क्या भारत में संबंधों के मायने बदल रहे हैं

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 14, 2012

Kya bharat me sambandho ke maayne badal rahe hai

सोच में बदलाव के साथ ही लोगों में संबंधों को समझने के नजरिये में भी बदलावा आया है। संबंधों की बातें करने में अब लोगों के मन से शर्म और हिचकिचाहट समाप्त हो रही है। लोग, संबंधों को छुपाने की बजाय बताने में ज्यादा विश्वास करने लगे हैं। लेकिन पश्चिमी सभ्यता की तरह अभी भी भारत में कई बंदिशें हैं। मेट्रो सिटीज़ में संबंधों को नए तरीके से समझने का दौर शुरू हुआ है। अब संबंधों के मायने केवल परिवार तक ही नहीं सीमित हैं बल्कि आज खुलकर आप अपने साथी के साथ कहीं भी घूमने जा सकते हैं। संबंधों को बनाने में अब उम्र की बाधा नहीं रही है। इसलिए भारत में भी पहले की तुलना में संबंधों के मायने बदल रहे हैं।



भारत में बदलते संबंधों के मायने -



जीवनशैली में बदलाव -
समय के साथ लोगों की जीवनशैली में भी बदलाव हुआ। इसका सबसे ज्यादा असर लोगों के संबंधों पर पडा। एक साथ रहने के बजाय लोग इंडीपेंडेंट हो गए हैं। अपनी जीवनशैली के हिसाब से उनको अपना साथी पसंद करना होता है। एक ही कार्यालय में काम कर रहे दो लोगों के बीच संबंध बहुत ही आसानी से बन जाता है क्योंकि वे लोग एक दूसरे की प्रोफेशनल लाइफ को समझते ही हैं।


सोच में बदलाव -
संबंधों को लेकर लोगों की संकीर्ण सोच अब विकसित हुई है। सेक्स के बारे में बात करते हुए लोगों को शर्म लगती थी। घर में अगर कोई बडा या बुजुर्ग आदमी है तो उसके सामने सेक्स जैसे विषय पर चर्चा करना गुनाह समझा जाता था। लेकिन अब माता-पिता खुद ही सेक्स की शिक्षा अपने बच्चों को देते हैं। युवा वर्ग मैरेज काउंसलिंग की ओर आकर्षित हो रहा हैं। लोग दोस्तों से अपनी समस्याएं बांटने में पीछे नहीं हटते ।


उम्र बाधा नहीं -
संबंधों को बढा़ने के लिए अब उम्र बाधा नहीं बन रही है। लोगों के विचार अगर मिल रहे हैं तो किसी भी उम्र में संबंध बन सकते हैं। उम्र में बहुत अंतर होने के बावजूद भी आज शादियां हो जाती है। युवा अपनी उम्र से कहीं ज्यादा उम्रदराज के साथ डेटिंग कर रहे हैं। इंटरनेट डेटिंग के माध्यम से लोग अपनी भावनाओं की खुल कर अभिव्य्क्त कर रहे हैं । इंटरनेट पर मिनटों में दो अनजान लोगों में भी ऐसी दोस्ती हो जाती है, जैसे वो सालों से एक दूसरे को जानते हों


एकल परिवार का चलन बढा -
एकल परिवार की प्रथा ने संबंधों के मायने बदल दिये हैं। अब लोगों का परिवार केवल 3-4 लोगों में सिमट कर रह गया है। पूरे परिवार के साथ रहने के बजाय लोग अकेले रहना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। पहले संयुक्त परिवार होते थे जहां कई लोग एक साथ रहते थे लेकिन अब संयुक्त परिवार टूटकर एकल हो रहे हैं।



महिलाओं का मॉडर्न होना -
भारत में महिलाओं की स्थिति बहुत सुधर गई है। पुरुषों की तुलना में महिलाएं हर जगह आगे बढ रही हैं। मेट्रो सिटीज में लडकियां अब अकेली रहती हैं और अपने संबंधों का विकास खुद करती हैं। पहले लडकियां घरवालों के इशारों पर चलती थीं लेकिन यह सोच बदली है और लडकियां अपने सारे निर्णय खुद लेती हैं।



शादी केवल समझौता नहीं-
पहले घरवाले जिससे भी शादी तय करते लडका-लडकी आसानी से उनकी आज्ञा को मान लेते थे, जो कि एक समझौता होता था। लेकिन अब विवाह के मायने बदले हैं। अरेंज से ज्यादा लव मैरेज का चलन बढा है। जिसके साथ पूरी जिंदगी बितानी है उसके बारे में अच्छें से जानने पर बाद में ज्यादा परेशानी नहीं होती। अगर शादी-शुदा जिंदगी अच्छे से नहीं चल रही है तो तलाक लेकर दूसरा पार्टनर बनाने के लिए समाज में भी मान्यता मिली है।


भारत में संबंधों के बदलाव में सबसे अहम किरदार पश्चिमी सभ्यता का है। लोगों के विचारों में खुलापन आया है लेकिन अभी भी कई इलाके ऐसे हैं जहां जागरुकता के अभाव में संबंधों के मायने बदले ही नहीं हैं। संबंधों का मतलब केवल परंपरा का निर्वहन करना ही रह गया है।

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