जल जाने पर प्राथमिक चिकित्‍सा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Nov 12, 2012
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jal jaane parrathmik chikitsa

बर्न्स शुष्क गर्मी (जैसे के आग), गीली गर्मी ( जैसे भाप या गर्म तरल पदार्थ), विकिरण, घर्षण, गर्म वस्तुएं, सूरज, बिजली, या रसायन कारण हो सकते हैं। बर्न्स पृष्ठीय (पहली या दूसरी डिग्री) या गहरे (तृतीय डिग्री) हो सकते हैं। इसके लक्षणों में त्वचा की लाल होना, सूजन, छाले और दर्द शामिल हैं। तीसरी डिग्री बर्न्स में, अंतर्निहित ऊतक जैसे मांसपेशी प्रावरणी और नसें भी क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। यदि बर्न्स व्यापक हैं या तीसरी डिग्री के बर्न्स हैं तो तत्काल चिकित्सा देखभाल की जरूरत है। यदि बर्न के क्षेत्रफल का व्यास 3 इंच से अधिक है, या बर्न चेहरे, हाथ, पैर या जननांगों पर है तो आप अपने बच्चे को तुरंत एक चिकित्सक के पास ले जाएं।

 

[इसे भी पढ़े : जलने पर कैसे करें देखभाल]

 

बर्न्स के लिए प्राथमिक उपचार

 

छोटे बर्न्स (पहली और दूसरी डिग्री के बर्न्स) जिनका क्षेत्रफल 3 इंच व्यास से कम का है उनका इलाज घर पर किया जा सकता है। मामूली बर्न्स के लिए प्राथमिक उपचार में ये शामिल हैं

  • बर्न को ठंडा करें: बर्न को 10-15 मिनट के लिए या दर्द कम होने तक नल के नीचे ठंडे पानी में भिगोएं। यदि नल के नीचे भिगोना संभव नहीं है तो बर्न को ठंडे पानी में डुबो दें या इसे कोल्ड कम्प्रैसेस (ठंडी पट्टी) से ठंडा करें। जलने पर बर्फ न लगाएं।
  • पट्टी लगाएं: जीवाणुरहित पट्टी से जले क्षेत्र को सुरक्षित करें। ढकने के लिए रुई का इस्तेमाल न करें इससे जलन हो सकती है। पट्टी को हलके से लगाएं जिससे जली त्वचा पर अनुचित दबाव न पड़े।  जले क्षेत्र पर पट्टी करने से दर्द को कम करने में मदद मिलती है और फफोले पड़ी त्वचा सुरक्षित रहती है।
  • पीड़ाहारी: अपने बच्चे को सरल दर्दनाशक दवाएं जैसे ऐसिटामिनोफेन, ब्रूफेन या मेफेनेमिक एसिड दें। बच्चों या किशोरों को एस्पिरिन नहीं दी जानी चाहिए।

अधिकतर मामूली बर्न्स आगे बिना किसी इलाज के ठीक हो जाते हैं। हर रोज ड्रेसिंग बदलें और संक्रमण के लक्षणों जैसे दर्द में वृद्धि, लालिमा, बुखार सूजन या स्यन्दन (ऊज़िंग) के प्रति सतर्क रहें।

 

 

 

आपको क्या नहीं करना चाहिए?

  • जले क्षेत्र पर बर्फ न लगाएं।
  • जले पर मक्खन या मलहम न लगाएं।
  • फफोले न फोड़ें क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
  • व्यापक या तीसरे डिग्री बर्न का घर पर इलाज न करें।

किसी भी प्रकार से प्रमुख रुप से जलने पर अपने बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाएं। अस्पताल पहुंचने तक इन चरणों का पालन करें

  • जली हुई जगह से चिपके किसी भी कपड़े को न उतारें।
  • गंभीर रुप से जले क्षेत्रों को पानी में न भिगोएं या कोई मरहम न लगाएं। जीवाणुरहित पट्टी या साफ कपड़े से जली सतह को ठकें।
  • सांस लेने, खांसने या गतिविधि की जांच करें। यदि बच्चा सांस नहीं ले रहा है या परिसंचलन के अन्य लक्षण अनुपस्थित हैं तो कार्डियोपल्मोनरी रेसुसिटेशन (सीपीआर) शुरू करें।
  • यदि संभव हो तो शरीर के जले हिस्से दिल के स्तर से ऊपर उठाएं।

 

Read More Article on Medical-Safety-Tips in hindi.

 

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