डिमेंशिया क्‍या है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Sep 13, 2012

चलते-चलते यूं ही रुक जाते हैं आप, कहते-कहते ही चुप हो जाते हैं आप... तो जनाब कहीं आपको भूलने की बीमारी तो नहीं। 

dementia kya haiबढ़ती उम्र का असर इंसान पर न सिर्फ जिस्‍मानी बल्कि दिमागी तौर पर भी पड़ता है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ याददाश्‍त कमजोर होने लगती है। और कई लोगों की याददाश्‍त तो बिल्‍कुल समाप्‍त हो जाती है। दरअसल, यह एक मानसिक रोग है जिसका नाम है- डिमेंशिया।

डिमेंशिया से ग्रस्त की स्‍मरण-‍शक्ति शून्‍य हो जाती है। इसके बाद उसका व्‍यवहार असामान्य हो जाता है। उस व्‍यक्ति की सुध-बुध समाप्‍त हो जाती है। डिमेंशिया से पीडि़त व्यक्ति यह नहीं जान पाता है, न ही समझ पाता है कि वह क्या कर रहा है, क्यों कर रहा है।

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डिमेंशिया दिमाग की वह स्थिति है, जिसमें व्यक्ति के लिए कुछ भी याद रखना, समझ पाना, अपनी बात दूसरों को समझा पाना, सब कुछ बेहद मुश्किल हो जाता है। कुछ समय के बाद हालत यह हो जाती है कि उसे खुद अपनी सुध-बुध नहीं रहती। उसका पूरा व्‍‍यक्तित्‍व ही बदल जाता है।

डिमेंशिया के कारण

बढ़ती उम्र के साथ-साथ मस्तिष्‍क की कोशिकायें नष्‍ट होने लगती हैं और तभी डिमेंशिया का खतरा ज्‍यादा होता है। सिर की चोट, दौरा पड़ने, ब्रेन ट्यूमर या फिर अल्‍जाइमर जैसी बीमारियों के चलते मस्तिष्‍क की कोशिकाएं नष्‍ट हो जाती हैं। डिमेंशिया से पीडि़त व्‍यक्ति को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

डिमेंशिया के प्रभाव -

स्‍मरण शक्ति का लोप होना

आमतौर पर भी इंसान कुछ न कुछ भूल जाता है, लेकिन डिंमेशिया ग्रस्‍त व्‍यक्ति के साथ यह समस्‍या अधिक होती है। डिमेंशिया में आदमी एक बार जो भी भूल जाता है उसे दोबारा वह याद नहीं आता है। वह एक ही सवाल को दोहरा सकता है। चाहे उसे उसका जवाब कितनी बार दिया जा चुका हो। उसे तो यह भी याद नहीं रहता कि वह उस सवाल को पहले भी पूछ चुका है। या फिर, उसे इस सवाल का जवाब पहले मिल चुका है।

रोजमर्रा के कामों को करने में भी परेशानी

ऐसा भी हो सकता है कि डिंमेशिया से ग्रस्‍त व्‍यक्ति खाना बनाए, लेकिन परोसना भूल जाए। वह यह भी भूल सकता है कि उसने खाना बनाया भी था कि नहीं।


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भाषा की दिक्‍कतें

डिमेंशिया से पीडि़त व्यक्ति सामान्य और आसान शब्दों को भी भूल सकता है, गलत शब्दों का इस्तेमाल कर सकता है। और इस कारण दूसरे व्यक्ति के लिए यह समझना मुश्किल हो सकता है कि आखिरकार चाहता क्या है!

समय एवं स्थान संबंधी समस्या

वह अपनी ही सड़क पर रास्ता भूल सकता है। वह यह भी भूल सकता है कि कब, कहां कैसे पहुंचा तथा घर वापस कैसे पहुंचे। यानी उसकी परेशानियां किसी भी सीमा तक जा सकती हैं।

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मूड में आकस्मिक बदलाव

डिमेंशिया पीडि़त व्यक्ति की मनोदशा कब बदल जाए कहा नहीं जा सकता। अभी शांत बैठा है, लेकिन पल भर में ही आंसू देखे जा सकते हैं। आंसू बहते हुए ही कब क्रोध आ जाए कहा नहीं जा सकता। मनोदशा पल-पल और तेजी से बदल सकती है।

कितना सामान्य है डिमेंशिया

उम्र बढ़ने के साथ ही डिमेंशिया की संभावना बढ़ जाती है। आमतौर से डिमेंशिया की स्थिति आधा जीवन बीतने के बाद अर्थात जीवनकाल के दूसरे हिस्से में ही, अधिक बनती है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अक्सर 65 वर्ष की अवस्था के बाद ही, यह स्थिति आती है।


क्या करें

  • यदि डिमेंशिया का कोई भी लक्षण नजर आए तो
  • डॉक्टर से बात करें।
  • यदि लक्षण डिमेंशिया का होगा तो डाक्टर परीक्षण के लिए कह सकता है। परीक्षण अवश्य करवाएं।
  • डिमेंशिया की पुष्टि होने पर डॉक्टर से इलाज के विकल्पों पर बात की जानी चाहिए।


उपचार

डिमेंशिया की शुरूआती अवस्था को अल्जीमर्स भी कहते हैं। उचित डॉक्‍टरी इलाज और पारिवारिक सहयोग से मरीज को संभाला जा सकता है।

 

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