चि‍कनगुनिया के फैलने के कारण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 07, 2013

कहते हैं अगर आपके आसपास सफाई हो तो आपका मन प्रसन्‍न रहता है। इसके साथ ही आप कई संभावित बीमारियों के खतरे से भी बचे रहते हैं। चिकनगुनिया भी एक ऐसी ही बीमारी है, जो मच्‍छर के काटने से फैलती है। अगर आप कुछ सावधानियां बरतें तो इस बीमारी के खतरे से बचे रह सकते हैं।

कैसे फैलता है चिकनगुनियाचिकनगुनिया एक वायरल इंफेक्‍शन है। और संक्रमित एडिस मच्‍छर के काटने से यह वायरस इनसानी शरीर में प्रवेश करता है और उसे बीमार बना देता है।

कैसे फैलता है चिकनगुनिया

चिकनगुनिया के वायरस को फैलने में एक संवाहक की जरूरत होती है। और एडिस प्रजाति का यह मच्‍छर वायरस के लिए इसी संवाहक का काम करता है। इनसानों के आपसी संपर्क से यह वायरस नहीं फैलता। और न ही अभी तक ऐसा कोई मामला ही सामने आया है। इसके लिए मच्‍छर पहले संक्रमित व्‍यक्ति को काटता है और उसके बाद किसी स्‍वस्‍थ व्‍यक्ति को। ऐसे ही यह वायरस एक व्‍यक्ति से दूसरे व्‍यक्ति के शरीर में पहुंचता है और उसे बीमार बना देता है। अपने घर और आसपास का माहौल साफ-सुथरा रखकर आप इस बीमारी के खतरे को कम कर सकते हैं।  


अफ्रीका और एशिया में चिकनगुनिया फैलाने वाला यह मच्‍छर काफी खतरनाक होता है। यह मच्‍छर डेंगू और पीला ज्‍वर फैलाने में भी यही मच्‍छर उत्तरदायी होता है। इसलिए दुनिया का बड़ा हिस्‍सा चिकनगुनिया वायरस से प्रभावित हो सकता है।

बचाव


चिकनगुनिया की कोई दवा फिलहाल मौजूद नहीं है। यह बीमारी एडिस मच्‍छर के काटने से फैलती है। यह मच्‍छर एकत्रित पानी में पैदा होता है। इससे बचने के लिए जरूरी है कि आप अपने आसपास सफाई रखें। घर पर बेकार पड़े बर्तनों में पानी जमा न होने दें।

कूलर, पक्षियों को पानी पिलाने वाला बर्तन, स्विमिंग पूल, गमले आदि में जमा पानी में यह मच्‍छर पनप सकता है। घरों में कूलर को सप्‍ताह में एक बार जरूर साफ करें। अगर ऐसा करना संभव न हो, तो आप उसमें सप्‍ताह में एक बार एक बड़ा चम्‍मच पेट्रोल का डाल सकते हैं।

इसके साथ ही ही स्विमिंग पूल का पानी भी बदलते रहें। यदि आप बाहर स्विमिंग करने जाते हैं अथवा अपने बच्‍चे को भेजते हैं तो इस बात की पूरी तस्दीक कर लें कि वहां का पानी नियमित बदला जाता हो।

मच्‍छर के काटे जाने से बचने के लिए आप दवा का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। साथ ही पूरी बाजू की कमीज पहनने से भी इस मच्‍छर के प्रकोप से कुछ हद तक बचा जा सकता है। सोते समय मच्‍छरदानी का प्रयोग करें। घर और आसपास के इलाके में मच्छर भगाने वाले स्प्रे, फॉगिंग, इन्सेक्टिसाइस वगैरह मच्‍छर मारने वाली दवाओं का इस्‍तेमाल करें।

 

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