विश्व अर्थराइटिस दिवस हर वर्ष 12 अक्टूबर को मनाया जाता है। आज इस बीमारी की बढ़ती संख्या लोगों में चिंता का विषय बनी हुई है। विश्व अर्थराइटिस दिवस 2011 का ध्येय है, लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना और अर्थराइटिस के मरीज़ों का समर्थन करना।
भारत में लगभग 15 प्रतिशत लोगों में अर्थराइटिस पाया जाता है। आर्थोनोवा अस्पताल के आर्थोपेडिक सर्जन डाक्टर धनन्जय गुप्ता के अनुसार, आज कम उम्र के लोगों में भी अर्थराइटिस जैसी समस्या आम हो गयी है, जो चिंता का विषय है।
अर्थराइटिस के कारण :
डाक्टर धनन्जय गुप्ता का कहना है कि अर्थराइटिस का मुख्य कारण है, हमारी आरामतलब जीवनशैली, मादक पदार्थों का सेवन और कंप्यूटर के काम। एम्स के पूर्व आर्थेपेडिक सर्जन डाक्टर पी.के दवे के अनुसार जंक फूड का सेवन, व्याहयाम की कमी आदि, इस बीमारी की बढ़ती संख्या का कारण है।
अर्थराइटिस के लक्षण:
गंगाराम अस्पताल के कंसल्टैंट डाक्टर ओ.पी नागी का कहना है कि अर्थराइटिस के खास लक्षण नहीं होते। अर्थराइटिस के अधिकतर प्रकार में जोड़ों में असहनीय दर्द होता है।
अर्थराइटिस से चिकित्सा :
कुछ सामान्य बातों का ध्यान दें और लोगों को अर्थराइटिस के लिए जागरूक करें ।

