यूं करें कामसूत्र की शुरुआत

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Apr 24, 2013
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                                                               यूं करें कामसूत्र की शुरुआत

कामसूत्र, सेक्स, यौवन: यह शब्द सुनते ही आम तौर पर लोगों के मन में अजीब विचार आने लग जाते हैं। इसका मुख्य कारण हमरे देश और समाज में सम्भोग व शारीरिक संबंधों के प्रति फैली गलत मानसिकता तथा सही जानकारियों का अभाव होना है। 
वास्तव में प्रेम की उत्पत्ति सिर्फ मन या हृदय में ही नहीं होती शरीर में भी होती है। स्त्री-पुरुष यदि एक दूसरे के शरीर से प्रेम नहीं करते हैं तो मन, हृदय या आत्मा से प्रेम करने का कोई महत्व नहीं। प्रेम की शुरुआत ही शरीर से होती है।और संभोग ही दाम्पत्य सुख-शांति की आधारशिला भी है।

कामसूत्र के बारे में यह कहना गलत नहीं होगा कि यह व्‍यक्ति के सामाजिक और निजी जीवन के हर भाग को समाहित करता है। यह वहां पहुंचता है जहां आमतौर पर व्‍यक्ति की दृष्टि नहीं पहुंचती। यह न केवल काम की बात करता है, बल्कि प्रेम की प्रवृत्ति, परिवार की भूमिका और परिवार की महत्ता आदि के बारे में भी विस्‍तृत चर्चा करता है।

दांपत्य जीवन का प्रारंभ करने वाले सभी लोगों को कामसूत्र को कम से कम एक बार तो अवश्य पढना चाहिए। कामसूत्र महज एक ग्रंथ अथवा सम्भोग पुराण मात्र नहीं है, बल्कि यह गृहस्थ जीवन को सही तरीके से जीने का सलीका भी बताता है। यह बताता है कि किस प्रकार आप अपने साथी के साथ कुछ बातों का खयाल रख नीरस संबंधों को आनंदमय और उत्साहपूर्ण बनाता है। 

सम्भोग से पहले अपने सभी संकोचों और शर्म को दरकिनार कर दें। अपने साथी को भी अच्छा महसूस करने में सहायता करें। फिर अपनी साथी कि पोशाक को आहिस्ता से खोलें और अपने सीधे हाथ से पकड़ते हुए गले से लगायें। अब किसी हलके-फुल्के सामान्य विषय पर चर्चा करना शुरू करें। ध्यान रहे कि चर्चा के लिए कोई गंभीर विषय का चुनाव न करें। यह भी ध्यान रखें कि वार्तालाप में आपके साथी की भी बराबर भागीदारी बनी रहे। 

कुछ आसनों का भी आनंद लें:   

ऐसा माना जाता है कि जब संभोग की चरम अवस्था होती है उस वक्त विचार खो जाते हैं। इस दशा में जो आनंद की अनुभूति होती है वह समाधि के चरम आनंद की एक झलक मात्र है। संभोग के अंतिम क्षण में होश में रहने से ही पता चलता है कि ध्यान क्या है।और निर्विचार हो जाना ही समाधि की ओर रखा गया पहला कदम है। 

यदि आपके योंन जीवन में असंतुष्टि की स्थिति में हो तो संबंधों के ख़राब होने यहाँ तक की टूट जाने की नौबत आ जाती है। इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि आप अपने साथी के साथ खुलकर बात करें और वर्तमान व भविष्य में हो सकने वाली समस्यों से बच सकें। 
 
साथ ही कामसूत्र आपको इस बात की जानकारी देता है की किस तरह आप अपने दांपत्य जीवन में अपने साथी के साथ संबंधों में सामंजस बना कर उसे और अधिक खुशहाल, और रोमांचक बना सकतें हैं। 

कामसूत्र, सेक्स, यौवन: यह शब्द सुनते ही आम तौर पर लोगों के मन में अजीब विचार आने लग जाते हैं। इसका मुख्य कारण हमरे देश और समाज में सम्भोग व शारीरिक संबंधों के प्रति फैली गलत मानसिकता तथा सही जानकारियों का अभाव होना है।

वास्तव में प्रेम की उत्पत्ति सिर्फ मन या हृदय में ही नहीं होती शरीर में भी होती है। स्त्री-पुरुष यदि एक दूसरे के शरीर से प्रेम नहीं करते हैं तो मन, हृदय या आत्मा से प्रेम करने का कोई महत्व नहीं। प्रेम की शुरुआत ही शरीर से होती है।और संभोग ही दाम्पत्य सुख-शांति की आधारशिला भी है।
Kamasutra Beginning Tips


कामसूत्र के बारे में यह कहना गलत नहीं होगा कि यह व्‍यक्ति के सामाजिक और निजी जीवन के हर भाग को समाहित करता है। यह वहां पहुंचता है जहां आमतौर पर व्‍यक्ति की दृष्टि नहीं पहुंचती। यह न केवल काम की बात करता है, बल्कि प्रेम की प्रवृत्ति, परिवार की भूमिका और परिवार की महत्ता आदि के बारे में भी विस्‍तृत चर्चा करता है।

दांपत्य जीवन का प्रारंभ करने वाले सभी लोगों को कामसूत्र को कम से कम एक बार तो अवश्य पढना चाहिए। कामसूत्र महज एक ग्रंथ अथवा सम्भोग पुराण मात्र नहीं है, बल्कि यह गृहस्थ जीवन को सही तरीके से जीने का सलीका भी बताता है। यह बताता है कि किस प्रकार आप अपने साथी के साथ कुछ बातों का खयाल रख नीरस संबंधों को आनंदमय और उत्साहपूर्ण बनाता है।

सम्भोग से पहले अपने सभी संकोचों और शर्म को दरकिनार कर दें। अपने साथी को भी अच्छा महसूस करने में सहायता करें। फिर अपनी साथी कि पोशाक को आहिस्ता से खोलें और अपने सीधे हाथ से पकड़ते हुए गले से लगायें। अब किसी हलके-फुल्के सामान्य विषय पर चर्चा करना शुरू करें। ध्यान रहे कि चर्चा के लिए कोई गंभीर विषय का चुनाव न करें। यह भी ध्यान रखें कि वार्तालाप में आपके साथी की भी बराबर भागीदारी बनी रहे।


Kamasutra Beginning

कुछ आसनों का भी आनंद लें


ऐसा माना जाता है कि जब संभोग की चरम अवस्था होती है उस वक्त विचार खो जाते हैं। इस दशा में जो आनंद की अनुभूति होती है वह समाधि के चरम आनंद की एक झलक मात्र है। संभोग के अंतिम क्षण में होश में रहने से ही पता चलता है कि ध्यान क्या है।और निर्विचार हो जाना ही समाधि की ओर रखा गया पहला कदम है।

यदि आपके योंन जीवन में असंतुष्टि की स्थिति में हो तो संबंधों के ख़राब होने यहाँ तक की टूट जाने की नौबत आ जाती है। इसलिए यह बहुत ज़रूरी है कि आप अपने साथी के साथ खुलकर बात करें और वर्तमान व भविष्य में हो सकने वाली समस्यों से बच सकें।

साथ ही कामसूत्र आपको इस बात की जानकारी देता है की किस तरह आप अपने दांपत्य जीवन में अपने साथी के साथ संबंधों में सामंजस बना कर उसे और अधिक खुशहाल, और रोमांचक बना सकतें हैं।

 

 

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