गले में खिचखिच बना सकती है साइनस का शिकार

By  ,  दैनिक जागरण
Jul 22, 2010

गले में खिचखिचअगर आप नजले-जुकाम से अकसर पीडि़त रहते हैं तो इसे नजरअंदाज न करें क्योंकि यह साइनोसाइटिस यानी साइनस में तब्दील हो सकता है। अगर लंबे समय तक इसका इलाज न किया गया तो आंखों की रोशनी तक जा सकती है। यही नहीं पुराना जुकाम आपके दिमाग को प्रभावित कर सकता है। डायबिटीज रोगियों को तो इससे ज्यादा होशियार रहना चाहिए।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि बीते कुछ समय से साइनस के मामलों में इजाफा देखा गया है। इसकी प्रमुख वजह प्रदूषण है। साइनस की शुरुआत आम तौर पर नजला, एलर्जी, इंफेक्शन या फिर श्वसन तंत्र की खराबी से होती है। एम्स में नाक कान गला रोग विभाग के प्रमुख डाक्टर आरसी डेका का कहना है कि बहुत ठंडे पेय पदार्थ निगलने से भी साइनस या नाक के आसपास ठंड का असर होने का डर रहता है। गर्मी से बचने के लिए धड़ाधड़ ठंडे-शीतल पेय गटकने वाले लोग यह नहीं जानते कि ऐसा करने से उन्हें नुकसान हो सकता है। वह साइनस की चपेट में आ सकते हैं। उन्होंने बताया कि पर्यावरण में बैक्टीरिया और फंगस होने के कारण साइनस के मामलों में इजाफा हो रहा है। अगर नाक और गले में होने वाली खिचखिच काफी देर तक बनी रहे तो इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अपोलो अस्पताल के वरिष्ठ कंसलटेंट अमित किशोर का कहना है कि डायबिटीज के रोगियों में इंफेक्शन होने का खतरा सामान्य लोगों के मुकाबले ज्यादा होता है। यही वजह है कि इंफेक्शन से होने वाला साइनस भी उन्हें औरों से जल्दी घेर लेता है। यह भी देखा गया है कि साइनस की समस्या अगर पुरानी हो जाए तो लोग खर्राटे लेने लगते हैं।

 

छाया: onlymyhealth


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