दिल के मरीजों के लिए नई उम्मीद

By  ,  दैनिक जागरण
Dec 30, 2010
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 -हार्ट अटैक के बाद हृदय की मृत कोशिकाओं को किया जा सकेगा जीवित


भारतीय मूल के वैज्ञानिक प्रो. दीपक श्रीवास्तव ने दावा किया है कि हार्टअटैक के बाद हृदय के मृत ऊतकों को एक विशेष तकनीक के जरिए फिर से जीवित कोशिकाओं में बदला जा सकेगा। यह तकनीक स्टेम सेल से कोशिकाओं को विकसित करने के सिद्धांत पर काम करेगी। मगर इसमें कोशिकाओं को शरीर के बाहर प्रयोगशाला में विकसित करने की बजाय हृदय के मृत स्थान में विकसित कराया जाएगा।


प्रो. श्रीवास्तव ने ग्लैडस्टोन इंस्टीट्यूट ऑफ कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इस दिशा में काम किया। उनका दावा है कि बुजुर्गो के शरीर में हृदयाघात से होने वाली इस समस्या का इलाज महज पांच साल में मौजूद होगा।


वैज्ञानिकों के अनुसार धड़कने वाली  कोशिकाओं 'कार्डियोमायोसाइट्स' में से कुछ कोशिकाएं हृदयाघात के बाद मृत हो जाती हैं, इन कोशिकाओं के आस-पास की जीवित कोशिकाएं 'फाइब्रोब्लास्ट' इनकी भरपाई नहीं कर पातीं। मगर प्रो. श्रीवास्तव ने ऐसी तकनीक ईजाद की है जिससे 'फाइब्रोब्लास्ट' कोशिकाओं को 'कार्डियोमायोसाइट्स' में बदला जा सकता है।


वैज्ञानिकों ने इसके लिए चूहों पर अपना प्रयोग किया। उन्होंने चूहों की फाइब्रोब्लास्ट' को 'कार्डियोमायोसाइट्स' में बदलने में सफलता हासिल की।


श्रीवास्तव ने बताया कि इस तकनीक के जरिए कई मरीजों के लिए आशा की किरण जगी है। उन्होंने कहा कि हृदय की कम से कम आधी कोशिकाएं 'फाइब्रोब्लास्ट' होती हैं, जरूरत पड़ने पर कभी भी उनका इस्तेमाल किया जा सकता है। श्रीवास्तव की इस खोज को विज्ञान से जुड़ी पत्रिका 'सेल' में प्रकाशित किया गया है।

 

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