कोलाजन फिलर्स

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 01, 2013

कोलेजेन फिलर्स या इंजेक्शन्स को सॉफ्ट-टिश्यु ऑगमेंटेशन के रूप में भी जाना जाता है। इसे त्वचा को मुलायम बनाने के लिये किया जाता है। यह प्रक्रिया रिंकल्स, फाइन लाइन्स, त्वचा डिप्रेसन्स तथा दाग आदि को ठीक करती है। कोलेजेन फिलर्स को पतले होंठों को मोटा बनाने के लिये भी प्रयोग किया जाता है। शरीर के लिये कोलेजेन का प्राकृतिक रूप से बनना इसे कॉस्मेटिक उद्देश्यों के लिये बेस्ट फिलर बनाता है क्योंकि शरीर इसे ज़्यादा सहजता से स्वीकार कर लेता है और जोखिम बहुत कम रहते हैं। अन्य पदार्थ भी हैं जिनको डॉक्टरों द्वारा इंजेक्टेबल फिलर्स के रूप में उपयोग किया जाता है।

इस प्रक्रिया के दौरान जिस हिस्से को कॉस्मेटिक उद्देश्य के लिये बढ़ाया जाना है उस पर कोई सुन्न करने वाला पदार्थ लगाकर या लोकल एनेस्थेसिया की छोटी खुराक से सुन्न किया जाता है। इसके बाद इंजेक्टेबल फिलर्स को त्वचा के उस हिस्से में इंजेक्ट किया जाता है जिसे बढ़ाया या उभारा जाना है। इंजेक्शनों में कुछ मिनट लगते हैं लेकिन कुछ रिंकल्स या छिपे हुए दागों के कारण कई इंजेक्शनों की ज़रूरत हो सकती है जो कि उस दशा पर निर्भर होते हैं जिसे निर्धारित ट्रीटमेंट कोर्स के ज़रिये ट्रीट किया जाना हो। अपनी अपेक्षाओं को अपने डॉक्टर से बतायें जिससे आपको इस बारे में बेहतर सुझाव मिल सकेंगे कि आपको कितने अधिक ट्रीटमेंट्स की ज़रूरत होगी क्योकि दशा की गंभीरता के अनुसार अनेक इंजेक्शनों की ज़रूरत हो सकती है।

ट्रीटमेंट के बाद कुछ सतही धूमिलता का अनुभव हो सकता है जिसके अलावा ट्रीटेड हिस्से में सूजन, लालिमा और नाजुकपन का अहसास भी हो सकता है। इनमें से ज़्यादातर समस्याएं कुछ घंटों या कुछ दिनों में खत्म हो जाती हैं और जल्दी ही सुधार दिखने लगता है।

 

पोटेंशियल कस्टमर


ऐसे लोग जिनमें नीचे दी गयी त्वचा समस्याएं हों वे इंजेक्टेबल फिलर्स के ट्रीटमेंट की चाह कर सकते हैं। यह एक कॉस्मेटिक प्रक्रिया है जो नीचे दी गयी त्वचा समस्याओं को अस्थायी रूप से ट्रीट करके केवल त्वचा की दिखावट को सुधारती हैः

  • फेशियल क्रीजेज या रिंकल्स।
  • दाग।
  • पतले होंठों को मोटा बनाना।
  • चेहरे के हल्के नाक नक्श।
  • शिथिल (सैगिंग) त्वचा।

 

जोखिम


कोलेजेन या इंजेक्टेबल फिलर्स एक नॉन-इन्वेसिव प्रक्रिया है और यदि सुयोग्य तथा अनुभवी डॉक्टर से करायी जाये तो इसके जोखिम काफी कम होते हैं और उत्पन्न हो सकने वाली कोई समस्या शायद ही कभी सीरियस होती है।

  • एलर्जीः कोलेजेन के अलावा अन्य सिंथेटिक फिलर्स उपयोग किये जाने पर एलर्जी का खतरा सबसे ज़्यादा होता है लेकिन यदि एलर्जी टेस्ट कर लिया गया है और यह क्लीयर है तो इससे संबंधित कोई समस्या नहीं उत्पन्न होती। पदार्थ के प्रति त्वचा की सेंसेविटी जांचने के लिये डॉक्टर एक महीने से कम समय पहले एक त्वचा टेस्ट करते हैं।
  • इंफैक्शन।
  • सूजन।
  • खुले हुए जख्म।
  • त्वचा सतह की पीलिंग।
  • उभरे हुए दाने आदि बनना।
  • दाग रह जाना।

ऊपर बताये गये जोखिम केवल तभी उत्पन्न होते हैं जब इस प्रक्रिया को किसी अकुशल डॉक्टर द्वारा किया जाता है।

 

पूर्व सावधानियां


चूंकि विभिन्न सिंथेटिक फिलर्स का उपयोग इंजेक्टेबल फिलर्स के तौर पर किया जाता है और यहां तक कि बोवाइन कोलेजेन भी उपयोग किया जाता है इसलिये कुछ मेडिकल कंडीशन्स वाले लोग इनके प्रति ठीक रिएक्ट नहीं करते। ऑटोइम्यून बीमारियों वाले या हर्पीज हिस्ट्री वाले लोगों को यह प्रक्रिया नहीं करानी चाहिये। गर्भवती या दूध पिलाने वाली महिलाओं के लिये भी इन प्रक्रियाओं की सिफारिश नहीं की जाती है।


ऑफ्टर केयर


प्रक्रिया के बाद कुछ लालिमा, सूजन और नाजुकपन दिखाई पड़ता है। ट्रीटेड हिस्से को अगले कुछ घंटों तक छुएं नहीं। त्वचा पर से सूजन और लालिमा खत्म हो जाने तक ज़्यादा गर्म तापमान में एक्सपोजर व सन एक्सपोजर से बचें। कुछ दवायें जैसे कि एस्पिरिन आदि ट्रीटेड हिस्से में जलन बढ़ा सकती हैं। यदि लक्षण एक हफ्ते से अधिक वक्त तक बने रहें तो अपने डॉक्टर से सलाह लें।

 

 

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