गरीबी में बच्चों का पालन-पोषण है अवसाद पैदा करने वाला

By  ,  दैनिक जागरण
Oct 05, 2010

अवसादग्रस्त माताएं कम समय के लिए कराती हैं स्तनपान


गरीब परिवारों में जन्म लेने वाले आधे से ज्यादा शिशुओं का पालन-पोषण उनकी अवसादग्रस्त माताएं करती हैं। अमेरिकी शोधकर्ताओं का कहना है कि बच्चों के विकास में इससे परेशानियां आती हैं।


समाचार पत्र 'द वाशिंगटन पोस्ट' ने 'अर्बन इंस्टीट्यूट' के शोधकर्ताओं के हवाले से बताया है कि गरीबी में जन्म लेने वाले नौ नवजातों में से एक की मां अवसादग्रस्त होती है और ऐसी माताएं अन्य माताओं की तुलना में शिशु को अल्प समय के लिए स्तनपान कराती हैं।


शोधकर्ता ओलिविया गोल्डन कहती हैं, 'ऐसी मां जो सुबह सोकर उठने के साथ ही बहुत दुखी होती है, वह अपने बच्चे की आवश्यकताओं की ज्यादा देख-रेख नहीं कर सकती।'


उन्होंने कहा, 'यदि वह अपने बच्चे से बात न कर सके, उसके साथ खेल न सके, उसे देखकर खुश न हो तो इसका असर बच्चे के विकास पर पड़ता है। मस्तिष्क विकास रिपोर्ट बताती है कि ये मातृत्व के ऐसे लक्षण हैं, जो बच्चों के सफल विकास के लिए जरूरी है।'


रिपोर्ट में कहा गया है कि गरीबी में गंभीर रूप से अवसादग्रस्त माताएं बच्चों को केवल चार महीने या उससे कम समय के लिए स्तनपान कराती हैं। 'अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स' के मुताबिक बच्चों को एक वर्ष तक स्तनपान कराया जाना चाहिए।

 

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