अकेले रहने वाले लोगों में डिप्रेशन का खतरा

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 14, 2012

Akele rahne wale logo me depression ka khatra

एक अध्ययन के अनुसार वे लोग जो अकेले रहते हैं, उनमें परिवार के साथ रह रहे लोगों की तुलना में डिप्रेशन में जाने का खतरा ज्यादा होता है। वास्तव में कामकाजी लोग जो अकेले रहते हैं उनमें डिप्रेशन विकसित होने का खतरा 80 % बढ जाता है। अध्ययन के अनुसार, कामकाजी पुरूषों और महिलाओं के बीच में डिप्रेशन का प्राथमिक कारक सामाजिक समर्थन प्रणाली की कमी पुरूषों में और महिलाओं में घर की खराब स्थिति है।  

यह अध्ययन 3500 पुरूषों और महिलाओं पर नजर रखकर एण्टी डिप्रेसेंट का प्रयोग करके किया गया। जो लोग अकेले या किसी के साथ रहते थे उनपर 2000 में सर्वे किया गया और उनके रहन-सहन की स्थिति के बारे में पूछताछ की गई। इसके अलावा उन लोगों के बारे में जलवायु, जीवनशैली, सामाजिक समर्थन, कर्मचारी की स्थिति, आय और अन्य जानकारी भी जुटाई गई। अध्ययन करने वाले लेखक ने पाया कि अकेले रहने वाले व्यक्ति के घर में विकास हुआ है। अवसादरोधी के सेवन करने वालों का विश्लेषण करने के पीरियड में यह पाया कि जो लोग अकेले रहते हैं उनमें 80% लोगों ने एण्टी डिप्रेसेंट दवाईयां ज्यादा खरीदी हैं उन लोगों की तुलना में जो अकेले नहीं रहते हैं।

यह अध्ययन डा पुलक्की रेबेक के नेतृत्व में हुआ, उन्होंने कहा कि दिमागी समस्याओं का खतरा अकेले रहने वाले लोगों में ज्यादा होता है। शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि अकेले रहने वाले लोगों में डिप्रेशन एकांत में रहने के कारण होता है। शोधकर्ताओं के अनुसार जो लोग अकेले रहते हैं उनके जज्बातों के लिए भावनात्मक सहारा या समाजिक एकता की भावना नहीं होती है और इसकी वजह से गंभीर दिमागी बीमारी होती है।  

अध्ययन में यह समाधान निकाला गया कि जो लोग अकेले रहते हैं उनको अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए लोगों से मिलना चाहिए और नयी संस्कृति और सामाजिक परिवेश को जानने के लिए एक मंच होना चाहिए। इसके अलावा अध्ययन में यह उजागर हुआ कि जो लोग अकेले रहते हैं उनके उचित इलाज के लिए बातचीत ही बेहतर थेरेपी है। क्योंकि एण्टी डिप्रेसेंट (anti-depressants) का साइड-इफेक्ट लंबे समय तक के लिए हो सकता है।

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