फेफड़े का कैंसर का निदान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 18, 2013

लंग कैंसर के उपचार के लिए इसका निदान होना जरूरी है। इसलिए इसके लक्षणों का जितनी जल्‍दी पता चलेगा उतनी जल्‍दी इसका निदान हो सकता है। इसके लिए डॉक्टर आपसे धूम्रपान के बारे में पूछेगा, यदि आप सिगरेट के आदी हैं तो निदान में आसानी होगी, क्‍योंकि धूम्रपान का सीधा असर फेफड़ों पर पड़ता है।

कैंसर की पुष्टि के लिए डॉक्टर फेफड़े और छाती पर विशेष ध्यान देते हुए आपका परीक्षण करेंगे। उसके बाद उभारों को स्पष्ट‍ रूप से देखने के लिए आपके डॉक्टर आपसे रेडियोलॉजिकल स्टडीज़ जैसे छाती का एक्सरे और सीटी स्कैन कराने को कहेंगे। यदि कैंसर का पता चल जाता है तो लंग कैंसर के विशेष प्रकार और प्रसार के क्षेत्र की जांच हेतु परीक्षण किए जायंगे। इन परीक्षणों में शामिल हैं -

 

[इसे भी पढ़ें : ऐसे उपाय जो कैंसर से बचाये]

 

लंग कैंसर का निदान के लिए टेस्‍ट -

साइटोलॉजी टेस्‍ट -
इस परीक्षण में प्रयोगशाला में कैंसर सेल्स की जांच के लिए खांसी के साथ आये कफ की जांच की जाती है। यह साइटोलॉजी परीक्षण कहलाता है।


बॉयोप्‍सी -
इस परीक्षण में असमान्य लंग ऊतक के नमूने को शरीर से निकालकर प्रयोगशाला में लाया जाता है जहां कैंसर के लक्षणों हेतु सूक्ष्‍मदर्शी की मदद से इसकी जांच की जाती है। यदि नमूने में कैंसरयुक्त सेल्स मिलते हैं तो सूक्ष्मदर्शी की मदद से लंग कैंसर के प्रकार का निर्धारण किया जा सकता है। हालांकि यह जांच ब्रांकोस्‍कोपी का इस्तेमाल करते हुए भी की जा सकती है। फिर भी कभी-कभी संदिग्ध फेफड़े के हिस्सें की पहचान के लिए सर्जरी करना ज़रूरी है।


ब्रान्‍कोस्‍कोपी -

इस प्रक्रिया में ट्यूब के आकार वाले एक उपकरण को वायु वाले रास्ते (मुंह, नाक) से फेफड़े तक पहुंचाया जाता है। इसका उद्देश्य सीधे फेफडे़ के अन्दर कैंसरयुक्त हिस्से की जांच करना और बॉयोप्सी का नमूना प्राप्त‍ करना होता है।

[इसे भी पढ़ें : कैंसर में आहार]

 

मीडियास्टीटनोस्को‍पी -
इस प्रक्रिया में लसीका गांठों या फेफड़े के मध्यस (मीडियास्टीफन) दिखने वाले उभारों की बॉयोप्सी हेतु टयूब के आकार वाले एक उपकरण का उपयोग किया जाता है। इस तरह की जाने वाली बॉयोप्सी का उपयोग लंग कैंसर के प्रकार की पहचान करने और लसीका गांठों में फैले (मेटास्टेसाइज़्ड) कैंसर की जांच करने के लिए किया जाता है।


फाइनल निडल स्‍पाइरेशन -
इस प्रक्रिया में फेफड़े के संदिग्ध हिस्से में एक पतली सुई चुभोई जाती है और सीटी स्कैन द्वारा जांच की जाती है। प्रयोगशाला परीक्षण के लिए ऊतक के छोटे से नमूने को सुई की मदद से बाहर निकाल लिया जाता है।


थोरासेंटेसिस -
छाती में तरल के जमा होने से उत्पन्न कैंसर की जांच के लिए इस प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। प्रयोगशाला में जांच हेतु असमान्य तरल के नमूने को बाहर निकालने के लिए सुई का उपयोग किया जाता है।



वीडियो -
एसिस्टेड थोरेकोस्कोपिक सर्जरी (वी.ए.टी.एस.) कहा जाता है। यह फेफड़े के किनारों पर स्थित अनियमित लंग ऊतक की सर्जरी द्वारा बॉयोप्सी करने की नई तकनीक है। यह सर्जरी के परम्पारागत तरीकों से कम हानिकारक है।


सीटी स्कैन और बोन स्कैन -
ये स्कैन दिमाग, लीवर, हड्डियों और अन्य अंगों में कैंसर कोशिकाओं के फैलने की जांच करते हैं।


पॉज़िट्रॉन इमिशन टोमोग्राफी (पीईटी) स्कै‍न -

अब लंग कैंसर के प्रसार का निर्धारण करने के लिए सीटी स्कैन के आने से पीईटी स्कैनिंग के उपयोग का महत्व नहीं रह गया है। पीईटी स्कैनिंग द्वारा जांच के दौरान लंग कैंसर अत्यधिक तीव्र गति से मेटाबॉलिक क्रियाएं शुरू कर देता है।

 

Read More Articles on Lung Cancer in Hindi

Loading...
Is it Helpful Article?YES1 Vote 13520 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK