युवाओं के लिए कामसूत्र की प्रासंगिकता

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 24, 2013
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कामसूत्र महर्षि वात्‍स्‍यायन द्वारा रचित ऐतिहासिक ग्रंथ है। यौन संबंधों पर लिखी गई शायद यह विश्व की पहली पुस्‍तक है। जिसे ईसा की तीसरी शताब्‍दी के मध्‍य में लिखा गया। इस ग्रंथ में यौन प्रेम के सभी सिद्धांतों का वर्णन किया गया है। आज भी जहां बड़े पैमाने पर सेक्‍स को लेकर समाज में संकोच का भाव व्‍याप्‍त है, इस किताब में इस पर न सिर्फ खुलकर चर्चा की गयी है, बल्कि इसके महत्‍व पर भी प्रकाश डाला गया है। लेकिन, समाज बदल रहा है। युवा पीढ़ी सेक्‍स को लेकर पुरातन सोच को द‍रकिनार कर रही है।

yuvao ke liye kamasutra ki prasangikataवात्‍स्‍यायन द्वारा रचित कामसूत्र में सेक्‍स के अलावा जीवनशैली के सभी पहलुओं के बारे में विस्‍तार से वर्णन किया गया है। जिसका जाने-अनजाने अनुसरण आज भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। कामसूत्र को लेकर लोगों के मन में यह संदेह है कि यह पूरी किताब केवल और केवल सेक्‍स पर आधारित है, लेकिन वा‍स्‍तविकता इससे काफी अलग है। यह सब भ्रांतियां इसलिए भी है क्‍योंकि कामसूत्र के बारे में लोग अधिक नहीं जानते और न ही इस पर अधिक चर्चा ही की जाती है।

कामसूत्र को वात्‍स्‍यायन ने 7 अध्‍यायों में बांटा है। इसमें आदमी के जीवन के लक्ष्‍यों और कर्तव्‍यों के बारे में बताया गया है। मनुष्‍य किस प्रकार अपने जीवन को सुखी और सामान्‍य बना सकता है, इस पर कामसूत्र विस्‍तार से बताता है। मनुष्‍य का आचरण और व्‍यवहार कैसा होना चाहिए, किस तरह से रति-क्रीड़ा करनी चाहिए आदि का वर्णन इस ग्रंथ में है। आधुनिक जीवन में भी यह युवाओं के लिए प्रासंगिक और फायदेमंद है।

 

[इसे भी पढ़ें : कामसूत्र है प्रेम का आधार]

 

कामसूत्र और युवा

कामसूत्र की प्रासंगिकता तो हर समय बनी रहेगी। युवा पीढ़ी न केवल सेक्‍स पर बात करने को लेकर अधिक मुखर हो रही है, वहीं वह इससे जुड़ी रुढि़वादी सोच को भी छोड़ रही है। युवा सेक्‍स को केवल अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने भर का जरिया नहीं मानते हैं, बल्कि वे इसका भरपूर आनंद उठाते हैं। उन्‍हें सेक्‍स को लेकर नए-नए प्रयोग करने से भी गुरेज नहीं है। वे सेक्‍स को लेकर पहले से अधिक स्‍वच्‍छंद सोच रखने लगे हैं। कई सेक्‍स सर्वे लगातार इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि सेक्‍स को लेकर भारत की सोच बदल रही है। युवाओं के लिए अब शादी से पहले सेक्‍स भी गुनाह नहीं है। ऐसे में कामसूत्र की महत्ता और अधिक बढ़ जाती है। कामसूत्र में सुरक्षित सेक्‍स के बारे में भी तफसील से बताया गया है। सेक्‍स करते हुए क्‍या-क्‍या सावधानियां बरती जाएं जिससे कि आप सुरक्षित आनंद उठा सकें, इस पर चर्चा की गयी है।


युवा और सेक्‍स-संबंध

सेक्‍स कई युवाओं के लिए एक खेल की तरह हो गया है। जिसका आनंद दोनों मिलकर उठाते हैं। उनके लिए इस खेल में दोनों विजेता होते हैं। न कोई हारता है और न किसी की जीत होती है। अगर कहीं कोई 'हार' भी जाए तो वह अपनी हार पर भी आनंदित ही होता है। इस खेल की व्‍यावहारिक और उपयोगी नियम-पुस्तिका की तरह ही है कामसूत्र। यह पुस्‍तक उनके लिए बहुत फायदेमंद है क्‍योंकि इसमें संभोग के आयामों जैसे आलिंगन, चुंबन, नाखूनों का इस्तेमाल, दांतों का इस्तेमाल, संभोग काल, ओरल सेक्स, इंटरकोर्स, विपरीत लिंग रति इत्यादि का वर्णन विस्‍तार से है। इन इच्छाओं की पूर्ति के लिए वात्‍स्‍यायन ने 64 सेक्‍स पोजीशंन का भी वर्णन किया।

 

[इसे भी पढ़ें : सात भागों में समाया कामसूत्र का ज्ञान]

 

कामसूत्र के फायदे

आधुनिक समय में युवाओं के बीच कामसूत्र की महत्ता बढ़ी है। पुराने जमाने में लोग कामसूत्र पर चर्चा करने से कतराते थे, लेकिन अब कामसूत्र को सेक्‍स के प्रति शिक्षित करने वाली पुस्‍तक के रूप में देखा जा रहा है। संभोग के 64 आसनों के बारे में अध्‍ययन करने से युवाओं को फायदा होगा और सेक्‍स संबंध बनाते वक्‍त गलतियां नही करेंगे। और सेक्‍स के चरमानंद की वास्‍‍तविक अनुभूति प्राप्‍त कर सकेंगे। कामसूत्र यह ज्ञान देता है कि कैसे एक अच्‍छा सेक्‍स संबंध जीवन पर सकारात्‍मक प्रभाव डालता है। सेक्‍स के दौरान दोनों साथियों की क्‍या भूमिका होनी चाहिए। पुरुष और स्‍त्री को सेक्‍स के दौरान किन बातों पर ध्‍यान रखना चाहिए।  




कामसूत्र में सेक्‍स से संबंधित सभी मुद्दों का वर्णन है इसलिए यह युवाओं के लिए बहुत ही फायदेमंद है। कामसूत्र के बारे में पढ़कर युवाओं को सेक्‍स की सही जानकारी मिलती है।

 

 

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