कंगारू देखभाल क्‍या है

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 09, 2014
Quick Bites

  • कंगारू देखभाल से बच्‍चे को सही मात्रा में ऑक्‍सीजन मिलती है।
  • प्री-टर्म शिशुओं की देखभाल के लिए इसे विकसित किया गया।
  • कंगारू देखभाल माता या पिता के द्वारा प्रदान की जा सकती है।
  • ठंड के मौसम में हमेशा बच्चे के पैर, हाथ और सिर को ढके।

कंगारू देखभाल से न सिर्फ बच्‍चे को सही मात्रा में ऑक्‍सीजन मिलती है, बल्कि उसका विकास भी तेजी से होता है। हालांकि इसे करते समय कई सावधानियां भी बरतनी चाहिए। आइये जाने कंगारू देखभाल क्या है।

Kangaroo Care For Children

 

कहते हैं कि प्रकृति से जीवन जीने के सारे तरीके सीखे जा सकते हैं, और ये बात सच भी है। जीवन की हर छोटी बड़ी जिम्मेदारी को निभाने का तरीका हो या किसी समस्या से पार पाने की युक्ति, प्रकृति की कोई न कोई चीज हमें इन सबसे निपटने की प्रेरणा देती है। फिर शिशु के लालन-पालन को ही ले लीजिए। कंगारू नामक जीव हमें शिशु की देखभाल का नायाब नुस्खा सुझाता है। इससे प्रेरित होकर शुरू हुई कंगारू देखभाल।

 

कंगारू देखभाल एक ऐसी तकनीक है जो खास करके नवजात (आमतौर पर 'प्री-टर्म') शिशुओं की देखभाल के लिए उपयोग की जाती है। इस तकनीक में शिशु को, एक वयस्क (अधिकांशतः माता या पिता) के साथ - त्वचा से त्वचा का संपर्क करा कर की जाती है। प्री-टर्म शिशुओं के लिए रोज कुछ घंटो के लिए कंगारू देखभाल की जाती है। लेकिन जब वे मेडिकल तौर पर सामान्य हो जाते हैं, तो इस तकनीक का समय बढ़ाया भी जा सकता है।

 

कंगारू देखभाल, नाम उन जानवारों से प्रेरित होकर दिया गया है, जो अपने शिशुओं को अंग से लगाकर पकड़े रखते हैं। इस तकनीक को उन प्री-टर्म शिशुओं के लिए विकसित किया गया, जो उन क्षेत्रों में जन्मे लिए थे, जहां इन्क्यूबेटर उपलब्ध नहीं थे या जहां लोग मेडिकल साइंस पर उतना विश्वास नहीं करते थे।

 

कंगारू देखभाल क्या है?

नवजात और उसके माता पिता के बीच त्वचा से त्वचा के संपर्क को कंगारू देखभाल कहते है। कंगारू देखभाल माता या पिता के द्वारा प्रदान की जा सकती है। इसमें निर्वस्त्र शिशु को, माता पिता के नंगे सीने से लगाकर पकड़ा जाता है। बच्चे को इस तरह से एक दिन में लगभग चार घंटे, प्रत्येक बार 20 से 25 मिनट के लिए पकडा जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान, बच्चे की पीठ को एक कंबल या माता पिता के कपड़े से ढका जाना चाहिए। यह काफी कुछ कंगारू थैली के समान होता है, इसलिए ही इसे कंगारू देखभाल कहा जाता है।

 

माता पिता के इस तरह से बच्चों को पकड़ने के दौरान, बच्चें कुछ ही मिनटों के भीतर सो जाते हैं और अपने माता-पिता के नजदिक सोने से उनके शरीर का तापमान भी उचित बना रहता है। कंगारू देखभाल, बच्चों को तेजी से विकसित होने में मदद करती है। इस तकनीक से ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखने के साथ ही बच्चे को स्तनपान करने में भी मदद मिलती है।

 

कंगारू देखभाल महत्वपूर्ण क्यों है?

कंगारू देखभाल शिशु के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है, खासतौर पर प्री-टर्म' बच्चों के लिए। यह बच्चे की हृदय गति को सामान्य रखता है। वे माता पिता जो अपने बच्चों को कंगारू देखभाल प्रदान करते हैं, उनके बच्चे बेहतर नींद ले पाते हैं। ऐसे बच्चे स्वस्थ और खुश रहते हैं। उनके सांस लेने का पैटर्न भी  सामान्य होता है। और यह माता पिता और शिशु में मजबूत बंधन निर्मित करता है। माता पिता के दिल की धड़कन सुनने से शिशुओं को आराम महसूस होता है।

 

वे शिशु जिनका वजन कम होता है या वे बच्चे जो किसी भी कारणवश अपनी मां से अलग हो जाते हैं, उनको कंगारू देखभाल दी जाती है।

माता पिता भी कंगारू देखभाल के साथ अपने बच्चों से निकटता और अनुबंध को महसुस करते है। यह एक विश्वास भी बढाता है कि बच्चों की देखभाल हो रही है। कंगारू देखभाल पिता द्वारा भी दिया जा सकती है।

 

बच्चे को हर समय ढक कर रखने का महत्व

नवजात शिशुओं के शरीर को गर्म रखना चाहिये। इसलिये अस्पताल में भी उनको कपडे में लपेट कर रखा जाता है। नवजात शिशु वातावरण के साथ अपने शरीर के तापमान को समायोजित नहीं कर सकते इसलिए उनको हर समय ढक कर रखा जाना चाहिए।

अपने बच्चे को आरामदायक कपड़े के साथ हर समय ढक कर रखे, क्योंकि बदलते तापमान आपके बच्चे के लिए हानिकारक हो सकता है। सूर्य की तेज किरणें या बदलता तापमान बच्चे को प्रभावित ना कर सके इसलिये चाहे आप अस्पताल में हो या घर पर, अपने बच्चे को ढक कर रखे। ठंड के मौसम में, हमेशा बच्चे के पैर, हाथ और सिर को ढके। तापमान में किसी भी तरह का परिवर्तन आपके बच्चे को प्रभावित कर सकता है।

 

जब आप अपने बच्चे को कंगारू देखभाल दे रहे होते है, तब कमरे का तापमान सामान्य रहना चाहिये इसके बारे में सावधान रहें।

 

 

 

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