अस्‍थमा के लक्षणों को जानकर कम करें इसके दुष्‍प्रभाव

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 06, 2013
Quick Bites

  • अस्‍थमा में व्‍यक्ति को सांस लेने में होती है परेशानी।
  • आमतौर पर रात को पड़ते हैं अस्‍थमा के अटैक।
  • सर्दी के दिनों में समस्‍या अधिक होती है।
  • लगातार छींक आती है अस्‍थमा अटैक्‍ के दौरान।

कुछ लोगों में पुरानी खांसी ही दमा का मुख्य कारण है। कुछ लोगों में व्यायाम के बाद लक्षण बढ़ जाते है कई बार दमा के दौरे के समय हलके या गम्भीर लक्षणों का पता नहीं लगता । दमा के साथ गम्भीर लक्षण आते हैं जब एक उपरी श्वसन संक्रमन हो जाने से जैसे फ्लू या सर्दी ।


दमा का कोई स्थाई इलाज नहीं होता। हालांकि इस पर नियंत्रण जरूर किया जा सकता है। इस रोग को नियंत्रित कर मरीज सामान्‍य जीवन व्‍यतीत कर सकता है। जब तक आप जरूरी सावधानियां बरतते हैं, तब तक इस रोग को नियंत्रित किया जा सकता है।

asthma symptoms in hindi

अस्‍थमा के लक्षण

अस्‍थमा के लक्षण व्‍यक्ति के अनुसार बदलते रहते हैं। यूं तो इस बीमारी के कई लक्षण ऐसे होते हैं, जो श्‍वास संबंधी अन्‍य बीमारियों के भी लक्षण होते हैं। इन लक्षणों को अस्‍थमा के अटैक के रूप में पहचाना जाना जरूरी होता है। दमा पीडि़त व्‍यक्ति को सांस लेने अैर छोड़ने में बहुत अधिक जोर लगाना पड़ता है। जब रोगी के शरीर के फेफड़ों की नलियों (जो वायु का बहाव करती हैं) की छोटी-छोटी तन्तुओं (पेशियों) में अकड़न युक्त संकोचन उत्पन्न होता है, तो फेफड़ा वायु (श्वास) की पूरी खुराक को अन्दर पचा नहीं पाता है।

इससे पीडि़त पूरा सांस अंदर खींचे बिना ही बाहर छोड़ने पर विवश हो जाता है। इसी समस्‍या को दमा, अस्‍थमा या श्‍वास रोग कहा जाता है। कई बार हालात बहुत खराब हो जाती है क्‍योंकि व्‍यक्ति को सांस भीतर लेने में तो परेशानी होती ही है साथ ही सांस बाहर छोड़ने में उसे अधिक समय लगता है। इसके साथ ही इस प्रकिया में सीटी की आवाज भी सुनाई देती है।

जब अस्‍थमा का दौरा पड़ता है तो व्‍यक्ति छटपटाने लगता है। ऑक्‍सीजन के अभाव के कारण उसका चेहरा नीला हो जाता है। अस्‍थमा किसी को भी हो सकता है। दौरे के दौरान रोगी को सूखी और ऐंठनदार खांसी होती है। रोगी बलगम निकालने की कितनी ही कोशिश करे, बलगम बाहर निकलती ही नहीं है। व्‍यक्ति को रात में खासकर सोते समय अधिक परेशानी होती है।

 

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दमे के लक्षण

 

  • शुरुआती समय में खांसी, सरसराहट और सांस उखड़ने के दौरे हैं इसके सामान्‍य लक्षण।
  • रोगी को सख्त, बदबूदार तथा डोरीदार कफ निकलने की शिकायत होती है।
  • यूं तो दौरे कभी भी पड़ सकते हैं, लेकिन रात को दो बजे के बाद अधिक होती है आशंका।
  • लगातार छींक आती रहती है।
  • लगातार खांसी होती है फिर चाहे व बलगम के साथ हो या उसके बगैर। 
  • सांस फूलना, जो व्यायाम या किसी गतिविधि के साथ तेज होती है
  • दमा रोगी को सांस लेनें में बहुत अधिक परेशानी होती है।
  • दमा का दौरा आमतौर पर अचानक शुरू होता है।
  • सांस लेते समय अधिक जोर लगाने पर रोगी का चेहरा लाल हो जाता है।
  • ठंड के समय या फिर व्‍यायाम करने पर इसके असर तेज होता है। साथ ही गर्मी में भी अस्‍थमा का दौरा अधिक पड़ता है।
  • रात या सुबह-सुबह बहुत तेज होता है।
  • दवाओं के उपयोग से अस्‍थमा को नियंत्रित किया जा सकता है। दवायें श्‍वास नलिकाओं को खोलने का काम करती हैं।
  • शरीर के अंदर खिंचाव (सांस लेने के साथ रीढ़ के पास त्वचा का खिंचाव)

 

 

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