कोलोरेक्टल कैंसर का पूर्वानुमान

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 17, 2013
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कोलोरेक्‍टल कैंसर का पूर्वानुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 6% कोलोरेक्टल कैंसर पैतृक या वंश से मिले जीन की तेजी से होने वाली उत्पत्ति के कारण होते हैं।

colorectal cancer ka porvanumaanसमस्त कोलोरेक्टल कैंसरों के दो तिहाई से ज्यादा मामलों में लाइफ स्टाइल और खानपान के कारक उत्तरदायी होते हैं। ऐसे परिवारों में भी लाइफ स्टाइल और माहौल-परिवेश का रोल देखा गया है जिनको इस रोग के जींस वंशानुगत मिलते हैं। कोलोरेक्टल कैंसर प्रायः धीरे-धीरे 10 से 15 वर्षों में विकसित होता है। टयूमर आदर्श रूप से कैंसर रहित उतकों के पैदा होने से शुरू होता है। यह बड़ी आंत के अन्तिम भाग के अन्दर की ओर विकसित ऊतक होता है और पिफर कैंसर बन सकता है।

 

[इसे भी पढ़ें : कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव]

 
निश्चित प्रकार के उतक जो एडिनोमेटस पोलिप्स या एडिनोमस हलाते हैं, कैंसर बन जाने की सम्भावना रखते हैं। यद्यपि दस प्रतिशत से कम एडिनोमस कैंसर बनाने की ओर प्रगति करते हैं।
 
भारत में होने वाले समस्त कैंसर रोगों में लगभग 4.7% कोलोरेक्टल कैंसर के मामले होते हैं और स्त्री और पुरूष दोनों में होने वाले कैंसर रोगों में इसका छठा रैंक है।

 

कोलोरेक्‍टल कैंसर का पूर्वानुमान लगाने के उपाय


बढ़ती उम्र
उम्र के साथ कोलोरेक्टल कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ता है। अधिकांश मामलों में कैंसर 60 साल के बाद होता है। इससे आप इसका पूर्वानुमान लगा सकते हैं

 

[इसे भी पढ़ें : कोलोरेक्टल कैंसर का निदान]

 

कैंसर का इतिहास

कैंसर के इतिहास के साथ भी आप इसका पूर्वानुमान लगा सकते है। जिन व्यक्तियों में, पहले से ही निदान किया गया उन लोगों में भविष्य में कोलोरेक्‍टल के विकास के लिए खतरा होता है। साथ ही जिन महिलाओं में अंडाशय, गर्भाशय या स्तन का कैंसर हुआ हो, उनमें कोलोरेक्टल कैंसर विकसित होने का अधिक खतरा होता है।

धूम्रपान
धूम्रपान करने वाले विशेष रूप से धूम्रपान करने वाली महिलाओं में अन्‍य महिलाओं की अपेक्षा कोलोरेक्टल कैंसर होने की अधिक संभावना होती है। इससे इसका पूर्वानुमान लगाया जा सकता हैं।

 

आहार
आहार से भी कोलोरेक्‍टल कैंसर का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। जो आहार में उच्च मात्रा में लाल मांस और निम्न मात्रा में ताजे फल, सब्जियां लेते है उनमें कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। भोजन में उच्च मात्रा में लाल मांस, फाइबर में कमी, कोलोरेक्टल कैंसर के बढ़ते खतरे के साथ जुड़े हुए हैं।

 

[इसे भी पढ़ें : कोलोरेक्टल कैंसर से चिकित्सा]

 

शारीरिक निष्क्रियता
जो लोग शारीरिक काम कम करते है उन लोगों में कोलोरेक्टल कैंसर विकसित होने का खतरा ज्‍यादा होता है। शारीरिक निष्क्रियता से भी इसका पूर्वानुमान लगाया जा सकता हैं।

 

कोलोरेक्‍टल कैंसर के इन सब लक्षणों से इसका पूर्वानुमान लगाया जा सकता हैं।

 

 

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