फेफड़े का एडेनोकार्सिनोमा का निदान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 12, 2013

 


फेफड़े के कैंसर के रूपों में सबसे सामान्य रूप एडेनोकार्सिनोमा का है। धूम्रपान करने वाले लोगों में यह कैंसर सबसे ज्‍यादा पाया जाता है। यद्यपि इसके लक्षण अब धूम्रपान न करने वाले लोगों में भी काफी प्रकट होने लगे है। 

फेफड़े का एडेनोकार्सिनोमा के निदान के लिए सबसे पहले डाक्‍टर आपसे धूम्रपान के विषय में अथवा धूम्रपान वाले वातावरण में रहने के विषय में जानकारी लेगा। यदि आप धूम्रपान करते हैं तो डॉक्टर आपसे पूछेगा कि आप कितना धूम्रपान करते हैं और कितने समय से धूम्रपान कर रहे हैं। साथ ही आपसे यह भी जानकारी लेगा कि क्या आप ऐसी जगह पर काम करते हैं जहां पर आप एसबेस्टस अथवा अन्य कार्सिनोजेन के संपर्क में रहते हैं।

डाक्‍टर को लक्षणों और पूर्व इतिहास के आधार पर फेफड़े के कैंसर के किसी रूप पर संदेह हो सकता है। डॉक्टर आपकी जांच के साथ-साथ, आपके फेफड़े और चेस्‍ट की जांच भी करेगा साथ ही फेफड़े के एडेनोकार्सिनोमा की पुष्टि करने के लिये डॉक्‍टर सीने का एक्स–रे भी करा सकता है। 

एक्स-रे संदेहास्पद होने पर ट्यूमर के आकार व स्‍‍थान की पुष्टि करने के लिये सीटी स्कैन किया जाता है। यदि कैंसर का संदेह होता है तो निदान की पुष्टि करने के लिये अग्रिम जांच की जाती है। विशेष प्रकार के फेफड़े के कैंसर, इसके फैलाव और निदान की जानकारी भी इन जांचों से प्राप्त होती है। आइए उन टेस्‍टों के बारे में जानते हैं। 

फेफड़े के कैंसर के रूपों में सबसे सामान्य रूप एडेनोकार्सिनोमा का है। धूम्रपान करने वाले लोगों में यह कैंसर सबसे ज्‍यादा पाया जाता है। यद्यपि इसके लक्षण अब धूम्रपान न करने वाले लोगों में भी काफी प्रकट होने लगे है। 

 

adenocarcinoma of the lung ka nidaanफेफड़े के एडेनोकार्सिनोमा के निदान के लिए सबसे पहले डाक्‍टर आपसे धूम्रपान के विषय में अथवा धूम्रपान वाले वातावरण में रहने के विषय में जानकारी लेगा। यदि आप धूम्रपान करते हैं तो डॉक्टर आपसे पूछेगा कि आप कितना धूम्रपान करते हैं और कितने समय से धूम्रपान कर रहे हैं। साथ ही आपसे यह भी जानकारी लेगा कि क्या आप ऐसी जगह पर काम करते हैं जहां पर आप एसबेस्टस अथवा अन्य कार्सिनोजेन के संपर्क में रहते हैं।

 

[इसे भी पढ़ें : फेफड़े का एडेनोकार्सिनोमा क्‍या है]

 

डाक्‍टर को लक्षणों और पूर्व इतिहास के आधार पर फेफड़े के कैंसर के किसी रूप पर संदेह हो सकता है। डॉक्टर आपकी जांच के साथ-साथ, आपके फेफड़े और चेस्‍ट की जांच भी करेगा साथ ही फेफड़े के एडेनोकार्सिनोमा की पुष्टि करने के लिये डॉक्‍टर सीने का एक्स–रे भी करा सकता है। 

 

एक्स-रे संदेहास्पद होने पर ट्यूमर के आकार व स्‍‍थान की पुष्टि करने के लिये सीटी स्कैन किया जाता है। यदि कैंसर का संदेह होता है तो निदान की पुष्टि करने के लिये अग्रिम जांच की जाती है। विशेष प्रकार के फेफड़े के कैंसर, इसके फैलाव और निदान की जानकारी भी इन जांचों से प्राप्त होती है। आइए उन टेस्‍टों के बारे में जानते हैं। 

 

[इसे भी पढ़ें : फेफड़े का एडेनोकार्सिनोमा के लक्षण]


बलगम का नमूना (स्प्‍यूटम सैंपल)

इस जांच के अंतर्गत रोगी के बलगम की प्रयोगशाला में जांच की जाती है और कैंसर की कोशिकाओं का पता लगाया जाता है। यह एक ऐसी जांच प्रक्रिया है जो बलगम में कैंसर की कोशिकाओं का आकलन करती है। इस जांच को स्पूटम साइटोलॉजी कहा जाता है।

 

 

बॉयोप्सी 

इस जांच के अंतर्गत असामान्य फेफड़े के टिश्‍यू को निकाल कर परीक्षण किया जाता है। अक्सर इस जांच में ब्रांकोस्कोपी का इस्तेमाल किया जाता है। कभी-कभी संदेहग्रस्त फेफड़े क्षेत्र का पता लगाने के लिये शल्यक्रिया की भी आवश्यकता पड़ती है।

 

 

ब्रांकोस्कोपी 

इस प्रक्रिया के अंतर्गत एक नली जैसा उपकरण एयरवेज के माध्यम से फेफड़े में घुसता है। इसका उद्देश्य फेफड़े के अंदर के कैंसर को सीधे देखना होता है और वहां से एक छोटे से टुकड़े को बायोप्सी के लिये निकालना होता है।

 

[इसे भी पढ़ें : फेफड़े का एडेनोकार्सिनोमा से बचाव]

 

मीडियास्टिनोस्कोपी 

इस प्रक्रिया के अंतर्गत एक नली जैसे उपकरण का इस्तेमाल लिंफ नोड्स अथवा फेफड़ों के बीच दिखाई देने वाले किसी मास की बायोप्सी के लिये किया जाता है। बायोप्सी से फेफड़े के कैंसर के प्रकार की जानकारी हासिल की जाती है और यह जांच की जाती है कि कही कैंसर लिंफ नोड्स तक तो नहीं फैल गया है।

 

 

फाइल-नीडल एस्पिरेशन

 

इस प्रक्रिया के अंतर्गत फेफड़े के ऐसे क्षेत्र में एक छोटी सुई घुसाई जाती है जहां पर संदेह होता है। तथा उसी समय एक सीटी स्कैन किया जाता है। जिससे कैंसर के प्रकार को जानने के लिये प्रयोगशाला में परीक्षण किया जाता है।


 

 

थोरासेंटेसिस 

 

इस प्रक्रिया का इस्तेमाल तब किया जाता है जब फेफड़े के कैंसर के कारण सीने में फ्ल्यूइड जमा हो जाता है। इसके तहत एक रोगाणुरहित सुई का इस्तेमाल उस फ्ल्‍यूइड के नमूने को निकालने के लिये किया जाता है ताकि उसका परी‍क्षण किया जा सके।


 

 

वीएटीएस (वीडियो- एसिस्टेगड थोरैकोस्कोकपी)

इस प्रक्रिया के अंतर्गत शल्य चिकित्सक सीने में एक चीरा लगा कर एक लचीली नली को डालता है और फेफड़े के क्षेत्र की आन्तरिक एवं वाह्य अस्तर की सतह के आसपास की स्थिति का परीक्षण करता है और आवश्यकता पड़ने पर असामान्य क्षेत्रों को निकालने के लिये शल्य क्रिया का भी इस्तेमाल करता है। जिसे थोरैकोटॉमी कहा जाता है।

 

 

सीटी, पोजिट्रॉन इमीजन टोमोग्रॉफी (पीईटी) और बोन स्कैन 

इन स्कैन्स के जरिये यह जांच की जाती है कि कहीं फेफड़े का कैंसर मस्तिष्क, हड्डियों अथवा शरीर के अन्य भागों में तो नहीं पहुंच गया है।

 

 

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