क्षय रोग के कारण

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 18, 2012
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टीबी का बैक्‍टीरिया कई तरीकों से इनसान के शरीर में प्रवेश करता है। अगर इन कारणों को जानकर उनसे बचा जाए तो इस बीमारी से काफी हद तक दूर रहा जा सकता है।

Chhay rog

क्षय रोग (टी.बी) एक संक्रामक बीमारी है। क्षय रोग होने पर रोगी का शरीर कमजोर हो जाता है, उसका वजन कम होने लगता है और रोगी को थकान महसूस होने लगती है। इसके साथ ही रोगी को खांसी व तेज बुखार भी होने लगता है। तपेदिक का प्रभाव रोगी के फेफड़ों, हडि्डयों, ग्रंथियों तथा आंतों में कहीं भी देखने को मिल सकता है। इसके बैक्टीरिया इतने सूक्ष्म होते हैं कि एक्स रे के जरिए ही उनकी पहचान की जा सकती है।


बैक्टीरिया द्वारा

टी.बी माइक्रोबैक्टीरियम नामक बैक्टीरिया की वजह से होता है। यह बैक्टीरिया फेफड़ों आदि में उत्पन्न होकर उसमें घाव कर देते हैं। यह कीटाणु फेफड़ों, त्वचा, जोड़ों, मेरूदण्ड, कण्ठ, हडि्डयों, अंतड़ियों आदि पर हमला कर सकते हैं।

रोगी के संपर्क से

किसी भी क्षय रोगी के संपर्क में रहने से उसके खांसने, छींकने व थूकने से बैक्टी रिया स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।  

गलत रहन-सहन से

क्षय रोग उन व्यक्तियों के होने की संभावना ज्यादा होती है जिनके खान-पान तथा रहन-सहन का तरीका गलत होता है। इन खराब आदतों के कारण शरीर में विजातीय द्रव्य (दूषित द्रव्य) जमा हो जाते हैं और शरीर में रोग उत्पन्न हो जाता है।

प्रतिरोधक क्षमता कम होने से

शरीर में प्रतिरोधक क्षमता कम होने के कारण क्षय रोग होने की ज्यादा संभावना होती है। क्योंकि शरीर में क्षय रोग के जीवाणु से लड़ने की क्षमता नहीं होती है।

कार्यक्षमता से अधिक काम करने पर

क्षय रोग व्यक्ति को तब हो जाता है जब रोगी अपने कार्य करने की शक्ति से अधिक कार्य करता है।

गीले व धूल भरे वातावरण से

अधिक गीले स्थान पर रहने तथा धूल भरे वातावरण में रहने के कारण भी क्षय रोग हो जाता है।

धूप की कमी से

प्रकाश तथा धूप की कमी के कारण तथा खान-पान में अनुचित ढंग का प्रयोग करने के कारण भी क्षय रोग हो सकता है।

माता-पिता से बच्चों को

क्षय रोग के कीटाणु या तो छोटे बच्चे के माता-पिता से या गलत तरीके के रहन-सहन से बच्चों को होता है।

कुपोषण से  

कुपोषण या अत्यधिक कम वजन होने से टी.बी के बैक्टेरिया जल्दी शरीर पर अटैक करते हैं।

अल्कोहल या नशीली दवाओं से

अत्यधिक अल्कोहल या नशीली दवाओं के सेवन से तपेदिक होने का खतरा बढ़ जाता है।

 

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