एंटीसोशल पर्सनालिटी डिसार्डर से बचाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 29, 2013

झगड़ते हुए महिला और पिरुषएंटीसोशल पर्सनेलिटी डिसऑर्डर के मरीजों को आपके तिरस्‍कार की नहीं, बल्कि चिकित्‍सीय मदद की जरूरत होती है। अगर किसी व्‍यक्ति में इस बीमारी के लक्षण जैसे दूसरों को दुख पहुंचाना,  स्‍वभाव में हमेशा चिड़चिड़ापन रहना,  दूसरों के अधिकारों की भी परवाह न करना,  दूसरों के साथ घनिष्‍ठ संबंध ना रखना, स्‍वार्थी  होना व दूसरों को अपमानित व तिरस्कृत करना, अल्कोहल और कई प्रकार के मूड और एनेक्जायटी डिस्‍ऑर्डर दिखना आदि लक्षण दिखने लगें तो किसी मनोचिकित्सक को अवश्य दिखलाना चाहिए।


अवसादग्रस्तता विकार, मादक द्रव्यों से संबंधित विकार, सोमातिजेशन विकार ,रोग जुआ (और अन्य आवेग नियंत्रण विकार),  अन्य व्यक्तित्व विकार (विशेष रूप से, सीमा अभिनय, और आत्मकामी) अक्सर इस विकार के साथ होते हैं. अतः यह कोई एक बीमारी नहीं है। इसका कोई सटीक इलाज कर देना संभव नहीं। बहतर होगा की प्रारंभिक अवस्था में इसे पता करने की कोशिस की जाये और इसके कारकों पर प्रारंभ में ही नियंत्रण किया जाए।


बचपन में अभिभावकों की ओर से उपेक्षा का शिकार रहे बच्‍चों में यह प्रवृति अधिक पाई जाती है। उस समाज में भी इस तरह के लोग अधिक होते हैं, जहां मुश्किलों में उनकी सहायता करने वाला कोई नहीं होता। या जहां अच्‍छा व्‍यवहार करना कमजोरी माना जाता है। ऐसे में शुरुआत से ही इस बीमारी के लक्षण पकड़ में आते ही उसका निदान करना प्रारंभ कर देना चाहिए।


हालांकि इस रोग से बचाव का कोई प्रमाणिक उपाय नहीं है। किन्तु व्यक्ति के सामाजिक वातावरण में सुधार से समस्या की गंभीरता में कमी लाई  जा सकती है। खासकर अगर ये सुधार जीवन के शुरुआती दौर में हो। इस तरह की किसी भी समस्या में डॉक्टर से भी अवश्य मिलना चहिये।

 

 

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