बच्‍चे के स्‍वास्‍थ्‍य और परवरिश से सम्‍बन्‍धित महत्वपूर्ण बातें

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Aug 24, 2011
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Quick Bites

  • बच्चों को शिड्यूल का पालन कराने से पहले खुद इस अमल करें।
  • जब आपका बच्चा ज़िद करता है तो उसे तर्क देकर प्यार से समझाएं।
  • महत्वपूर्ण विचारनीय बात आपका ख़ुद का स्वभाव और व्यवहार है।
  • बच्चे को अच्छे माहौल में नयी-नयी बातें सिखाते रहना चाहिए।

कोई इंसान बचपन में क्या सीखता है और क्या नहीं सीखता, इसका आगे चलकर उसकी काबिलीयतों पर काफी असर पड़ता है। तो फिर शवाल पैदा होता है कि बच्चों को अपने माता-पिता से क्या चाहिए ताकि वे बड़े होकर समझदार बनें और ज़िंदगी में कामयाब हो सकें? ऐसे ही कुछ अहम सवाल हैं जो हर माता-पिता के झ़हन में आते हैं। तो चलिए आज बच्चों की परवरिश से जुड़े कुछ ऐसे ही सवालों और उनके जवाबों के बारे में जानते हैं।

 

 

 

क्या बच्चों के लिए फैमिली रूटीन महत्वपूर्ण है?

हाँ, प्रत्येक फैमिली का एक रूटीन होनी चाहिए।यह जीवन को व्यवस्थित करने में उनकी मदद करता है।जानिए, जो उनसे उम्मीद है और अराजकता को दूर करे।बच्चे चीज़ों को अच्छे से कर सकते है यदि उनका रूटीन नियमित, पूर्वानुमान और तर्कयुक्त है।यह आरामदेह और प्रभावी दिनचर्य़ा को स्थापित करने में महत्वपूर्ण है।याद रखे कि शिड्यूल का अर्थ विकार और भ्रम के बीच एक सुखद मेल-जोल स्थापित करना होता है।लेकिन वो पूर्ण रूप से कठोर नही होने चाहिए।ताकि बच्चे कोई विकल्प और थोड़ा लचीलापन न दे।अपने बच्चों को उदाहरण द्वारा सिखाए,इस तरह वे सर्व-श्रेष्ठ सीखते है,जब आपको वह यह करते हुए देखते है।

 

 

 

Baby Care

 

 

 

किसी बच्चे के जीवन के शुरुआती कुछ सालों में उनके मस्तिष्क का आकार और उसकी रचना तेज़ी से बढ़ रही होती है, साथ ही उनका दिमाग तरह-तरह के काम करना भी शुरू कर देता है। अगर बच्चे को अच्छे माहौल में नयी-नयी बातें सिखायी जाएं और उनके दिमाग को काम करने के लिए बेहतर बनाया जाए, तो सिनैप्सिस की ज़्यादा कड़ियां बनेंगी और इससे बच्चे के दिमाग़ की कोशिकाओं का एक बड़ा जाल तैयार हो पाएगा। और इसी बड़े जाल की मदद से वे सोचने, सीखने और तर्क करने की काबिलीयत बढ़ा पाएंगे।

 

 

 

बच्चे को शिड्यूल का पालन करना कैसे सीखें

अपने बच्चों कोशिड्यूल का पालन करना सिखाने के लिए सबसे अच्छा तरीका है कि पहले ख़ुद उसका पालन करें और फिर उन्हें पालन करने के लिए कहें। इस तरह से उन्हें संकेत मिलता है कि यह बहुत महत्वपूर्ण और अच्छी आदत है। उन्हें एहसास करायें कि एक बेहतर शिड्यूल उन्हें पूरे दिन का कार्य ठीक प्रकार से करने में मदद करता है। अपने बच्चों की अव्यवस्थता दूर करें और उन्हें प्रसन्न और साकारात्मक रखें, लचीला बनाए और उनके लिए स्कूल से आने के बाद, शाम का और सोने के समय का फ्रैन्डली शिड्यूल बनाएं।

 

 

 

 

ज़िद्दी बच्चो को कैसे संभालें

कुछ सुझाव निम्न प्रकार है जो ज़िद्दी बच्चो को संभालने में आपकी सहायता कर सकते है। 

 

 


  • जब आपका बच्चा ज़िद करता है जो कि निर्रथक है, तो भावनात्मक और स्वाभाविक ढंग से उसे जवाब न दें। उसे सही तर्क और विनम्रता के साथ समझाएं।
  • किसकी निंदा न करें, इसीलिए कि स्वभाव जन्मजात होता है और आपका बच्चा ज़िद्दी या चिड़चिड़ा जानबूझकर नहीं होता है।
  • मुद्दों और समस्याओं की सूचि बनाएं और उन्हीं मुद्दों पर ध्यान दें जोकि अधिक ध्यान देने योग्य हैं। कुछ समस्याओं को अनदेखा किया जा सकता है या सूचि में नीचे रखे। मुद्दों पर ध्यान दे जो समस्याओं का कारण हो सकते है। भविष्य के मुद्दों में तल्लीन न हो।
  • जब आपके बच्चे अच्छे से व्यवहार करे तो उनकी तारीफ करें, ऐसा करके उनके सकारात्मक व्यवहार को सहारा दें। हमेशा आलोचनावादी मत बने, इससे नकारात्मक प्रतिक्रियाएं उत्पन्न होती है।
  • महत्वपूर्ण विचारनीय योग्य बात आपका अपना स्वभाव और व्यवहार है।
  • क्या आप अपने बच्चे के कुछ करने पर दृढता से प्रतिक्रया करते है?क्या आप तुनुकमिजाज और आतुर है?बच्चे माँ-बाप को देखकर काफी कुछ सीखते है तो अपने व्यवहार की समीक्षा करें।

 

 

 

 

Baby Care

 

 

 

यह अच्छा है कि परिवार में से कोई भी अपनी राय दे। लेकिन ध्यान रखे कि परिवार लोक-तंत्र नही है।माँ-बाप को लीडर या तय किये हुए अधिकार होने चाहिए।बच्चे बचपन से ही स्वतंत्र होने आरम्भ कर देते है और अपने निर्णय खुद लेना चाहते है।अपने बच्चों को अधिकार,और विशेषाधिकार दे,उन्हे खासकर बड़े बच्चो को अपने निर्णय खुद लेने दे।लेकिन अपनी अंतिम राय ज़रूर दे।

 

 

 

बच्चे को आने वाले भाई या बहन के लिए कैसे तैयार करें

हाल ही में हुआ शिशु निश्चित रूप से परिवार के लिए खुशी का कारण होता है। लेकिन यह साथ ही साथ सभी बच्चो को एक साथ संभालने में चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है। विभिन्न उम्र के बच्चे नव-शिशु के लिए विभिन्न प्रतिक्रिया रखते हैं। बड़े बच्चे सकारात्मक रूप से प्रतिक्रिया करतें है, या कई बार अपने नये भाई-बहन को लेकर चिंतित भी हो जाते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि आप अपने बच्चों को आने वाले नये शिशु के बारे में ठीक से बताएं और उन्हें मानसिक रूप से इसके लिए तैयार करें। ध्यान रखें कि अपने बच्चे को उस भाषा में समझाये जिसमें वह समझ सके कि एक नये बच्चे के आने का क्या अर्थ होता है। जैसे- 

 

 

  • अपने बच्चो को नव-शिशु के लिए तैयार की जाने वाली चीज़ों के निर्माण में शामिल करे,जैसे शिशु के कमरे,कपड़ो के चुनने में,और डायपर खरीदने में उनकी इच्छा जाने।
  • शिशु के पैदा होने के बाद अपने बच्चे को अस्पताल आने दे।यह सब उसे बढती हुए परिवार का हिस्सा होने का एहसास करायेगा।
  • नये शिशु के घर में आने के बाद,अपने बड़े बच्चे को देखभाल जैसे-डायपर लाना,आपको बुलाना जब वह जाग जाए,ऐसे कामों में उन्हे व्यस्त करे।
  • अपने बड़े बच्चो के साथ अकेले समय बिताने का प्रयास करे,और अपने नये शिशु के जन्म से पहले इस तरह की प्रतिक्रिया दे...

 

 


ध्यान रहे कि जिन बच्चों के दिमाग को उभारने के बजाय, उन्हें अकेला छोड़ दिया जाता है, उनका विकास दूसरों के बनिस्बत कम होता है। इसलिए उनकी सही परवरिश सुनिश्चित करें।

 

 
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