क्या है डॉट्स प्लस

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 21, 2012
Comment

Subscribe for daily wellness inspiration

Like onlymyhealth on Facebook!

क्षय रोग (टीबी, तपेदिक या ट्यूबरकुलोसिस) का उपचार कराने के बावजूद भी इस बीमारी से राहत न पाने वाले मरीजों के लिए विश्व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्यूएचओ) व भारत सरकार ने मिलकर डॉट्स प्लस योजना की शुरूआत की। भारत में हर वर्ष लगभग 20 लाख लोग टीबी से पीडित होते हैं। टीबी के इलाज के लिए स्वास्‍थ्‍य केंद्रों पर मुफ्त में डॉट्स की गोलियां दी जाती हैं। लेकिन तपेदिक के कोर्स का समय ज्यादा होने की वजह से कई लोग बीच में ही इलाज छोड देते हैं या दवा खाने में अनियमितता बरतते हैं। टीबी का इलाज कराने के बावजूद ठीक न होने वाले 10 प्रतिशत के करीब मरीज स्वस्‍थ लोगों के लिए खतरनाक साबित होते हैं। ऐसे मरीजों के लिए भारत सरकार ने डॉट्स योजना के बाद डॉट्स प्लस योजना की शुरूआत की।

गई।
डॉट्स और डॉट्स प्लस में अंतर -

डॉट्स (डॉयरेक्टलली ऑब्जर्व ट्रीटमेंट शॉर्ट कोर्स) एक प्रकार का कोर्स होता है जो डॉट्स कार्यकर्ताओं द्वारा सरकारी स्वास्‍थ्‍य केंद्र में टीबी के मरीज को एक दिन छोडकर सप्ताह में तीन दिन सेवन कराया जाता है। डॉट्स खाने से 6-8 महीने में टीबी पर नियंत्रण पाया जा सकता है। जबकि डॉट्स प्लस टीबी के कोर्स समाप्त होने के बाद भी टीबी होने की आशंका पर चलाया जाता है। डॉट्स प्लास से तपेदिक के रोगी को 2 साल में पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।

 

डॉट्स प्लस के फायदे -

 

  • टीबी का एक रोगी 10 से 15 स्‍वस्‍थ लोगों को एक साल में टीबी फैला सकता है।
  • टीबी की दवा खाने वाले लोगों को 6 से 8 महीने में टीबी का इलाज हो जाता है।
  • टीबी के ऐसे मरीज जो बीच में ही दवा छोड देते हैं उनके लिए डॉट्स प्लस की शुरूआत की गई।
  • टीबी के इलाज के दौरान मरीज को हर रोज दवा की खुराक लेनी होती है लेकिन कई बार मरीज लापरवाही के कारण दवा लेना भूल जाते हैं।
  • दवा लेने में अनियमितता की वजह से मरीज को दोबारा टीबी होने की संभावना रहती है। डॉट्स प्लस प्रोग्राम के तहत उन मरीजों का इलाज किया जाता है जिनको दोबारा टीबी होने की आशंका रहती है।
  • डॉट्स प्लस कार्यक्रम के दौरान मरीजों को अस्पताल में भर्ती करके ही इलाज किया जाता है।
  • डॉट्स प्लस योजना के तहत ट्यूबरकुलोसिस के मरीज का दो वर्ष तक इलाज होगा।
  • इस योजना के तहत हर मरीज को मंहगी दवाएं दी जाती हैं जिससे प्रत्येक मरीज पर लगभग दो लाख रूपये या उससे ज्यादा खर्च आता है जिसे भारत सरकार की तरफ से खर्च किया जाता है।
  • डाट्स खाने से तपेदिक के मरीजों की मृत्यु दर 25 प्रतिशत से घटकर 2.5 प्रतिशत हो गई।
  • डॉट्स ही 95 प्रतिशत टीबी का सफल इलाज है।

 


तपेदिक के मरीज कई बार लापरवाही के कारण दवा लेना भूल जाते हैं। इससे मरीज को दोबारा टीबी होने की संभावना रहती है। डॉट्स प्लस प्रोग्राम के तहत उन मरीजों का इलाज किया जाता है जिनको दोबारा टीबी होने की संभावना रहती है। ऐसे लोग स्‍वस्‍थ लोगों के लिए हानिकारक होते हैं।

Loading...
Write Comment Read ReviewDisclaimer
Is it Helpful Article?YES6 Votes 14436 Views 0 Comment
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर