मोतियाबिंद के मरीज ना आजमायें ये योग मुद्राएं

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Jan 12, 2016
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योग के माध्यम से शरीर, मन और मस्तिष्क को पूर्ण रूप से स्वस्थ किया जा सकता है। योग के जरिए न सिर्फ बीमारियों का निदान किया जाता है, बल्कि इसे अपनाकर कई शारीरिक और मानसिक तकलीफों को भी दूर किया जा सकता है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि योग की कुछ खास मुद्राएं मोतियाबिंद से पीड़ि‍त लोगों के लिए कितनी हानिकारक हो सकती है। जीं हां एक नए शोध से यह बात समाने आई है कि मोतियाबिंद से ग्रस्‍त लोगों के लिए योग की कुछ खास मुद्राएं हानिकारक हो सकती हैं।

 

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अमेरिका के न्यूयार्क आई एंड ईयर इनफर्मेटरी ऑफ माउंट सिनाई (एनवाईई) के शोधार्थियों का दावा है कि सिर को नीचे करने की विभिन्न मुद्राएं, पुश अप्स और भारी वजन उठाने जैसी कई योग मुद्राएं मोतियाबिंद के रोगियों में आंखों पर दबाव को बढ़ाती हैं। इनमें अधोमुख स्वानासन, उत्तानासन, हलासन तथा विपरीताकरनी योग की चार मुद्राएं इस अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण साबित रही हैं। इसके द्वारा वैज्ञानिकों को पता चला है कि मोतियाबिंद रोगी के लिए ये मुद्राएं घातक हो सकती हैं।

इस अध्ययन के मुख्य लेखक और एनवाईई के ग्लोकोमा शोध के निदेशक रॉबर्ट रिच ने बताया, चिकित्सकों को सक्रिय और स्वस्थ जीवनशैली के लिए प्रोत्साहित करते वक्त मोतियाबिंद रोगियों को सलाह देने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

मोतियाबिंद रोगियों में ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचने से आंख के अंदर तरल पदार्थ का दबाव बढ़ जाता है। यह एलिवेटड इंट्राकुलर प्रेशर (आईओपी) सबसे आम जोखिम कारक है। रिच बताते हैं कि कई योग मुद्राएं आईओपी के खतरे को बढ़ाती हैं।



Image Source : Getty

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