पैरों में ऐंठन, तेज दर्द, जलन, झनझनाहट है डायबिटिक न्यूरोपैथी के लक्षण, जानें उपचार का तरीका

डायबिटीज यानी की मधुमेह के कारण नसों की विकृति शुरू होने को डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं। इस स्थिति में नसों की ताकत कमजोर होना शुरू हो जाती है। डायबिटिक न्यूरोपैथी मरीज के पैरों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है।

Jitendra Gupta
Written by: Jitendra GuptaPublished at: Jan 01, 2013Updated at: Jul 10, 2019
पैरों में ऐंठन, तेज दर्द, जलन, झनझनाहट है डायबिटिक न्यूरोपैथी के लक्षण, जानें उपचार का तरीका

डायबिटीज यानी की मधुमेह के कारण नसों की विकृति शुरू होने को डायबिटिक न्यूरोपैथी कहते हैं। इस स्थिति में नसों की ताकत कमजोर होना शुरू हो जाती है। डायबिटिक न्यूरोपैथी मरीज के पैरों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है। इस स्थिति से जूझ रहे लोगों के पैरों में झनझनाहाट और सुन्नता महसूस होती है। इलाज न होने पर और वक्त के साथ-साथ पैरों की संवेदनशीलता समाप्त भी होती जाती है। उम्र बढने, मोटापा, लंबे समय तक डायबिटीज रहने और अनियंत्रित ब्लड सुगर से डायबेटिक न्यूरोपैथी का खतरा बढ सकता है।

डायबिटीज से ग्रस्त मरीज को समय के साथ-साथ डायबिटिक न्यूरोपैथी या पूरे शरीर की नर्व को नुकसान हो सकता है। नर्व की क्षति से शरीर की कई प्रणालियों, जैसे-पाचन तंत्र, प्रजनन तंत्र आदि को भी नुकसान पहुंच सकता है। डायबिटीज का न्यूरो प्रॉब्लम्स से पुराना संबंध है अगर इसका समय पर उपचार न किया जाये तो पैरों को काटने की नौबत तक आ सकती है।

डायबिटिक न्यूरोपैथी के कारण

  • ब्लड़ ग्लूकोज का बढ़ना, डायबिटीज की अवधि, असामान्य ब्लड कोलेस्ट्रोल । 
  • इंसुलिन का निम्न स्तर भी इसका एक कारण है।
  • रक्त नलिकाओं की क्षति, जिसके कारण नसों को ऑक्सीजन और दूसरे पोषक तत्व की आपूर्ति नहीं हो पाती। 
  • प्रतिरक्षक तत्व, जो नर्व्स में सूजन पैदा कर सकते हैं।
  • कार्पेल टनेल सिंड्रोम, जिससे नर्व्स को चोट पहुंच सकती है।
  • वंशानुगत विशेषताएं नर्व रोगों की संभावना बढा सकती है।
  • धूम्रपान, शराब पीना, और देर तक बैठे रहने से आप डायबिटिक न्यूरोपैथी का शिकार हो सकते हैं।

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डायबीटिक न्यूरोपैथी के लक्षण

  • पैरों में ऐंठन, तेज दर्द, जलन, झनझनाहट और पैर छूने पर दर्द।
  • झनझनाहट।
  • संवेदनहीनता। 
  • जलन। 

डायबीटिक न्यूरोपैथी में दर्द और दूसरे लक्षण रात में बढ़ जाते हैं। पांव के नसों में क्षति होने पर पांव संवेदनशून्य हो जाते हैं, जिसकी वजह से चोट लगने पर पता नहीं चलता। इसलिए त्वचा और पैरों की देखभाल आवश्यक है। डायबीटिक पेरिफेरल न्यूरोपैथी के प्रारंभिक लक्षणों वाले रोगी को ब्लड शुगर नियंत्रत रखने से दर्द में राहत मिल सकती है।

डायबीटिक न्यूरोपैथी की जांच और रोग की पहचान

डॉक्टर डायबेटिक न्यूरोपैथी की पहचान के लिए आपके ब्लडप्रेशर, हार्ट बीट, मसल् एंड्यूरेंस और रिफ्लेक्स का सहारा लेते हैं। विभिन्न प्रकार की गतिविधियों, जैसे-कंपन, तापमान बदलने और स्पर्श, के प्रति संवेदनशीलता और प्रतिक्रिया की जांच की जाती है।

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डायबीटिक न्यूरोपैथी का उपचार

  • डॉक्टर डायबेटिक न्यूरोपैथी का इलाज ओरल ड्रग्स से किया जाता है।
  • कोई एक ऐसी दवा नहीं है जो प्रत्येक रोगी के लिए लाभकारी हो।
  • कुछ लोगों में वैकल्पिक इलाज से लाभ होता है।

दवाएं

  • एसिटामिनोफेन या नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं: दर्द से आराम के लिए एसिटामिनोफेन या एनएसआइडी जैसे-आइब्यूप्रोफेन, डिक्लोफिनैक, नैप्रोक्सेन, इत्यादि लिए जा सकते हैं।
  • एनएसआइडी से दर्द से राहत मिलती है, लेकिन कुछ लोगों में अधिक समय तक इसके उपयोग से किडनी की कार्यक्षमता घटती है।
  • ट्राईसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेंट(टीसीए):  इमिप्रेमाइन, एमिट्रिप्टिलीन और नॉरट्रिप्टिलीन न्यूरोपैथिक दर्द के लिए प्रभावकारी है। दर्दनिवारण के लिए अवसाद की तुलना में टीसीए की अत्यल्प मात्रा दी जाती है।
  • पेरीफेरल न्यूरोपैथी के दर्द के लिए सबसे ज्यादा दी जाने वाली टीसीए दवा है एमिट्रिप्टिलीन।
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