डॉट्स क्या है

डॉट्स के जरिए टी.बी के रोगियों को ठीक किया जाता है।

Anubha Tripathi
ट्यूबरकुलोसिसWritten by: Anubha TripathiPublished at: Mar 19, 2012
डॉट्स क्या है

Dots kya haiटी.बी रोग अब लाइलाज नहीं रहा। हमारे देश में ऐसी दवाईयां बन चुकी हैं जिनसे क्षय रोग ठीक हो सकता है। इन दवाओं का  कोर्स 6-9 महिने का होता है। लेकिन सामान्य तौर पर मरीज़ थोड़ा सा ठीक महसूस करने पर दवाओं का सेवन करना बंद कर देता। इससे टी.बी के दोबारा होने का खतरा बढ़ जाता है। डॉट्स के जरिए टी.बी के रोगियों को ठीक किया जाता है। इसके द्वारा कम समय में रोगी को पूरी तरह से इस रोग से मुक्ति दिलाई जा सकती है। यह विधि स्वास्थय  संगठन द्वारा विश्व स्तर पर टी.बी. को नियन्त्र ण करने के लिये अपनाई गई एक विश्वसनीय विधि है, जिसमें रोगी को एक-दिन छोड़कर हफ्ते में तीन दिन डॉट्स कार्यकर्ता के द्वारा दवाई का सेवन कराया जाता है।

डॉट्स विधि

डॉट्स विधि के अन्तर्गत चिकित्सा के तीन वर्ग है। पहला, दूसरा व तीसरा। प्रत्येक वर्ग में चिकित्सा का गहन पक्ष व निरंतर पक्ष होता है।

गहन पक्ष

गहन पक्ष के दौरान यह सुनि‍श्चित करना होता है कि रोगी दवा की प्रत्येसक खुराक डॉट्स कार्यकर्ता की देख-रेख में लें। इस दौरान हर दूसरे दिन, सप्ताह में तीन बार दवाईयों का सेवन कराया जाता है। अगर निर्धारित दिन पर रोगी चिकित्सालय में नहीं आता है तो डॉट्स प्रोवाईडर की जिम्मेदारी बनती है,  कि रोगी को घर से लेकर आए उसे समझाए और उसे दवा खिलाएं।

निरंतर पक्ष

निरन्त र पक्ष में रोगी को हर सप्ताह दवा की पहली खुराक डॉट्स कार्यकर्ता के सामने लेनी है तथा अन्य दो खुराक रोगी को स्वयं लेनी होगी। अगले हफ्ते की दवाईयां लेने के लिये रोगी को पिछले हफ्ते लिया गया दवाओं का खाली पैक अपने साथ लाना जरूरी होता है।

बलगम की जांच

दवाओं की खुराक देने के बाद रोगी के बलगम की जांच करवाई जाती है। यदि बलगम की जांच की रिपोर्ट निगेटिव है तो रोगी को निरन्तर पक्ष की दवाईयां देना शुरु कर दिया जाता है। यदि बलगम की रिपोर्ट पॉजि़टिव हो तो इलाज करने वाले चिकित्सक रोगी को दी जा रही दवाओं की अवधि बढ़ा देता है।

सभी क्षय रोगियों का इलाज डॉट्स से संभव

डॉट्स पद्धति के अन्तर्गत सभी प्रकार के क्षय रोगियों को तीन समूह में बांटकर उनका इलाज किया जाता है। सभी प्रकार के क्षय रोगियों का इलाज डाट्स से सम्भ व है।

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