नौकरी मन की न हो तो तन पर पड़ता है बुरा असर

By  ,  दैनिक जागरण
Feb 04, 2011

यदि आप अपनी नौकरी से असंतुष्ट हैं, तो इसका आपके स्वास्थ पर खराब असर पड़ सकता है। खास तौर पर, मानसिक स्वास्थ्य पर। एक नए अध्ययन में यह बात कही गई है।


अध्ययन ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय विश्र्वविद्यालय के डॉ. लियाना लीच के नेतृत्व में किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि मन की नौकरी न होना तनाव पैदा करता है। अध्ययन के अनुसार नौकरी होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि इससे स्वास्थ्य बेहतर रहेगा। वास्तव में, कई बार लोग अनिच्छा वाली नौकरी में बेरोजगारी की अपेक्षा ज्यादा अवसाद में जीते हैं।


डॉ. लीच के अनुसार, पूर्ववर्ती शोधों के परिणाम बताते हैं कि काम का दबाव लोगों के सामाजिक-आर्थिक, स्वास्थ्य और निजी हालातों को सुधारने में मदद करता है। वह कहती हैं कि यह शोध लोगों को सलाह देता है कि 'कोई भी' नौकरी मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद नहीं कर सकती। इसके बजाय लोगों को बेहतर जिंदगी बिताने के लिए ऐसे काम करने की जरूरत है, जो उनके मन के हों और जिनमें उनका विकास हो। यह नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए माहौल पर तय करता है।

 

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