ज्यादा खाने से नहीं, बल्कि इन 4 कारणों से बढ़ता है महिलाओं का वजन

By  , ओन्‍ली माई हैल्‍थ सम्पादकीय विभाग
Mar 26, 2018
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Quick Bites

  • खाना ज्यादा खाने से वजन बढ़ना सिर्फ गलतफहमी है।
  • मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है।
  • गर्भनिरोधक के सेवन से महिलाओं का वजन बढ़ता है।

वजन बढ़ने के लिए कई कारण जिम्मेदार माने जाते हैं। जिनमें आनुवांशिक प्रवृत्ति, गर्भावस्था के दौरान कैलरीयुक्त भोजन का अत्यधिक सेवन, बचपन में कैलरी की प्रचुर मात्रा वाले भोजन का अत्यधिक सेवन, एक्सरसाइज की कमी, अत्यधिक स्क्रीन टाइम, मशीनों का अधिक इस्तेमाल और शारीरिक गतिविधियों की कमी के साथ-साथ प्रदूषण और नींद की कमी भी शामिल हैं। वैसे, किसी एक खास कारण के साथ वजन बढऩे का संबंध होना मुश्किल है। वजन बढ़ने या मोटापे को लेकर हुए प्रमुख शोध से कई तरह की बातें झूठ साबित हुई हैं। जो झूठी बातें सामने आई हैं उनमें से कुछ इस प्रकार है-

अतिरिक्त कैलरी चर्बी

यह गलतफहमी है कि खाना ज्यादा खाने से वजन बढ़ता है। खाने से दिनभर में जितनी कैलरी मिलती है, उतनी कैलरी कंज्यूम (बर्न) भी की जानी चाहिए। फिजिकल एक्टिविटी न के बराबर होने पर अतिरिक्त कैलरी चर्बी में बदल जाती है। ऐसे में वजन का बढऩा स्वाभाविक है। हर किसी के लिए सब कुछ खाना जरूरी है। खाने का समय, मात्रा और पैटर्न तय करना महत्वपूर्ण है। स्वस्थ भोजन का नियम हमारे रोजाना के जीवन का हिस्सा होना चाहिए, जिसमें क्या खाएं, कैसे पकाएं, अच्छी क्वालिटी का भोजन और सही पसंद की समझ होना शामिल है। इसमें सफल होने के लिए सही खानपान की आदत पूरे परिवार पर लागू होनी चाहिए न कि सिर्फ उनके लिए, जो मोटापा कम करना चाहते हैं।

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मेनोपॉज भी है कारण

मेनोपॉज स्त्री के जीवन का ऐसा पड़ाव है, जिसके बाद उसे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। आमतौर पर स्त्रियां यह मानती हैं कि मेनोपॉज के कारण उनका वजन बढ़ता है। जबकि ऐसा सोचना गलत है। ऐसा बढ़ती उम्र के कारण होता है। एक अनुमान के मुताबिक 50-60 वर्ष की आयु में लगभग 30 फीसद महिलाएं मोटापे का शिकार हो जाती हैं। मेनोपॉज के दौरान एस्ट्रोजन का स्तर कम होना, बेसल मेटाबॉलिक रेट का कम होना, एक्सरसाइज और एरोबिक क्षमता में कमी वजन बढऩे के प्रमुख कारणों में से हैं।

उम्र बढऩे के साथ वजन बढऩे की इस प्रक्रिया से स्त्रियों में हायपरटेंशन, हृदय रोग और डायबिटीज के खतरे बढ़ जाते हैं। इसका दोष हॉर्मोन में बदलाव को दिया जाता है, जो सही नहीं है। शोध से यह साबित हो चुका है कि वजन बढऩे की अनुवांशिक प्रवृत्ति वाली स्त्रियों का वजन तभी बढऩा शुरु हो जाता है, जब उनके पीरियड शुरु होते हैं या जब वे गर्भवती होती हैं या फिर जब वे मेनोपॉज से गुजरती है। इसके साथ ही यह भी सच है कि कई स्त्रियां, जो अनुवांशिक रूप से पतली रहती हैं, वे तब भी पतली रहती हैं, जब मेनोपॉज होता है।

गर्भनिरोधक दवाएं

तमाम स्त्रियां ये सोचती हैं कि गर्भनिरोधक के सेवन से उनका वजन बढ़ रहा है। जब कि गर्भनिरोधक गोलियों से वजन बढऩे के कोई प्रमाण नहीं हैं। हालांकि एक-दो शोध में ऐसे संकेत मिले हैं, जो स्त्रियां डेपो-प्रोवेरा इंजेक्शन लेती हैं, उनमें 3-5 किलो तक वजन बढ़ता है और बॉडी फैट तीन सालों में करीब 3.4 प्रतिशत तक बढ़ता है। हालांकि यह साबित करना संभव नहीं है कि यह गर्भनिरोधक दवाएं लेने के परिणाम हैं। इसलिए प्रत्येक गर्भनिरोधक दवा का वजन संबंधी प्रभाव के लिए डॉक्टर द्वारा आकलन किया जाना जरूरी है।

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मेटाबॉलिक रेट

वैसे तो थायरॉयड एक महत्वपूर्ण हॉर्मोन है लेकिन इससे वजन नहीं बढ़ता। थायरॉयड की कमी से फैट सेल्स नहीं बढ़ते, हालांकि इससे शरीर में द्रव्य बनता है या फिर बेसल मेटाबॉलिक रेट में बदलाव आता है। आमतौर पर हायपर थायरॉयड से वजन नहीं बढ़ता, लेकिन गंभीर मामलों में इससे 10 प्रतिशत की मामूली वजन वृद्धि हो सकती है, जो कि शरीर में नमक और पानी के कारण होता है न कि फैट सेल्स से। और यह वृद्धि थायरॉयड का इलाज शुरु करने के 10-15 दिनों के भीतर सामान्य हो जाती है। इलाज के बाद धीरे-धीरे थायरॉयड के कारण किसी भी प्रकार की वजन वृद्धि/कमी नहीं रह जाती।

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