आत्महत्या या खुद को घात पहुंचाना

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 19, 2011
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Woman suicideआत्महत्या या खुद को घात पहुंचाना निराशा का सबसे विकट रूप है। वो लोग जो आत्महत्या करने की सोचते हैं वो बहुत ही निराशावादी होते है और परिस्थितियों के आगे बहुत ही जल्दी घुटने टेक देते हैं। बहुत से लोगों के लिए आत्महत्या हर परेशानी का सरल समाधान होती है। पुरूषों की तुलना में महिलाएं आत्महत्या के बारे में ज़्यादा सोचती हैं। पुरूष अकसर आत्महत्या कर मौत को गले लगाते हैं।


युनाइटेड स्टेट में अधिक उम्र के युवाओं में आत्महत्या करने का ज़्यादा खतरा रहता है। कम उम्र के बच्चों और युवाओं में आत्महत्या के केसेज़ कम हुए है लेकिन उनमें भी आत्महत्या एक परेशानी का विषय बना हुआ है।


आत्महत्या डीप्रेशन और इम्पल्सिव बिहेवियर से जुड़ा हुआ है। लम्बे समय तक रहने वाला डीप्रेशन भी आत्महत्या का कारक हो सकता है। इनके अलावा कई और ऐसे कारण हैं जिनसे कि व्यक्ति आत्महत्या करने के बारे में सोचता है।


जैसे मानसिक अस्वस्थता बार्डर लाइन पर्सनालिटी डिज़ार्डर, क्रोनिक या शारीरिक अस्वस्थता और वातावरण भी एक कारण हो सकता है    । कभी कभी साइकालाजिकल डिज़ार्डर जैसे बार्डर लाइन पर्सनालिटी डिज़ार्डर जैसी बीमारियों से भी आत्महत्या का खतरा बढ़ जाता है।


अगर आपके दिमाग में सेरोटोनिन का लेवल कम है तो भी आपके दिमाग में आत्महत्या करने का ख्याल आ सकता है क्योंकि सेरोटोनिन के लेवल के कम होने से डीप्रेशन और आत्महत्या की प्रवृत्ति दोनों की ही सम्भावना रहती है। अगर आपके परिवार में किसी ने पहले अत्महत्या की है तो भी आपमें आत्महत्या करने की सम्भावना बढ़ जाती है। ज़्यादातर लोग जो आत्महत्या करते हैं उनके आसपास वालों को उनके लक्षणों से इस बात का अन्दाज़ा लग जाता है। यह लक्षण डीप्रेशन जैसे ही होते हैं जैसे किसी भी काम में मन ना लगना। अपनी हाबी में भी मन ना लगना। अत्यधिक निराशावादी होना और अपने पसन्द के कामों मे भी आनन्द ना ले पाना।

 

  • आत्महत्या का अगर किसी निश्चित जगह और समय पर प्लान किया गया है तो ऐसी स्थिति में आत्महत्या का पूरा पूरा खतरा रहता है। आत्महत्या  से बचने के लिए लोगों को जागरूक करना बहुत ज़रूरी है और उन्हें आत्महत्या के लक्षणों को बचाना भी ज़रूरी है।
  • शारीरिक और मानसिक इवैलुएशन से ऐसे लक्षणों को पहचाना जा सकता है। ऐसी स्थितियों से बचने के लिए एण्टी डीप्रेसेंट और साइकोथेरेपी की मदद लेनी पड़ती है।
  • कुछ मुश्किल परिस्थितियों में इलैक्ट्रोकन्वल्सिव थेरेपी की भी मदद ली जाती है।
  • आत्महत्या करने की सोच रखने वालों के दोस्तों और परिवारजनों को उन्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। इस बीमारी से बचने के लिए फीज़िशियन ,मेन्टल हैल्थ प्रोवाइडर, हास्पिटल इमरजेंसी रूम या इमरजेंसी सर्विसेज़ देनी चाहिए।
  • कभी कभी लगातार साइकैट्रिस्ट के सम्पर्क में रहना भी ज़रूरी हो जाता है। वो लोग जो आत्महत्या के विचारों से भरे होते हैं उनपर व्यवहार का भी बहुत प्रभाव पड़ता है। उनके बचाव के लिए सेफटी प्लान बनाना पड़ता है और उन्हें शराब या धूम्रपान जैसी चीजों से बचाकर उनमें आत्मविश्वास की भावना और पौज़िटिव सोच विकसित करनी होती है।
  • कोई भी व्यक्ति जो आत्मविश्वास के बारे में सोचता है और उससे बचने के विकल्प चाहता है वो लोकल या नेशनल सुसाइड प्रिवेंशन के नम्बर पर भी सम्पर्क कर सकता है।

 

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