूम्रपान (धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के संपर्क में आना) से भी तपेदिक होने का खतरा 2 से 3 प्रतिशत बढ जाता है।
  • घर में भीड-भाड़, साफ-सफाई न रखने से भी तपेदिक होने का खतरा होता है।
  • चूल्हे के धुएं के संपर्क में आने से भी बच्चों को तपेदिक हो सकता है। गांवों में अक्सर चूल्हे पर खाना बनाते वक्त मां अपने छोटे बच्चे को गोद में ही लिए रहती है। जो कि बच्चे के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
  • नवजात बच्चे को हवा में घुमाने से भी संक्रमण हो सकता है। अगर घर में या आसपास कोई टीबी का मरीज है तो उसके आसपास के वातावरण में फैले कीटाणुओं का हमला बच्चों पर हो सकता है।
  • बच्चे को खिलाते वक्त अगर खांसी आए तो मुंह पर कपडा रखकर ही खांसे, इससे संक्रमण नहीं फैलेगा।

 

 

जिस घर में छोटा बच्चा हो वहां पर तंबाकू और धूम्रपान का सेवन करने से बचें। अगर घर में कोई टीबी का मरीज है तो उसे बच्चे के संपर्क में बिलकुल ही न आने दें।

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