दमा रोग में खायें मछली

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 01, 2012

दमा एक गंभीर फेफड़ों की बीमारी है, जो श्वसन मार्ग को बाधा पहुंचाती है। यानी यह बीमारी फेफड़ों से हवा के मार्ग को अवरूद्घ करती है। जिससे श्वसन नली में सूजन आ जाती है या फिर श्वसन नली का मार्ग संकरा हो जाता है। इससे हवा संकुचित मार्ग से ठीक से पास नहीं हो पाती जिससे सांस लेने में कठिनाई होने लगती है।

 

Duma rog me khaye machli

दमा फेफड़ों की बीमारी है, जो श्वसन मार्ग को बाधा पहुंचाती है। यानी यह बीमारी फेफड़ों से हवा के मार्ग को अवरूद्घ करती है। जिससे श्वसन नली में सूजन आ जाती है या फिर श्वसन नली का मार्ग संकरा हो जाता है। इससे हवा संकुचित मार्ग से ठीक से पास नहीं हो पाती जिससे सांस लेने में कठिनाई होने लगती है।

 

अस्थमा के लक्षणों में सांस लेने के दौरान घरघराहट होना, थकान होना, गले में खराश होना, सामान्य सर्दी होना, सीने में जकड़न होना, खांसी के दौरान तकलीफ होना इत्यादि समस्याएं होती हैं। शोधों के अनुसार,यदि अस्थमा का ठीक तरह से उपचार करवाया जाए और मछली का भरपूर सेवन किया जाए तो अस्थमा की समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यानी मछली से अस्थमा का उपचार संभव है। तो आपको दमा रोग में मछली खाना चाहिए। लेकिन सवाल उठता है कि मछली का सेवन कितना और किस रूप में करना चाहिए जिससे अस्थमा मरीज अस्थमा की समस्याओं से बच सकें। तो आइए जानें क्या वाकई दमा रोग में मछली खाना लाभदायक है।


[इसे भी पढ़ें- कॉफी से अस्‍थमा का इलाज]


मछली के तेल का सेवन

समुद्री मछली, सैल्मन, ट्यूना और कॉड लिवर इत्यादि को मिलाकर ही फिश ऑयल और फिश के अन्य उत्पादों का निर्माण किया जाता है। फिश ऑयल में ओमेगा 3 फैटी एसिड होता है जो कि बहुत जल्दी अस्‍थमा रोगियों को ठीक करने में कारगार है। यानी यदि अस्थमा रोगी फिश ऑयल का सेवन करते हैं तो ये उनके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए लाभदायक है। इससे गले में आने वाली सूजन से निजात मिलती हैं। जो बच्चे श्वास दमा (bronchial asthma) के शिकार होते हैं उनके लिए फिश ऑयल का सेवन बहुत फायदेमंद है।

अस्थमा रोगियों के लिए रोजाना तीन ग्राम फिश ऑयल लेना उनके अस्थमा की समस्याओं को दूर कर सकता है। लेकिन यदि इससे अधिक फिश ऑयल लिया जाता है तो सांस संबंधी विकार, दस्त की समस्या और नाक से खून बहना इत्यादि की समस्या हो सकती है। अस्थमा के दौरान आराम पाने के लिए फिश ऑयल के बदले दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए। अस्थमा से निजात पाने के लिए फिश ऑयल का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह लेनी चाहिए। अस्थमा के अलावा फिश ऑयल से दिल की बीमारियां, अलजाइमर रोग, अर्थराइटिस और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों को भी कम किया जा सकता है।



[इसे भी पढ़ें- अस्‍थमा में पोषण थेरेपी]

मछली का सेवन
मछली के नियमित सेवन से आप कई बीमारियों से निजात पा सकते हैं। जब बात हो अस्थमा की तो अस्थमैटिक मरीजों को अस्थमा से जुड़ी समस्याओं से निजात पाने के लिए निश्चित रूप से मछली का सेवन करना चाहिए। फैटी फिश अस्थमा रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद होती है। अस्थमा के मरीजों को सप्ताह में कम से कम दो बार मछली का सेवन जरूर करना चाहिए। इससे ना सिर्फ वे आसानी से सांस ले सकते हैं बल्कि उनके गले की सूजन, खराश, संकरी श्‍वासनली इत्यादि में भी सुधार होता है। क्या आप जानते हैं जो अस्थमैटिक मरीज सप्ताह में दो बार मछली का सेवन करते हैं, ऐसे मरीजों में लगभग 90 फीसदी अस्थमा की समस्याएं कम हो जाती हैं।



आप चाहे तो अस्थमा से निजात पाने के लिए फिश थेरेपी भी ले सकते हैं जो कि अस्थमा की समस्याओं को कम करने में बहुत फायदेमंद हैं।

 

Read More Articles on Asthma in Hindi

Loading...
Is it Helpful Article?YES22 Votes 23833 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
I have read the Privacy Policy and the Terms and Conditions. I provide my consent for my data to be processed for the purposes as described and receive communications for service related information.
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy. OK